*21 हज़ार का चालान, 27500 हज़ार की घूस! बाराबंकी ARTO ऑफिस में वसूली 'गैंग' बेपर्दा!*
*बाराबंकी ARTO में 'सिंडिकेट राज': फर्जी चालान, अवैध उगाही और पक्षपात का खुला खेल!*

*बाराबंकी ARTO कार्यालय में ‘सिंडिकेट राज’: मोहक दुबे और सिपाही की मनमानी से वाहन मालिक त्रस्त, अवैध वसूली और जातिवाद का फूटा ‘बम*
*रिपोर्ट -कृष्णानन्द शर्मा*
लखनऊ।उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में परिवहन विभाग (ARTO) अब ‘सुशासन’ के बजाय ‘उत्पीड़न और अवैध उगाही’ का अड्डा बनता जा रहा है। ARTO मोहक दुबे और विवादित सिपाही इमामुद्दीन की जोड़ी पर आरोप है कि इन्होंने जिले में चेकिंग के नाम पर पूरी तरह ‘दहशत’ का माहौल बना रखा है। ताजा मामले में एक निष्पक्ष पत्रकार की बस को नियम-कानून ताक पर रखकर सीज करने और फिर उसे छोड़ने के एवज में हजारों की ‘अवैध कटमनी’ मांगने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है।
*कागजात ओके, फिर भी ₹21,000 का चालान!’ — चेकिंग के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल?*
मामला वरिष्ठ पत्रकार मिर्जा शोएब की बस (UP 42 BT 9177) से जुड़ा है। बस मालिक का स्पष्ट दावा है कि वाहन के सभी वैध दस्तावेज़ (परमिट, फिटनेस, इंश्योरेंस आदि) पूरी तरह सही थे। इसके बावजूद, ARTO मोहक दुबे ने जबरन परमिट उल्लंघन, प्रेशर हॉर्न और सीट बेल्ट की मनगढ़ंत धाराएं लगाकर ₹21,000 का भारी-भरकम चालान ठोक दिया।
यात्रियों का उत्पीड़न: कार्रवाई के दौरान ARTO ने मानवता को शर्मसार करते हुए चलती बस से यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरवा दिया और गाड़ी को सीधे डिपो में बंद करा दिया।
जाति देखकर छोड़ी गाड़ियां’: चश्मदीदों और पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि चेकिंग स्थल पर अन्य गाड़ियां भी रोकी गई थीं, लेकिन ‘जातिगत पक्षपात’ के चलते खास लोगों की गाड़ियों को बिना किसी कार्रवाई के जाने दिया गया, जबकि पत्रकार की बस को निशाना बनाया गया।
*कार्यालय के भीतर खुला ‘अवैध वसूली केंद्र’: ₹21,000 के चालान पर मांगी ₹27,500 की घूस!*
जब पीड़ित बस मालिक का स्टाफ चालान का भुगतान कर बस रिलीज कराने ARTO कार्यालय बाराबंकी पहुंचा, तो वहां भ्रष्टाचार की एक और काली सच्चाई सामने आई।
*बाबू अनिकेत का खुला फरमान:*
कार्यालय के बाबू अनिकेत ने साफ लहजे में कह दिया कि — “21,000 का चालान भले ही हो, लेकिन साहब (ARTO) का सख्त निर्देश है कि ₹27,500 दिए बिना गाड़ी रिलीज नहीं होगी।” यानी खुलेआम ₹6,500 की extra वसूली!
*दागी सिपाही इमामुद्दीन का कारनामा:*
ARTO का दाहिना हाथ बना सिपाही इमामुद्दीन दिन-रात अवैध वसूली के खेल को अंजाम दे रहा है। सूत्रों की मानें तो यह वही सिपाही है जो पहले सीतापुर में तैनात था और वहां गंभीर शिकायतों के बाद इसे बाराबंकी ‘डिस्पोज़’ किया गया था, लेकिन इसके तौर-तरीके नहीं बदले।
*सरकारी रैलियों में ‘मुफ़्त बसें’, बदले में ‘प्रताड़ना का इनाम’!*
बस मालिकों का दर्द यह भी है कि जब भी शासन-प्रशासन की रैलियों या अन्य कार्यक्रमों के लिए गाड़ियों की जरूरत होती है, तो परिवहन विभाग इन्हीं बस मालिकों से गाड़ियां मांगता है। हाल ही में फैजाबाद ARTO के कहने पर इसी बस को 4 दिनों के लिए बनारस भेजा गया था, जिसका एक रुपया भी आज तक बकाया भुगतान के रूप में नहीं मिला।
सवाल यह है कि जो बस मालिक सरकार के हर काम में सहयोग करते हैं, क्या उन्हें यही सिला मिलेगा?
*आक्रोशित बस मालिकों और जनता की शासन से सीधी मांग:*
* अकूत संपत्ति की ED/EOW जांच हो: ARTO मोहक दुबे और सिपाही इमामुद्दीन की वर्तमान संपत्ति की जांच कराई जाए। आरोप है कि इनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से कई सौ गुना अधिक (अनुपातिक संपत्ति) है।
* सड़क से हटाकर ‘रिजर्व’ किया जाए: पक्षपातपूर्ण और भ्रष्ट आचरण करने वाले इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से फील्ड ड्यूटी से हटाकर कार्यालय में अटैच/रिजर्व किया जाए।
* वसूली गैंग पर चले बुलडोजर: सरकार और पुलिस-प्रशासन की छवि को मटियामेट करने वाले इस वसूली सिंडिकेट पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
ऑडियो रिकॉर्डिंग’ और पुख्ता सबूतों के आधार पर यह साफ हो चुका है कि बाराबंकी ARTO कार्यालय में क्या चल रहा है। अब देखना यह है कि लखनऊ बैठा शासन इस ‘भ्रष्टाचार के खेल’ पर कब तक खामोश रहता है या फिर इन बेलगाम अफसरों पर कोई सख्त गाज गिरती है!
