*योगी आदित्यनाथ के आभामंडल से घबराया विपक्ष: शिष्टाचार पर रचा सियासी प्रपंच बेनकाब!*
*संत-सम्मान पर घटिया राजनीति: विपक्ष का 'टूलकिट एजेंडा' पूरी तरह ध्वस्त!*

फोटो- योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री
*विपक्ष का ‘सियासी प्रपंच’ बेनकाब: संतों के प्रति भारतीय संस्कृति व भाजपा की अटूट निष्ठा पर भ्रामक दुष्प्रचार ध्वस्त*
*उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने की साजिश का पर्दाफाश, तथाकथित पत्रकारों के प्रायोजित एजेंडे पर उठने लगे कठोर कार्रवाई के सवाल*
*विशेष समाचार रिपोर्ट-शिवराम(कृष्णानन्द शर्मा)*
लखनऊ / नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री पूज्य योगी आदित्यनाथ जी की हालिया दिल्ली यात्रा और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी के साथ हुई शिष्टाचार भेंट को लेकर विपक्षी दलों और सोशल मीडिया के एक वर्ग में सक्रिय तथाकथित पत्रकारों द्वारा रचा गया दुष्प्रचार का ताना-बाना पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो चुका है।
राजनीतिक दुर्भावना और वैचारिक कंगाली से ग्रसित विरोधी खेमे ने एक विशुद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक शिष्टाचार के दृश्य को जिस तरह से मरोड़कर प्रस्तुत करने की कोशिश की, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब विपक्ष के पास उत्तर प्रदेश के अभूतपूर्व विकास, मजबूत कानून व्यवस्था और सुशासन का कोई जवाब नहीं बचता, तो वह अनर्गल और भ्रामक मुद्दों की आड़ लेने को मजबूर हो जाता है।
1. *क्या है पूरा विवाद और क्या है इसका सच?*
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, एक्स/ट्विटर, यूट्यूब आदि) पर एक वीडियो व तस्वीर को आधार बनाकर विपक्षी तंत्र और कुछ प्रायोजित डिजिटल चैनलों ने नकारात्मक विमर्श (नेरेटिव) गढ़ने का कुत्सित प्रयास किया। इस वीडियो में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को हाथ जोड़कर प्रणाम करते हुए आदर व्यक्त कर रहे हैं।
विरोधी खेमे के तथाकथित राजनीतिक विश्लेषकों और ‘स्वयंभू निष्पक्ष’ पत्रकारों ने इसे राजनीतिक तराजू में तौलना शुरू कर दिया। परंतु, भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और भाजपा की विचारधारा को समझने वाला कोई भी सामान्य नागरिक इस बात को भली-भांति जानता है कि इस शिष्टाचार के पीछे कोई राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि सदियों पुरानी ‘संत-सम्मान परंपरा’ है।
2. योगी आदित्यनाथ: मात्र मुख्यमंत्री नहीं, पूज्य संत और गोरक्षपीठ के महाराज
विपक्ष और उनके इशारों पर नाचने वाले दुष्प्रचारकों को यह बुनियादी सत्य स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है कि योगी आदित्यनाथ जी केवल 25 करोड़ की आबादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं हैं, बल्कि वे गोरक्षपीठ के पूज्य महाराज और एक स्थापित सनातन संत हैं।
* भारतीय संस्कृति की परंपरा: भारत की पावन भूमि पर अनादि काल से नियम रहा है कि व्यक्ति चाहे राजनीति, व्यापार या समाज के किसी भी शीर्ष पद पर आसीन क्यों न हो, जब वह किसी पूज्य संत या संन्यासी के समक्ष उपस्थित होता है, तो सिर झुकाना और हाथ जोड़कर प्रणाम करना हमारी आस्था का स्वाभाविक प्रकटीकरण है।
* भाजपा का विचार और इतिहास: भारतीय जनता पार्टी के मूल डीएनए में संस्कृति, धर्म और संतों के प्रति अगाध श्रद्धा समाहित है। भाजपा ने कभी भी संतों के सम्मान को राजनीति का विषय नहीं बनाया, बल्कि संतों के आशीर्वाद को राष्ट्र निर्माण की शक्ति माना है।
जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी ने अपने व्यक्तिगत और दलीय संस्कारों का परिचय देते हुए एक पूज्य संत के समक्ष हाथ जोड़े, तो उन्होंने भारत के उसी महान सांस्कृतिक मूल्य का पालन किया। इसमें किसी राजनीतिक विश्लेषण या उँगली उठाने की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं है।
*जहाँ संतों का आदर ही संस्कृति की नींव हो, वहाँ प्रणाम करने की क्रिया को राजनीतिक चश्मे से देखना विपक्ष की घोर अज्ञानता और सनातन मूल्यों के प्रति उनके दुराग्रह को दर्शाता है।*
3. *विरोधी खेमे और तथाकथित पत्रकारों का ‘टूलकिट एजेंडा*
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे का असली खेल सोशल मीडिया पर चल रहा वह ‘टूलकिट एजेंडा’ है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की बढ़ती साख को ठेस पहुँचाने के लिए तैयार किया गया है।
दुष्प्रचार के पीछे के मुख्य कारण:
* उत्तर प्रदेश का अभूतपूर्व विकास: योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे प्रदेश बन चुका है, राज्य में उद्योग आ रहे हैं, बेरोजगारी दर घटी है और पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक विकास की गंगा बह रही है।
* अपराध और माफिया राज पर जीरो टॉलरेंस: माफियाओं के साम्राज्य को ध्वस्त कर राज्य में जो शांति और सुरक्षा का माहौल कायम किया गया है, उससे विपक्षी दलों का पारंपरिक ‘वोट बैंक’ खिसक चुका है।
* सांस्कृतिक पुनर्जागरण: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण से लेकर काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा-वृंदावन के कायाकल्प तक, योगी आदित्यनाथ जी ने सांस्कृतिक धरोहरों को जो वैश्विक पहचान दी है, वह विरोधी दलों की आंखों में खटक रही है।
जब विपक्षी दल इन तमाम उपलब्धियों का नीतिगत मुकाबला करने में पूरी तरह असहाय हो गए, तो उन्होंने इस प्रकार के सूक्ष्म और निरर्थक मुद्दों को हवा देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
4. *सूचना विभाग और उत्तर प्रदेश को बदनाम करने का कुचक्र*
इस दुष्प्रचार का एक खतरनाक पहलू यह भी है कि विरोधी खेमे से जुड़े कुछ तथाकथित डिजिटल पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग और शासकीय तंत्र पर भी अनर्गल टिप्पणियां कीं।
सोशल मीडिया पर व्यूज (Views) और सनसनी फैलाने के लालच में फर्जी खबरें परोसना, वीडियो की आधी-अधूरी क्लिप्स चलाकर जनता में भ्रम पैदा करना और एक संत-मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुँचाना—यह पत्रकारिता के मानकों का खुला उल्लंघन है। इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ नहीं, बल्कि ‘पत्रकारिता का राजनीतिकरण और चरित्र हनन’ कहा जाएगा।
5. कड़े एक्शन की उठती मांग: ऐसे पत्रकारों पर हो कठोर कानूनी कार्रवाई
इस फर्जी विमर्श के बेनकाब होने के बाद अब देश और प्रदेश के प्रबुद्ध वर्ग, राष्ट्रवादी विचारकों और आम जनता की ओर से यह मांग जोर पकड़ रही है कि डिजिटल मीडिया के नाम पर अफवाह फैलाने वाले ऐसे तत्वों पर लगाम लगाई जानी चाहिए।
* सोशल मीडिया पर जवाबदेही तय हो: जो पत्रकार या संगठन जानबूझकर भ्रामक हेडलाइंस बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री जी की छवि को नुकसान पहुँचाने का कुचक्र रच रहे हैं, उन पर उत्तर प्रदेश शासन और साइबर क्राइम विभाग द्वारा कठोरतम धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
* पत्रकारिता के नाम पर एजेंडा चलाने वालों का बहिष्कार: जनता को भी यह संदेश स्पष्ट रूप से मिल चुका है कि कौन सत्य की रिपोर्टिंग कर रहा है और कौन किसी राजनीतिक दल की कठपुतली बनकर ‘फेक न्यूज’ का कारोबार चला रहा है।
*निष्कर्ष: सत्यमेव जयते — सांच को आंच नहीं*
उत्तर प्रदेश की जनता और देश का जनमानस बेहद समझदार है। वह भली-भांति जानता है कि संतों के चरणों में शीश झुकाना भारत की उस महान परंपरा का हिस्सा है जिसे राजा-महाराजाओं से लेकर आधुनिक लोकतंत्र के ध्वजवाहकों ने हमेशा निभाया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री व पूज्य संत योगी आदित्यनाथ जी का सत्कार करना भारतीयता का गौरव है। विरोधियों द्वारा इस मुद्दे पर रचा गया सियासी ड्रामा न केवल फुसफुसाकर खत्म हो गया है, बल्कि इसने विपक्ष के सनातन विरोधी और संकीर्ण मानसिक रवैये को एक बार फिर पूरे देश के सामने नंगा कर दिया है।
योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बिना रुके, बिना झुके विकास और सुशासन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा; और दुष्प्रचार की राजनीति करने वालों को जनता हर मोर्चे पर यूं ही नकारती रहेगी।