**जौनपुर ब्रेकिंग:सिधांई महाघोटाला: भगवान की जमीन पर माफिया का डाका, प्रधान-लेखपाल की शह पर मनरेगा में भी 'महा-लूट'!**
**बेनकाब हुआ 'भ्रष्ट सिंडिकेट': शाहगंज में कब्जा की जा रही मंदिर की जमीन, CID जांच की आहट से उड़े रसूखदारों के होश!**




# **महा-विस्फोट: शाहगंज के सिधांई में महाघोटाला! आस्था की जमीन पर भू-माफिया का डाका, लेखपाल-प्रधान के ‘पाप के गठजोड़’ ने निगली मंदिर की भूमि**
### **मनरेगा में ‘अपनों’ पर बरसी लक्ष्मी; ग्रामीणों के चक्रव्यूह में फंसा भ्रष्ट लेखपाल, अब संपत्ति कुर्क करने की उठी मांग, CID जांच का बढ़ा शिकंजा!**
**शाहगंज (जौनपुर)।**
सूबे की योगी सरकार जहां एक तरफ भू-माफियाओं के अवैध साम्राज्य को मटियामेट करने के लिए बुलडोजर का पहिया घुमा रही है, वहीं शाहगंज तहसील क्षेत्र के **सिधांई ग्रामसभा** से भ्रष्टाचार की एक ऐसी ‘घिनौनी और विस्फोटक’ दास्तान सामने आई है जो कानून के रखवालों के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। सिधांई गांव में आस्था, सत्ता और खाकी-खाते के रसूखदारों ने मिलकर एक ऐसा **’चतुष्कोणीय सिंडिकेट’ (पुजारी-माफिया-प्रधान-लेखपाल)** तैयार किया है, जिसने न सिर्फ भगवान की जमीन को निगल लिया, बल्कि सरकारी खजाने को भी दीमक की तरह चाट गए।
## **आस्था का कत्लेआम: भगवान के आंगन में भू-माफिया का ‘अवैध’ महल**
मामला सिधांई गांव के सदियों पुराने प्राचीन मंदिर की करोड़ों की बेशकीमती भूमि का है। आरोप है कि गांव के ही एक तथाकथित और छद्म पुजारी **सुरेश तिवारी** ने भू-माफियाओं की शह पर मंदिर की पवित्र जमीन को अपनी बपौती समझकर वहां अवैध रूप से आलीशान मकान का निर्माण शुरू करा दिया है। यहां यह भी बता दें कि विगत वर्ष स्थानीय निवासी व पूर्व प्रधानाध्यापक जिलेदार तिवारी की भी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया था इस सम्बन्ध में जिलेदार तिवारी ने जिलाधिकारी को प्रार्थना देकर कार्यवाही की मांग की थी!
> **सत्ता और कलम का संरक्षण:**
> इस पूरे खेल का सबसे घिनौना पहलू यह है कि इस अवैध कब्जे के मुख्य सूत्रधार (Key Players) कोई और नहीं, बल्कि गांव के **वर्तमान ग्राम प्रधान** और इलाके के **स्थानीय लेखपाल** हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की गुहार किससे लगाई जाए? इस दुस्साहस से पूरे इलाके के ग्रामीणों में आक्रोश की आग सुलग रही है।
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## **भ्रष्टाचार का ‘पारिवारिक लिमिटेड’ उद्योग: मनरेगा में लाखों की बंदरबांट**
जब इस सिंडिकेट की परतों को उधेड़ा गया, तो ग्राम प्रधान के काले कारनामों का एक और ‘मेगा स्कैम’ उजागर हुआ। ग्रामीणों ने दस्तावेजों के हवाले से आरोप लगाया है कि ग्राम प्रधान ने **मनरेगा (MGNREGA)** योजना को अपनी निजी जागीर बना लिया है।
* **कागजी मजदूर, असली रसूखदार:** प्रधान ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही सगे-संबंधियों, परिवार के सदस्यों और चहेतों के नाम पर फर्जी ‘जॉब कार्ड’ जारी कर रखे हैं।
* **बिना कुदाल चलाए आ रही लक्ष्मी:** जो लोग कभी धूप में खड़े नहीं हुए, उनके खातों में वर्षों से लाखों रुपए का सरकारी बजट ट्रांसफर किया जा रहा है। कागजों पर गड्ढे खोदे जा रहे हैं और हकीकत में सरकारी धन की डकैती हो रही है।
> **”सूची सार्वजनिक करो, सच सामने लाओ”:** ग्रामीणों ने खुलेआम चुनौती दी है कि अगर ब्लॉक मुख्यालय सिधांई गांव के मनरेगा लाभार्थियों की सूची को ग्रामसभा के चौराहे पर चस्पा (Public) कर दे, तो प्रधान का यह ‘पारिवारिक घोटाला’ बेनकाब हो जाएगा।
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## **लेखपाल का ‘नंगा नाच’: माफिया की वकालत करने पहुंचे महोदय,अब जांच के दायरे में!**
राजस्व विभाग की साख पर बट्टा लगाते हुए स्थानीय लेखपाल ने जो किया, उसने प्रशासनिक मर्यादा को तार-तार कर दिया है। पिछले दिनों जब लेखपाल सिधांई गांव पहुंचा, तो ग्रामीण सोचे कि जांच होगी, लेकिन साहब तो तथाकथित पुजारी सुरेश तिवारी की ‘वकालत’ का ठेका लेकर आए थे।
* **फर्जी NOC का दबाव:** लेखपाल ने गांव वालों पर दबाव बनाना शुरू किया कि वे एक अनापत्ति पत्र (NOC) पर दस्तखत कर दें, ताकि मंदिर की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को ‘लीगल’ जामा पहनाया जा सके।
* **जागरूक जनता का करारा तमाचा:** भ्रष्ट लेखपाल के इरादों को भांपते हुए जागरूक ग्रामीणों ने एकजुट होकर दस्तखत करने से साफ इनकार कर दिया और लेखपाल के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
* **सत्ता की हनक और खुली धौंस:** जब दांव उल्टा पड़ा, तो लेखपाल अपनी औकात पर आ गया। उसने ग्रामीणों के सामने ही आरोपी पुजारी की पीठ थपथपाते हुए कहा— *”तुम्हारा कब्जा बरकरार रहेगा, कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा!”*
इस शर्मनाक बयान के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। अब जनता ने इस **लेखपाल की काली कमाई और अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) की विजिलेंस जांच** कराकर उसकी संपत्ति कुर्क करने की मांग तेज कर दी है।
## **CID जांच की जद में सिंडिकेट: फंसेंगी कई ‘बड़ी मछलियां’**
इस महाघोटाले की गूंज अब लखनऊ के गलियारों तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इस चतुष्कोणीय गठजोड़ के खिलाफ **सीआईडी (CID) जांच की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में (विचाराधीन)** है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जैसे ही सीआईडी की एंट्री होगी, शाहगंज तहसील के कई बड़े अधिकारियों और सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरना तय है।
### **ग्रामीणों की हुंकार: शासन-प्रशासन से सीधे 3 सवाल**
| क्र.सं. | जांच का विषय | जनता का अल्टीमेटम (अपेक्षित कार्रवाई) |
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| **1.** | **मंदिर की भूमि** | अवैध निर्माण को तुरंत **बुलडोजर से जमींदोज** किया जाए और भगवान की जमीन को मुक्त कराया जाए। |
| **2.** | **मनरेगा ‘मेगा स्कैम’** | जॉब कार्ड धारकों की फॉरेंसिक ऑडिट हो और प्रधान के वित्तीय खातों को तत्काल सीज किया जाए। |
| **3.** | **दागी लेखपाल पर गाज** | आरोपी लेखपाल को तत्काल **सस्पेंड** कर उसकी ‘आय से अधिक संपत्ति’ की उच्च स्तरीय जांच हो। |
**अब सबसे बड़ा सवाल:**
क्या शाहगंज तहसील प्रशासन और जौनपुर के आला अधिकारी इस ‘चतुष्कोणीय माफिया तंत्र’ पर अपना हंटर चलाएंगे, या फिर भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में बड़े हाकिम भी डुबकी लगाते रहेंगे? सिधांई की जनता अब आर-पार के मूड में है!
