### **शाहगंज में भू-माफिया का नंगा नाच: मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जा, मनरेगा लूट पर ग्रामीणों का महाआक्रोश!**
### **सिधांई में आस्था का सौदा: मंदिर की जमीन पर 'सरकारी' डाका, लेखपाल-प्रधान का महाघोटाला बेनकाब!**


# **सुलगता उत्तर प्रदेश: शाहगंज के सिधांई में महाघोटाला! भू-माफिया, फर्जी पुजारी, प्रधान और लेखपाल के ‘गठजोड़’ ने निगली मंदिर की जमीन**
### **मनरेगा में भी लाखों का ‘अपनों’ को फायदा; ग्रामीणों के विरोध के बाद लेखपाल की खुली पोल, संपत्ति जांच की उठी मांग**
**शाहगंज (जौनपुर)।**
सूबे की सरकार भले ही भू-माफियाओं और भ्रष्टाचारियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन शाहगंज तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा **सिधांई** से जो जमीनी हकीकत सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली और विस्फोटक है। यहाँ कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियाँ उड़ाने में मसरूफ हैं। सिधांई गांव में भू-माफिया गिरोह, एक तथाकथित फर्जी पुजारी, वर्तमान ग्राम प्रधान और स्थानीय लेखपाल की जुगलबंदी ने मिलकर न सिर्फ आस्था की जमीन पर डाका डाला है, बल्कि सरकारी धन की भी जमकर बंदरबांट की है।
## **आस्था पर ‘अवैध’ प्रहार: मंदिर की जमीन पर खड़ा हो रहा मकान**
मामला सिधांई गांव के एक प्राचीन मंदिर की भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि गांव के ही एक तथाकथित पुजारी **सुरेश तिवारी** द्वारा भू-माफियाओं के शह पर मंदिर की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान निर्माण कराया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में **वर्तमान ग्राम प्रधान** और **स्थानीय लेखपाल** मूकदर्शक नहीं, बल्कि मुख्य सूत्रधार (Key Players) की भूमिका निभा रहे हैं। आस्था के केंद्र को भू-माफियाओं के हवाले करने के इस दुस्साहस से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
## **भ्रष्टाचार का ‘महाजाल’: मनरेगा में प्रधान का ‘परिवारवाद’ और लाखों का घोटाला**
जब इस गठजोड़ की परतों को खंगाला गया, तो ग्राम प्रधान का एक और काला चिट्ठा सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा **मनरेगा (MGNREGA)** योजना में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।
> **बड़ा आरोप:** सिधांई के ग्राम प्रधान ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही परिवार और सगे-संबंधियों के नाम पर फर्जी ‘जॉब कार्ड’ जारी किए हैं। बिना काम किए या कागजों पर काम दिखाकर वर्षों से लाखों रुपए के सरकारी बजट का गबन किया जा रहा है।
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**पारदर्शिता से डर क्यों?**
ग्रामीणों की पुरजोर मांग है कि यदि ब्लॉक मुख्यालय द्वारा सिधांई गांव की मनरेगा लाभार्थियों की सूची को सार्वजनिक (Public) कर दिया जाए, तो प्रधान द्वारा किया जा रहा यह ‘पारिवारिक घोटाला’ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
## **लेखपाल का ‘नंगा नाच’: ग्रामीणों पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश**
इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय लेखपाल की भूमिका ने राजस्व विभाग को शर्मसार कर दिया है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों लेखपाल खुद सिधांई गांव पहुंचा। लेकिन, वह जांच करने नहीं, बल्कि तथाकथित पुजारी सुरेश तिवारी की ‘वकालत’ करने गया था।
* **अनापत्ति (NOC) के लिए दबाव:** लेखपाल ने गांव वालों को इकट्ठा कर तथाकथित पुजारी के पक्ष में, मंदिर की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को वैध ठहराने के लिए ‘अनापत्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया।
* **ग्रामीणों का साहसिक कदम:** लेखपाल के इस भ्रष्ट इरादे को भांपते हुए जागरूक ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई और किसी भी कागज पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया।
* **खुलेआम धौंस:** जब दांव उल्टा पड़ा, तो लेखपाल अपनी मर्यादा भूल गया। उसने तथाकथित पुजारी सुरेश तिवारी को ग्रामीणों के सामने ही आश्वस्त करते हुए कहा, *”आपका कब्जा बरकरार रहेगा, कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा।”*
लेखपाल के इस बयान ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। ग्रामीणों ने अब इस **लेखपाल की काली कमाई और अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) की उच्च स्तरीय जांच** की मांग तेज कर दी है।
## **मुख्य मांगें: शासन-प्रशासन के सामने बड़े सवाल**
इस विस्फोटक खुलासे के बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी (SDM) शाहगंज से निम्नलिखित त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है:
| क्र.सं. | जांच का विषय | अपेक्षित कार्रवाई |
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| **1.** | **मंदिर भूमि विवाद** | अवैध निर्माण पर तुरंत बुलडोजर चले और मंदिर की जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाए। |
| **2.** | **मनरेगा घोटाला** | ब्लॉक स्तर से जॉब कार्ड धारकों की सूची सार्वजनिक कर प्रधान के वित्तीय खातों की फॉरेंसिक जांच हो। |
| **3.** | **लेखपाल पर एक्शन** | आरोपी लेखपाल को तत्काल सस्पेंड कर उसकी आय से अधिक संपत्ति की विजिलेंस जांच कराई जाए। |
अब देखना यह है कि शाहगंज तहसील प्रशासन इस ‘चतुष्कोणीय गठजोड़’ (पुजारी-माफिया-प्रधान-लेखपाल) पर क्या हंटर चलाता है, या फिर भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में बड़े अधिकारी भी हाथ धोते रहेंगे?
**- विशेष खोजी रिपोर्ट (शाहगंज)**
