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## **लखनऊ में बड़ा धमाका: 'कामरान एंड कंपनी' के महाफर्जीवाड़े का भंडाफोड़, बर्खास्त तत्वों पर दर्ज होगी FIR; संयोजक प्रभात त्रिपाठी का सिंहनाद!**

## **पत्रकारिता के नाम पर दुकान चलाने वालों पर चला कानूनी चाबुक; 17 पदाधिकारियों ने किया निष्कासित, सीधे जेल जाएंगे 'बैकरूम डकैत'!**

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के सम्मानित सदस्यों व पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी व नीचे समिति से बर्खास्त शेखर पंडित, अनिल तिवारी,लखन मिश्रा व समिति के खिलाफ साजिशकर्ता मो०कामरान
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के सम्मानित सदस्यों व पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी व नीचे समिति से बर्खास्त शेखर पंडित, अनिल तिवारी,लखन मिश्रा व समिति के खिलाफ साजिशकर्ता मो०कामरान


**लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर ‘कामरान एंड कंपनी’ का बड़ा आघात: उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित को बदनाम करने वाले गिरोह के महाफर्जीवाड़े का पर्दाफाश!**

*लखनऊ*उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पत्रकारिता जगत को झकझोर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और विस्फोटक खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति”पुनर्गठित नाम को बदनाम करने की नियत से चल रहे एक बड़े संगठित खेल और महाफर्जीवाड़े का अत्यंत सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पत्रकारिता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, उसकी गरिमा को कम करने का प्रयास करने वाले कुछ तथाकथित चेहरों और उनके पीछे सक्रिय एक पूरे ‘गैंग’ के खिलाफ अब आर-पार की जंग छिड़ चुकी है।
चौंकाने वाले तथ्यों के आधार पर यह साफ हो गया है कि समिति के भीतर अपनी निजी दुकानें चमकाने और अपनी अवांछित महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किस तरह से पदों और लेटर पैड का घिनौना दुरुपयोग किया जा रहा था। लेकिन अब, इस पूरे सिंडिकेट पर समिति के सच्चे संरक्षकों और निर्वाचित पदाधिकारियों का कानूनी चाबुक चलने जा रहा है।

## *17 निर्वाचित पदाधिकारियों का ‘महा-निर्णय’: भ्रष्ट चेहरे किए गए तत्काल बर्खास्त*

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब **उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति** के पुनर्गठन के तहत लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित हुए **17 पदाधिकारियों ने एक मत होकर** एक बेहद कड़ा और निर्णायक कदम उठाया। समिति की गरिमा को धूमिल करने वाले, अनुशासनहीनता की सारी हदें पार करने वाले और पत्रकारों के हितों की बलि देकर अपनी व्यक्तिगत जेबें भरने की कोशिश करने वाले तत्वों को समिति से **तत्काल प्रभाव से बर्खास्त** कर दिया गया है।
यह निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि समिति के **17 निर्वाचित पदाधिकारियों** ने अपनी साख, गरिमा और उत्तर प्रदेश के हजारों पत्रकारों के विश्वास को बहाल रखने के लिए सामूहिक रूप से लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि जिन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, वे अब:
* न तो इस पुनर्गठन समिति के सदस्य हैं,
* न ही उनके पास किसी भी प्रकार का कोई वैधानिक पद है,
* और न ही उन्हें समिति के नाम पर एक शब्द भी बोलने का अधिकार है।
> **समिति के पदाधिकारियों का सीधा और कड़ा संदेश:**
> “पत्रकारिता कोई व्यापार नहीं है और उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित किसी की व्यक्तिगत जागीर नहीं है। जो लोग निर्वाचित होकर भी अपनी मर्यादा भूल गए और जिन्होंने पत्रकारों के विश्वास के साथ विश्वासघात किया, उन्हें यह समिति एक पल के लिए भी बर्दाश्त नहीं करेगी। उनका निष्कासन केवल एक शुरुआत है।”
>
## *कामरान एंड कंपनी’ के खतरनाक सिंडिकेट का भंडाफोड़: आखिर पर्दे के पीछे कौन है?*

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विस्फोटक पहलू यह है कि जिन लोगों को समिति से दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया गया है, वे अकेले इस खेल को अंजाम नहीं दे रहे हैं। इस पूरे महाफर्जीवाड़े के पीछे एक बेहद खतरनाक और संगठित गिरोह काम कर रहा है, जिसे पत्रकारिता जगत में अब **’कामरान एंड कंपनी’** के नाम से पुकारा जा रहा है।
काबिले गौर है कि बर्खास्त होने के बाद भी ये तत्व आखिर किसके दम पर और किस स्वार्थ में लीन होकर लगातार गैर-कानूनी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। पर्दे के पीछे से इस पूरे ‘गैंग’ को हवा देने, उन्हें फर्जी लेटर पैड छपवाने और अवैध रूप से समिति के नाम का इस्तेमाल करने के लिए **’कामरान एंड कंपनी’** का यह गैंग ही जिम्मेदार है।
यह गैंग पूरी तरह से एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के नाम और रसूख का इस्तेमाल करके अपनी तिजोरियां भरना और अपनी निजी दुकानें चलाना है। इस गिरोहबाजी ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ और ईमानदार पत्रकारों के बीच भारी चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया था। हर कोई यह पूछ रहा था कि आखिर इन बर्खास्त तत्वों का असली स्वार्थ क्या है और ‘कामरान एंड कंपनी’ इन्हें क्यों और किस फायदे के लिए शह दे रही है?

## *अवैध रूप से लेटर पैड और पद का दुरुपयोग: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का चीरहरण*

निष्कासन और बर्खास्तगी के बाद कायदे से इन तत्वों को चुप बैठ जाना चाहिए था, लेकिन इनके हौसले इस कदर बुलंद हैं कि ये लगातार देश के कानून और पत्रकारिता की मर्यादा को ठेंगा दिखा रहे हैं। समिति से पूरी तरह बाहर किए जाने के बावजूद, ये लोग:
1. **अवैध रूप से फर्जी लेटर पैड** का निर्माण कर रहे हैं।
2. समिति के **फर्जी हस्ताक्षरों और मुहरों** का इस्तेमाल कर रहे हैं।
3. खुद को उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का पदाधिकारी बताकर शासन, प्रशासन और आम जनता को **गुमराह और भ्रमित** कर रहे हैं।
यह कृत्य न केवल एक गंभीर दीवानी और फौजदारी अपराध है, बल्कि यह लोकतंत्र के उस चौथे स्तंभ पर एक करारा प्रहार है, जिसकी साख पर देश का आम नागरिक भरोसा करता है। जब समिति के निर्वाचित 17 पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से इन्हें बाहर कर दिया, तो इसके बाद भी इनके द्वारा समिति के नाम का इस्तेमाल करना पूरी तरह से **गैर-कानूनी, अनैतिक और शर्मनाक** है।

## *समिति में किसी को दुकान नहीं चलाने दी जाएगी” — संयोजक का महा-ऐलान*

इस पूरे विवाद और महाफर्जीवाड़े पर **उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित)** के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बेहद आक्रामक और विस्फोटक रुख अख्तियार कर लिया है। संयोजक जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित का निर्माण उत्तर प्रदेश के जांबाज, ईमानदार और दिन-रात ग्राउंड जीरो पर काम करने वाले पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है, न कि कुछ भ्रष्ट लोगों के व्यापार के लिए।
संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने अपने कड़े संदेश में साफ कहा:
> **”पुनर्गठित समिति का एकमात्र उद्देश्य पत्रकारों का कल्याण और उनके हितों की लड़ाई लड़ना है। मैंने पहले भी कहा था और आज भी दोहरा रहा हूँ—इस समिति के भीतर किसी को भी अपनी निजी दुकान चलाने की इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। जो लोग इस समिति में चुनाव जीतकर आए थे और इसे अपनी कमाई का जरिया बनाने का सपना देख रहे थे, उनका असली चेहरा सामने आ चुका है और उन्हें उनकी सही जगह दिखा दी गई है।”**
>
संयोजक जी के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि समिति के भीतर किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, गुटबाजी या ‘कामरान एंड कंपनी’ जैसे गैंग्स के लिए कोई स्थान नहीं है।

## *संयोजक का सबसे बड़ा प्रहार: ‘कामरान एंड कंपनी’ और बर्खास्त तत्वों पर दर्ज होगा मुकदमा*

इस सनसनीखेज मामले में अब केवल कागजी कार्रवाई या बयानों का दौर समाप्त हो चुका है। सोशल मीडिया पर फर्जी पदनाम का दुरपयोग करने वाले बर्खास्त व निष्कासित लोगों के लिए यह बड़ी और पुख्ता जानकारी सामने आई है कि पुनर्गठित समिति के संयोजक ने इस पूरे फर्जीवाड़े को बेहद गंभीरता से लिया है और वे अब इस पर **तत्काल कानूनी कार्रवाई** करने जा रहे हैं।
संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने साफ निर्देश दिए हैं कि:
* जो लोग बर्खास्त होने के बाद भी समिति के नाम, पद और लेटर पैड का दुरुपयोग कर रहे हैं, उनके खिलाफ **तत्काल प्रभाव से नामजद मुकदमा (FIR) दर्ज कराया जाए।**
* पीठ पीछे से इस पूरे फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट लिखने वाली **’कामरान एंड कंपनी’ और उनके पूरे गैंग को इस मुकदमे में सह-आरोपी बनाया जाए।**
* धोखाधड़ी, जालसाजी (Forgery), फर्जी दस्तावेज तैयार करने और समाज में भ्रम फैलाने की सुसंगत धाराओं के तहत इन पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि इन्हें सीधे **सलाखों के पीछे** भेजा जा सके।
संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी के इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पत्रकारिता जगत को ऐसे दीमकों से मुक्त कराना है जो पत्रकारिता की आड़ में अपने काले धंधे चमका रहे हैं।

*## उत्तर प्रदेश के पत्रकारों में खुशी की लहर, सहमे फर्जी पत्रकार*

जैसे ही पुनर्गठन समिति के संयोजक और 17 निर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा सामूहिक रूप से मुकदमा दर्ज कराने और ‘कामरान एंड कंपनी’ के गैंग को बेनकाब करने की खबर बाहर आई, पूरे उत्तर प्रदेश के वास्तविक और ईमानदार पत्रकारों में **खुशी की भारी लहर दौड़ गई है।**
पिछले काफी समय से उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकार इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि आखिर कुछ गिने-चुने स्वार्थी तत्वों और उनके गैंग की वजह से पूरी बिरादरी क्यों बदनाम हो रही है?

## *निष्कर्ष:अब सीधे होगी जेल, सुधर जाएं बैकरूम डकैत*

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पुनर्गठित के इस ऐतिहासिक मोड़ ने यह साबित कर दिया है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित के संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी ने जिस सच को सामने लाया है, उसने ‘कामरान एंड कंपनी’ के पैरों तले की जमीन खिसका दी है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इन फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों और बैकरूम से रिमोट कंट्रोल चलाने वाले ‘कामरान एंड कंपनी’ के आकाओं को कितनी जल्दी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजता है। लेकिन एक बात पूरी तरह तय है—संयोजक प्रभात कुमार त्रिपाठी और समिति के 17 निर्वाचित पदाधिकारियों के इस सिंहनाद ने उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता में एक नए, स्वच्छ और गौरवशाली युग की शुरुआत कर दी है!

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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