*खाकी या डकैती? लखनऊ में ‘मासिक नजराना’ न मिलने पर खाकी का नंगा नाच, पत्रकार की बस का काटा ₹2000 का फर्जी चालान! टीएसआई बोला पैसा मैडम के पास जाता है**
**31 तारीख का ‘वसूली टारगेट’! चलती बस का ‘नो पार्किंग’ चालान काटने वाले TSI पर उठे सवाल—'रिश्वत बंद करो या बसें!'**

**वसूली गैंग या खाकी वर्दी? लखनऊ में ट्रैफिक पुलिस का नंगा नाच: ’31 तारीख’ के नाम पर डकैती, पत्रकार की बस का ₹2000 का फर्जी चालान!**
**लखनऊ।** नवाबों की नगरी लखनऊ अब ‘ट्रैफिक वसूली हफ्ता’ का अड्डा बन चुकी है। सड़कों पर नियम-कानून सिखाने का दावा करने वाली ट्रैफिक पुलिस अब सीधे-सीधे गुंडागर्दी और हफ्ता वसूली पर उतर आई है। आलम यह है कि खाकी वर्दी के रसूखदार नुमाइंदों के आगे अब आम जनता ही नहीं, बल्कि चौथा स्तंभ यानी मीडिया भी लाचार है! लखनऊ के टीएसआई व अन्य ट्रैफिक पुलिस खुलेआम तेजतर्रार व ईमानदार महिला आईपीएस व ट्रैफिक पुलिस लखनऊ की जिम्मेदार अधिकारी रवीना त्यागी के नाम पर जमकर वसूली कर रहे हैं ऐसे मामले शायद रवीना त्यागी को पता न हो लेकिन लखनऊ के सभी बस मालिकों व चालकों को पता है क्योंकि खुलेआम नाम लेकर लखनऊ की ट्रैफिक पुलिस जबरदस्त वसूली कर रही है और बोलती है कि पैसा मैडम के पास जाता है।
नेशनल पीजी कॉलेज (चिरैया झील) के पास **TSI प्रमोद सिंह** की ऐसी ही शर्मनाक करतूत सामने आई है, जिसने योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा दी हैं।
### *महीना खत्म हो रहा है, भेंट चढ़ाने कोई नहीं आया! वसूली का पैसा मैडम के पास जाता है” — खाकी का बेखौफ कबूलनामा*
घटना आज दोपहर ठीक **2:25 बजे** की है। वरिष्ठ पत्रकार **शोएब मिर्जा** की बस (**UP 42 BT 9177**) जैसे ही चिरैया झील के पास पहुँची, TSI प्रमोद सिंह ने उसे किसी लुटेरे की तरह घेर लिया। गाड़ी रोकने का मकसद यातायात व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि **’मासिक नजराना’** ऐंठना था।
जब पत्रकार ने जायज सवाल पूछते हुए रिश्वत देने से साफ मना कर दिया, तो TSI प्रमोद सिंह ने खाकी की सनक दिखाते हुए बेझिझक कहा:
> **”आज 31 तारीख है, महीना खत्म हो रहा है… अभी तक कोई मिलने (कमिशन देने) नहीं आया!”**
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पैसे न मिलने से बौखलाए अफसर ने चंद सेकंड में पत्रकार को सबक सिखाने के लिए मोबाइल पर **₹2,000 के चालान** का मैसेज ठोक दिया।
### *चलती बस का ‘नो पार्किंग’ और फर्जी ‘प्रेशर हॉर्न’ का चालान*
बस मालिकों की मानें तो यह सिर्फ एक चालान की बात नहीं है, बल्कि लखनऊ में एक संगठित **’चालान सिंडिकेट’** चल रहा है।
* **सारे कागज OK, फिर भी चालान:** इंश्योरेंस, फिटनेस, परमिट सब दुरुस्त होने के बावजूद गाड़ियों पर धारा 66/192 (परमिट शर्तों का उल्लंघन) चिपका दी जाती है।
* **अजब-गजब कानून:** बीच सड़क पर चलती हुई बस का **’नो पार्किंग’** और फर्जी **’प्रेशर हॉर्न’** के नाम पर चालान काटा जा रहा है।
> **”हर महीने ₹50,000 तो सिर्फ चालान में चला जाता है! हम गाड़ियाँ चलाएँ या बैंक डकैती डालें? खाकी वर्दी जब लुटेरी बन जाए तो व्यापारी कहाँ जाए?”** — भड़के बस मालिकों की हुंकार
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### *बस मालिकों का अल्टीमेटम: या तो वसूली बंद करो, या बसों की बिक्री पर बैन लगाओ*
लगातार हो रही इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से आजिज आकर बस संचालकों ने अब सीधे सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीन कड़े सवाल और माँगें दागी हैं:
1. **बसों की बिक्री पर तुरंत बैन लगे:** जब बिना रिश्वत दिए जिले में बस चलाना मुमकिन ही नहीं है, तो RTO और एजेंसियाँ नई बसें बेचना बंद करें।
2. **सेल के साथ ही मिले परमिट:** बस बिकते ही उसे तय रूट परमिट दिया जाए, ताकि सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की ब्लैकमेलिंग बंद हो सके।
3. **All UP / All India परमिट का सम्मान हो:** नेशनल या ऑल यूपी परमिट वाली गाड़ियों को जिले के अंदर बिना किसी अवैध वसूली या फर्जी चालान के चलने की स्पष्ट छूट मिले।
### *अब सड़कों पर होगा हिसाब*
महीने की आखिरी तारीखों (30-31 तारीख) में ‘चालान का टारगेट’ पूरा करने के नाम पर मचाया जाने वाला यह तांडव अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है। बस संचालकों ने साफ कर दिया है कि अगर TSI प्रमोद सिंह जैसे भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई और यह फर्जी चालान रद्द नहीं किया गया, तो शहर की तमाम बसें खड़ी कर दी जाएँगी।
**अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस खुलेआम हो रही गुंडागर्दी पर TSI प्रमोद सिंह का निलंबन करता है या सड़कों पर चालान के नाम पर यह डकैती यूं ही चलती रहेगी!**
