## **यूपी में बड़ा पर्दाफाश: अफ़सरों को ब्लैकमेल करने का सिंडिकेट बेनकाब!**
## **महाखुलासा: 'फ़ेक न्यूज़' से अफ़सरों पर दबाव... ब्लैकमेलिंग का खेल ख़त्म!**


# **महापर्दाफाश: उत्तर प्रदेश की नौकरशाही पर दबाव बनाने की साज़िश!**
## **पत्रकारिता के नकाब में ब्लैकमेलिंग का समानांतर खेल: फर्जी खबरों से अधिकारियों को डराने और अकूत संपत्ति खड़ा करने की इनसाइड स्टोरी**
**(*विशेष अन्वेषी रिपोर्ट*
*नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क)**
**लखनऊ।**उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बेहद गंभीर और खतरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। राज्य को विकास की राह पर ले जाने वाले कड़क, पारदर्शी और कर्तव्यनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की साख पर हमला कर उन्हें मानसिक दबाव में लेने की एक सुनियोजित साज़िश रची जा रही है। ‘निष्पक्षता’ और ‘चौथे स्तंभ’ का मुखौटा पहनकर पत्रकारिता के कुछ विवादित चेहरे अधिकारियों के खिलाफ भ्रामक, अनर्गल और पूरी तरह प्रायोजित खबरें चलाकर भय का माहौल पैदा कर रहे हैं। इस पूरे नेटवर्क का एकमात्र मकसद प्रशासनिक तंत्र को डराकर अपनी दलाली चमकाना, अवैध वसूली करना और अपना उल्लू सीधा करना है।
उत्तर प्रदेश की शासन व्यवस्था को अंदर से खोखला करने वाले इस गिरोह के तार अब खुलने लगे हैं। जाँच पड़ताल और प्राथमिक तथ्यों से यह बात सामने आई है कि **राजेन्द्र गौतम** और **अभिषेक उपाध्याय** भले ही अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स और माध्यमों से काम करते हों, लेकिन अधिकारियों को टारगेट करने, फर्जी खबरें गढ़ने और ब्लैकमेलिंग का चक्रव्यूह रचने की इनकी कार्यशैली (Modus Operandi) एक समान ही है।
## **अभिषेक उपाध्याय: भ्रामक आंकड़ों और दुष्प्रचार का खतरनाक चक्रव्यूह**
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही को डराने और शासन के शीर्ष अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाने के लिए अभिषेक उपाध्याय द्वारा रचे जा रहे साज़िशों के खेल अब बेनकाब हो रहे हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ एक विशेष पैटर्न के तहत अभियान चलाया जाता है!
### **1. संजय प्रसाद प्रकरण में झूठा दुष्प्रचार**
उत्तर प्रदेश शासन के कड़क, निष्पक्ष और बेदाग छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी **संजय प्रसाद** को निशाना बनाने के लिए अभिषेक उपाध्याय के गिरोह ने सोशल मीडिया और अपने नेटवर्क का इस्तेमाल किया। सबसे पहले यह मनगढंत और फर्जी अफवाह फैलाई गई कि *”मुख्यमंत्री अधिकारी से नाराज हैं”* और *”उन्हें जल्द पद से हटाया जा रहा है”*।
इस भ्रामक खबर का मकसद अधिकारी का मनोबल तोड़ना और प्रशासनिक हल्का में असमंजस पैदा करना था। जब वरिष्ठ अधिकारी ने किसी भी अनुचित दबाव या ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ भ्रामक और अनर्गल अभियानों की धार को और तेज कर दिया गया।
### **2. सोशल मीडिया पर आंकड़ों की बाजीगरी और भ्रामक प्रचार**
अभिषेक उपाध्याय की कार्यशैली का मुख्य हिस्सा बिना किसी पुख्ता प्रमाण, बिना किसी आधिकारिक बयान या सरकारी आंकड़ों के केवल सोशल मीडिया पर झूठी सनसनी फैलाना है। मनगढंत आंकड़े पेश करके और काल्पनिक कहानियों के सहारे अधिकारियों में डर बैठाने का काम किया जा रहा है, ताकि अधिकारी घबराकर उनके एजेंडे के सामने सरेंडर कर दें।
## **राजेन्द्र गौतम का साम्राज्य: हॉकर से ‘करोड़पति’ बनने की इनसाइड स्टोरी**
दूसरी तरफ, ‘निष्पक्ष दिव्य संदेश टाइम्स’ समाचार पत्र और ‘दिव्य संदेश’ न्यूज पोर्टल चलाने वाले **राजेन्द्र गौतम** की अकूत संपत्ति, रातों-रात खड़ा हुआ साम्राज्य और संदिग्ध गतिविधियों पर भी अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
### **1. अवैध कब्जे की जमीन पर हाई-टेक प्रिंटिंग प्रेस**
कभी बेहद साधारण स्थिति में अखबार का हॉकर (वितरक) के रूप में काम करने वाले राजेन्द्र गौतम के पास महज कुछ ही वर्षों में करोड़ों रुपये की हाई-टेक प्रिंटिंग मशीनें और आलीशान इंफ्रास्ट्रक्चर कहाँ से आया? स्थानीय सूत्रों और प्राथमिक शिकायतों के अनुसार, जिस जमीन पर यह प्रिंटिंग प्रेस और बड़ा मीडिया सेटअप खड़ा किया गया है, वह पूरी तरह से सरकारी व अवैध कब्जे की जमीन है।
### **2. मलिहाबाद का करोड़ों का आलीशान फार्महाउस**
राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बना आलीशान फार्महाउस और आम का विशाल बाग राजेन्द्र गौतम की उस काली कमाई का सीधा प्रमाण है, जो उसने पत्रकारिता के नाम पर चलाई जा रही वसूली से हासिल की है। यह फार्महाउस इस बात का सबूत है कि पत्रकारिता तो महज एक ‘फ्रंट’ (दिखावा) है, असली धंधा ब्लैकमेलिंग और जमीनों के हेरफेर का है।
## **खेल जगत में ठगी: मासूम खिलाड़ियों की आड़ और ताइक्वांडो संघ में गबन**
राजेन्द्र गौतम के अवैध कारनामे केवल मीडिया या पत्रकारिता के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहे। उसने मासूम बच्चों और युवाओं के खेल जगत को भी अपनी अवैध कमाई और वित्तीय ठगी का जरिया बना लिया।
* **मासूम बच्चों का इस्तेमाल:** खुद को फर्जी तरीके से ताइक्वांडो संघ/यूनियन का प्रादेशिक अध्यक्ष बताकर उसने मासूम बच्चों और खिलाड़ियों की आड़ में संघ का संचालन अपने हाथ में लिया।
* **करोड़ों का वित्तीय गबन:** खेल के नाम पर मिलने वाले सरकारी व निजी अनुदानों, खिलाड़ियों से ली जाने वाली फीस और स्पॉन्सरशिप में करोड़ों रुपये का घपला किया गया।
* **फर्जी दस्तावेजों पर संदिग्ध विदेश यात्राएं:** ताइक्वांडो संघ के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कई संदिग्ध विदेश यात्राएं की गईं। इन यात्राओं का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इनके लिए फंडिंग कहाँ से आई, इसकी जाँच होना अत्यंत आवश्यक है।
## **लॉबिंग का टूलकिट नेटवर्क और ‘दलित कार्ड’ का घटिया दुरुपयोग**
इस पूरे सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से संरक्षण देने और अपनी राजनैतिक व प्रशासनिक दलाली चमकाने वाले चेहरों का पैटर्न भी कम खतरनाक नहीं है।
### **1. ‘दलित कार्ड’ का घटिया हथियार**
जब कोई कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी किसी भी दबाव, धौंस या ब्लैकमेलिंग के आगे नहीं झुकता, तो राजेन्द्र गौतम तुरंत विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर देता है। वह खुद को दलित बताकर और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) कानूनों का दुरुपयोग करने की धमकी देता है। यहाँ तक कि वह दलित आईएएस अधिकारियों का नाम उछालकर अधिकारियों पर फर्जी मुकदमों में फंसाने का दबाव बनाता है।
### **2. वरिष्ठ आईएएस नवनीत सहगल प्रकरण की पुनरावृत्ति का प्रयास**
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का घटिया हथकंडा अपनाया गया हो। इससे पहले उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी **नवनीत सहगल** के खिलाफ भी इसी तरह चरित्र-हनन और दुष्प्रचार का सुनियोजित अभियान चलाकर उन्हें ब्लैकमेल करने और झुकाने की नाकाम कोशिश की गई थी।
## **लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बचाने के लिए SIT, विजिलेंस, LDA और STF जाँच अनिवार्य**
प्रशासनिक अधिकारियों को डरा-धमकाकर वसूली करने, सरकारी तंत्र को पंगु बनाने और मीडिया जैसे पवित्र माध्यम को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाने का यह पूरा खेल लोकतंत्र और राज्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक है। यदि समय रहते इन पर कठोर कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया, तो निष्पक्ष अधिकारियों का काम करना असंभव हो जाएगा।
### **शासन व जाँच एजेंसियों से निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग:**
**अवैध संपत्तियों पर चले बुलडोजर:** लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और विजिलेंस विभाग तुरंत राजेन्द्र गौतम की अवैध जमीनों पर बने निर्माण, मलिहाबाद स्थित आलीशान फार्महाउस और प्रिंटिंग प्रेस के वित्तीय स्रोतों की फोरेंसिक जाँच करे तथा अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाए।
**पत्रकार मान्यता रद्द हो एवं SIT गठित हो:** राज्य मुख्यालय से राजेन्द्र गौतम को दी गई पत्रकार मान्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। इसके साथ ही ताइक्वांडो संघ के नाम पर किए गए करोड़ों के वित्तीय गबन और फर्जी दस्तावेजों पर की गई विदेश यात्राओं की **SIT (विशेष जाँच दल)** गठित कर जाँच कराई जाए।
* **कठोरतम कानूनी कार्रवाई (FIR & Arrest):** राज्य प्रशासनिक व्यवस्था को ब्लैकमेल करने, अधिकारियों की साख खराब करने और फर्जी दस्तावेज गढ़ने वाले इन सभी चेहरों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें तत्काल जेल भेजा जाए।
