**दिल्ली दरबार तक पहुँचा पत्रकारों का संघर्ष, पेंशन योजना पर रक्षा मंत्री का बड़ा आश्वासन**
**वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन की आस: राजनाथ सिंह बोले— "सीएम योगी से खुद करूंगा बात"**

*रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले— “यह तो होना ही चाहिए, सीएम योगी से खुद करूंगा बात*
**नई दिल्ली**उत्तर प्रदेश के मीडिया जगत में बीते कई वर्षों से लंबित वरिष्ठ पत्रकारों की सम्मान पेंशन योजना की मांग को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक समर्थन मिला है। देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के लोकप्रिय सांसद **श्री राजनाथ सिंह** ने प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन दिए जाने की मांग का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने न केवल इस मांग को पूर्णतः जायज ठहराया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे इस कल्याणकारी योजना को लागू कराने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ** से स्वयं सीधी बातचीत करेंगे।
यह महत्वपूर्ण आश्वासन उस समय आया जब **उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित)** के संयोजक **प्रभात त्रिपाठी** और नवनियुक्त अध्यक्ष **विक्रम सिंह** ने नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्री के सरकारी आवास पर उनसे शिष्टाचार मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री को प्रदेश के पत्रकारों की समस्याओं, संघर्षों और विशेष रूप से जीवन के उत्तरार्ध में आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकारों की स्थिति से अवगत कराते हुए एक मांग पत्र सौंपा।
## *अत्यंत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई मुलाकात*
नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक न केवल औपचारिकताओं तक सीमित रही, बल्कि बेहद आत्मीय और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। लखनऊ से सांसद होने के नाते श्री राजनाथ सिंह का उत्तर प्रदेश के पत्रकारों और लखनऊ की पत्रकारिता से हमेशा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है।
मुलाकात के दौरान जब समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन देने का प्रस्ताव उनके समक्ष रखा, तो रक्षा मंत्री ने बिना किसी झिझक के त्वरित प्रतिक्रिया दी। उनके मुख से निकले शब्द थे— **”यह तो होना ही चाहिए!”**
> **”उत्तर प्रदेश के उन वरिष्ठ पत्रकारों को, जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने और जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने में खपा दिया, सम्मानजनक पेंशन मिलनी ही चाहिए। मैं इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से जल्द ही स्वयं बात करूंगा।”**
> — **श्री राजनाथ सिंह**, रक्षा मंत्री एवं सांसद (लखनऊ)
>
रक्षा मंत्री के इस संवेदनशीलता से भरे बयान ने वहां मौजूद पत्रकार प्रतिनिधियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के पत्रकार समुदाय में एक नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार कर दिया है।
## *दिल्ली दरबार तक पहुँचा पेंशन के लिए मैराथन संघर्ष*
उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन दिलाने के लिए लंबे समय से ‘मैराथन प्रयास’ चलाए जा रहे हैं। कई राज्यों जैसे कि हरियाणा, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकारों के लिए मासिक सम्मान पेंशन योजना पहले से लागू है। हालांकि, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में यह मांग लंबे समय से फाइलों और आश्वासनों के बीच अटकी हुई थी।
प्रभात त्रिपाठी के नेतृत्व में ‘उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित)’ इस मुद्दे को लगातार शासन और प्रशासन के गलियारों में उठाती रही है। आज दिल्ली में रक्षा मंत्री से हुई यह मुलाकात उसी सतत संघर्ष और मैराथन प्रयासों की एक सबसे मजबूत कड़ी साबित हुई है।
पत्रकार प्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्री को बताया कि आज के दौर में जब मीडिया का स्वरूप बदल रहा है, जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके कई वरिष्ठ पत्रकार स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दी जाने वाली एक सम्मानजनक पेंशन राशि उनके बुढ़ापे का सहारा बन सकती है और उन्हें एक स्वाभिमानी जीवन जीने का अवसर दे सकती है।
## *नवनियुक्त अध्यक्ष का परिचय और फर्जी पत्रकारों पर कड़ा रुख*
इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष **विक्रम सिंह** का परिचय रक्षा मंत्री से कराया।
साथ ही, प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में राजधानी लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में चलाए गए **’फर्जी पत्रकारों के चिह्नीकरण एवं सत्यापन अभियान’** की विस्तृत जानकारी भी रक्षा मंत्री के साथ साझा की। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि किस तरह से कुछ असामाजिक और फर्जी तत्व पत्रकारिता के पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं और उनके खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान और समिति के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष विक्रम सिंह को आशीर्वाद देते हुए कहा:
* **पत्रकार हित में निरंतर कार्य:** उन्होंने विक्रम सिंह को बधाई दी और कहा कि वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ पत्रकारों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए कार्य करते रहें।
* **पत्रकारिता की गरिमा की रक्षा:** रक्षा मंत्री ने कहा कि वास्तविक और संघर्षशील पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब फर्जी तत्वों को इस क्षेत्र से बाहर किया जाए।
## *क्यों खास है राजनाथ सिंह का यह आश्वासन?*
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का इस मामले में हस्तक्षेप करना बेहद मायने रखता है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं!
1. **सांसद के रूप में आत्मीयता:** राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति व प्रशासनिक तंत्र की बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं। प्रदेश के पत्रकारों के साथ उनका लंबा और मधुर संबंध रहा है।
2. **केंद्र और राज्य के बीच मजबूत सेतु:** देश के शीर्ष नेताओं में शामिल होने के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके संबंध अत्यंत प्रगाढ़ हैं। जब राजनाथ सिंह स्वयं मुख्यमंत्री से किसी जनहित या कल्याणकारी योजना पर चर्चा करेंगे, तो उस पर त्वरित निर्णय होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
3. **अन्य राज्यों का उदाहरण:** जब अन्य राज्यों में वरिष्ठ पत्रकारों को मासिक पेंशन दी जा रही है, तो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में इसे लागू करना नीतिगत रूप से भी तर्कसंगत है।
## *प्रदेश भर के मीडिया कर्मियों में खुशी की लहर*
रक्षा मंत्री से मुलाकात और उनके द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन की खबर जैसे ही मीडिया में आई, पूरे उत्तर प्रदेश के पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों में खुशी की लहर दौड़ गई। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, प्रयागराज और मेरठ सहित प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों के वरिष्ठ पत्रकारों ने इस पहल का स्वागत किया है।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि संयोजक प्रभात त्रिपाठी के नेतृत्व में समिति ने जो प्रयास किया है, वह ऐतिहासिक है। राजनाथ सिंह द्वारा खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करने का आश्वासन दिए जाने के बाद अब यह उम्मीद पूरी तरह से बलवती हो गई है कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारों के लिए **’सम्मान पेंशन योजना’** की घोषणा कर सकती है।
## निष्कर्ष:*एक सुखद और दूरगामी परिणाम की ओर कदम
प्रभात त्रिपाठी और विक्रम सिंह की आज की नई दिल्ली यात्रा को उत्तर प्रदेश के पत्रकारिता इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सकारात्मक रुख और मुख्यमंत्री से सीधे संवाद के वादे ने इस मुद्दे को शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले एजेंडे में ला खड़ा किया है।
अब उत्तर प्रदेश के सैकड़ों वरिष्ठ पत्रकारों की नजरें राज्य सरकार की आगामी नीतियों पर टिकी हैं। यदि यह पेंशन योजना जल्द लागू होती है, तो यह न केवल जीवन भर समाज को दिशा दिखाने वाले पत्रकारों के प्रति राज्य सरकार की एक सच्ची श्रद्धा होगी, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को संबल देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी सिद्ध होगा।
