*प्रतापगढ़: ₹20 हजार की उगाही न मिलने पर खाकी का खेल: थाने में खड़ी कार को कागजों में बना दिया 'लावारिस'!*
*सुलहनामे पर भारी पड़ी रिश्वत की मांग: लीलापुर पुलिस का सनसनीखेज कारनामा, जांच के घेरे में खाकी!*

*लीलापुर पुलिस का ‘कारनामा’: थाने में खड़ी कार बनी लावारिस! ₹20 हजार की रंगदारी न मिलने पर खाकी पर उठे संगीन सवाल*
*विशेष संवाददाता, प्रतापगढ़*
प्रतापगढ़ लीलापुर। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से खाकी की साख पर बट्टा लगाने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। रानीगंज अजगरा (लीलापुर थाना) क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद थाने में खड़ी कार को, रिश्वत की मांग पूरी न होने पर पुलिस कर्मियों द्वारा अचानक कागजों में ‘लावारिस’ दाखिल कर दिया गया। पीड़ित पक्ष(समर्थक)का आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच नोटरी स्टाम्प पर लिखित समझौता और बेचनामा दाखिल किए जाने के बावजूद, सिर्फ ₹20,000 की अवैध उघारी न मिलने के कारण खाकी ने यह फर्जीवाड़ा रचा है।
*क्या है पूरा मामला?*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 28 अगस्त 2026 को लीलापुर थाना अंतर्गत रानीगंज अजगरा चौकी क्षेत्र में एक चारपहिया वाहन (UP 78 BX 9414) दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। हादसे के तुरंत बाद वाहन को लीलापुर थाने के परिसर में ही खड़ा करा दिया गया।
तत्पश्चात 31 अगस्त 2026 को मामले के दोनों पक्षों—प्रथम पक्ष सूरज शिल्पकार (निवासी सुरियावां, भदोही) और द्वितीय पक्ष राजेश कुमार गुप्ता (निवासी सोवंशा, फतनपुर, प्रतापगढ़)—के बीच ₹100 के नोटरी स्टाम्प पर कानूनी सुलह-समझौता संपन्न हो गया। समझौते के तहत द्वितीय पक्ष द्वारा प्रथम पक्ष को इलाज का पूरा खर्च ट्रांसफर कर दिया गया और दोनों पक्षों ने भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई न करने पर सहमति जताई।
*रिश्वत न मिलने पर खाकी का फर्जीवाड़ा!*
पीड़ित समर्थक का आरोप है कि लिखित समझौता पत्र और वाहन खरीद-बिक्री से जुड़े समस्त कागजात सौंपने के बाद भी लीलापुर थाना प्रभारी वारिज कशेरा और चौकी इंचार्ज डी.डी. कश्यप मामले को टालते रहे।
थाने से गाड़ी छोड़ने के नाम पर कथित तौर पर ₹20,000 की रिश्वत मांगी जा रही थी। पीड़ित समर्थक द्वारा असमर्थता जताने और कागजी औपचारिकताएं पूरी होने की बात कहने पर पुलिस अफसरों ने हीला-हवाली शुरू कर दी। अंततः, जैसे ही उच्चस्तरीय दबाव की सुगबुगाहट हुई, पुलिस ने खुद को बचाने के लिए थाने के भीतर खड़ी गाड़ी को ही अचानक शाम 4 बजे ‘लावारिस’ घोषित कर दिया(अपितु गाड़ी का विडिओ उस दिन का थाने मे लाने य मौके का विडिओ होना चाहिए)
तीन चुभते सवाल, जिनका जवाब पुलिस को देना होगा:
* थाने में खड़ी कार ‘लावारिस’ कैसे? जब 28 अगस्त से गाड़ी लीलापुर थाने के अंदर खड़ी थी, तो अचानक उसे लावारिस में दर्ज करने का क्या औचित्य है?
* नोटरी समझौते को क्यों दरकिनार किया गया? जब 31 अगस्त को पीड़ित पक्ष ने वैध सुलह-समझौता पत्र जमा करा दिया था, तो पुलिस किस कानून के तहत गाड़ी रोककर बैठी रही?
* लावारिस दाखिल करने में जल्दबाजी क्यों? रिश्वत की मांग पूरी न होने और दबाव बढ़ने के बाद ही आनन-फानन में गाड़ी को लावारिस में क्यों दिखाया गया?
*कानूनी शिकंजा: दोषी पुलिसकर्मियों पर किन धाराओं में दर्ज हो सकता है मुकदमा?*
भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं पुलिस रेगुलेशन के तहत लोक सेवकों द्वारा किया गया ऐसा कृत्य गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है:
| संबंधित कानून / धारा | अपराध का स्वरूप | संभावित सजा |
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| BNS धारा 308 (पूर्व IPC 384) | जबरन वसूली (Extortion): पदीय प्रभाव का भय दिखाकर अनुचित धन (रिश्वत) की मांग करना। | 3 वर्ष तक की कैद या जुर्माना, या दोनों। |
| BNS धारा 228 / 229 (पूर्व IPC 218/219) | सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी: थाने में मौजूद व समझौतायुक्त वाहन को जानबूझकर झूठा ‘लावारिस’ दर्शाना। | 3 से 7 वर्ष तक का कठोर कारावास। |
| BNS धारा 61(2) (पूर्व IPC 120B) | आपराधिक षड्यंत्र: पुलिसकर्मियों द्वारा परस्पर सांठगांठ कर किसी नागरिक को परेशान करने की साजिश रचना। | अपराध की गंभीरता अनुसार कठोर सजा। |
| भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 7) | रिश्वतखोरी: किसी लोक सेवक द्वारा अपने पदीय कार्य के एवज में अवैध पारितोषिक मांगना या स्वीकार करना। | 3 से 7 वर्ष का सश्रम कारावास + जुर्माना। |
| पुलिस अधिनियम 1861 (धारा 29) | कर्तव्य में घोर लापरवाही व दुराचार: पदीय कर्तव्यों व नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करना। | तत्काल निलंबन, बर्खास्तगी व विभागीय कार्रवाई। |
पीड़ित पक्ष ने जिले के उच्च पुलिस अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, फर्जी रिपोर्ट दर्ज करने वाले दोषी अधिकारियों को निलंबित करने तथा उनके विरुद्ध संगीन आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।