**तथाकथित पत्रकार राजेन्द्र गौतम का पर्दाफाश: हॉकर से करोड़पति बना ब्लैकमेलर, IAS अफसरों को फंसाने की रची साजिश!**
**राजेन्द्र गौतम का काला साम्राज्य: फर्जी खबरों और 'दलित कार्ड' की आड़ में वसूली का सबसे बड़ा खेल!**

# **महापर्दाफाश: निष्पक्ष अधिकारियों को ब्लैकमेल करने वाले सिंडिकेट का सबसे बड़ा खुलासा! हॉकर से ‘करोड़पति’ बने शातिर पत्रकार का काला साम्राज्य**
**नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का महा-अभियान पार्ट-1-का पहला व बड़ा खुलासा, अगले अन्य तमाम खुलासों में होगा और बड़े गिरोह का पर्दाफाश**
**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में कड़क, निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की साख पर हमला करने वाले एक अत्यंत शातिर ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। ‘निष्पक्षता’ का नकाब पहनकर लखनऊ में सक्रिय यह गैंग वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों पर दबाव बनाकर अवैध वसूली का धंधा चला रहा है।
इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार राजेन्द्र गौतम है, जो ‘निष्पक्ष दिव्य संदेश टाइम्स’ अखबार और ‘दिव्य संदेश’ वेब पोर्टल चलाता है। ‘ब्यूरोक्रेसी’ नाम से कार्यक्रम चलाकर यह बिना किसी पुख्ता प्रमाण के अधिकारियों के खिलाफ अनर्गल, मनगढंत और भ्रामक खबरें पब्लिश करता है, ताकि उनकी प्रशासनिक व सामाजिक प्रतिष्ठा को पूरी तरह धूमिल किया जा सके।
## **हॉकर से ‘करोड़पति पत्रकार’ बनने का सफर: जांच के घेरे में अकूत संपत्ति**
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपी की पृष्ठभूमि और उसकी अप्रत्याशित संपत्ति है:
* **शुरुआती सफर:** कभी साधारण हॉकर का काम करने वाला राजेन्द्र गौतम आज उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता बनकर बैठा है और ब्लैकमेलिंग के जरिए करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन चुका है।
* **अवैध जमीन पर प्रिंटिंग प्रेस:** सवाल यह उठता है कि एक सामान्य पोर्टल चलाने वाले के पास करोड़ों रुपये की हाई-टेक प्रिंटिंग मशीनें कहां से आईं? दावा है कि जिस जमीन पर यह सेटअप और प्रिंटिंग प्रेस स्थापित है, वह पूरी तरह अवैध कब्जा है।
* **मलिहाबाद का फार्महाउस और आम का बाग:** केवल प्रिंटिंग प्रेस ही नहीं, बल्कि मलिहाबाद में करोड़ों की कीमत का एक आलीशान फार्महाउस और आम का बड़ा बाग भी इसके पास है। एक साधारण पत्रकारिता के पेशे से इतनी बेहिसाब संपत्ति कैसे खड़ी हुई, यह शासन और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा विषय है।
## **कड़क IAS संजय प्रसाद को फंसाने की साजिश और दलित कार्ड का दुरुपयोग**
इस सिंडिकेट के निशाने पर मुख्य रूप से शासन के सख्त और पारदर्शी आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद हैं। गृह और सूचना विभाग जैसे संवेदनशील पदों पर रहते हुए उन्होंने जिस प्रशासनिक अनुशासन को लागू किया, उससे दलालों और ब्लैकमेलरों की दुकानें बंद हो गईं।
जब संजय प्रसाद ने किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ दुष्प्रचार का यह घिनौना अभियान शुरू किया गया:
* **दलित कार्ड का दुरुपयोग:** राजेन्द्र गौतम एक दलित आईएएस का सहारा लेकर और खुद को दलित बताकर अधिकारियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने तथा दबाव बनाने की धमकियां देता है। इस कार्ड का इस्तेमाल वह विशुद्ध रूप से ब्लैकमेलिंग के ढाल के रूप में कर रहा है।
* **न्यायिक प्रक्रिया का हनन:** पहले वेब पोर्टल पर झूठी खबरें चलाकर माहौल बनाया गया, फिर मानसिक दबाव डालने के लिए हाईकोर्ट में आधारहीन जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई। वहां खारिज होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाने का ढोंग किया गया ताकि मीडिया अटेंशन पाई जा सके।
## **मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की आड़ में टूलकिट का खेल**
इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति से जुड़े हेमंत तिवारी जैसे चेहरों से भी जुड़ रहे हैं:
* **पीछे से लॉबिंग और टूलकिट का इस्तेमाल:**
काबिलेगौर है कि हेमंत तिवारी पर्दे के पीछे से आईएएस अधिकारियों के खिलाफ लॉबिंग कराता है। जो अधिकारी उसके मित्र होते हैं, उन्हीं के खिलाफ वह राजेन्द्र गौतम जैसे मोहरों से खबरें छपवाता है ताकि प्रशासनिक हलकों में उसकी अपनी साख और डर बना रहे।
* **दोहरा खेल:** हेमन्त तिवारी द्वारा राजेन्द्र गौतम को एक ‘टूलकिट’ की तरह इस्तेमाल करता है और अधिकारियों को डराकर अपने उल्लू सीधे करने का समानांतर नेटवर्क चला रहा है।
## **पुराना रिकॉर्ड: सहगल प्रकरण में करोड़ों की ऐंठ**
यह पहली बार नहीं है जब इस सिंडिकेट ने किसी अधिकारी को निशाना बनाया है। इससे पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल के खिलाफ भी इसी तरह का चरित्र-हनन अभियान चलाया गया था। आरोप है कि झूठी और भ्रामक खबरों के जरिए मानसिक दबाव बनाकर करोड़ों रुपये की साठगांठ की गई और वसूली होते ही पोर्टल पर रातों-रात अधिकारी का गुणगान शुरू हो गया।
## **कठोर कानूनी कार्रवाई और जांच की मांग**
पत्रकारिता के नाम पर दलाली और ब्लैकमेलिंग का यह संगठित धंधा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए कलंक है।
* **तत्काल निष्पक्ष जांच:** शासन, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), राजस्व विभाग और सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) से पुरजोर मांग की जा रही है कि राजेन्द्र गौतम की अवैध संपत्तियों, मलिहाबाद फार्महाउस, अवैध जमीन पर बनी प्रिंटिंग प्रेस और आय के स्रोतों की तत्काल जांच कराई जाए।
* **कठोर कार्रवाई:** निष्पक्ष अधिकारियों को डराकर धन उगाही करने वाले और पत्रकारिता को हथियार बनाने वाले इस सिंडिकेट व इसके मददगारों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था की शुचिता बनी रहे।
