## **सचिवालय में 'स्लीपर सेल'! परफेक्ट मीडिया और कामरान के देशविरोधी नेक्सस पर CBI-NIA जांच की मांग**
## **लखनऊ में महा-धमाका: वीआईपी फोटो की आड़ में 'गैंग' का खेल, विधानसभा-लोकभवन के पास रद्द करने की उठी मांग!**

# **महा-धमाका: यूपी सचिवालय से विधानसभा तक ‘स्लीपर सेल’ का खतरनाक जाल! परफेक्ट मीडिया और कामरान के देशविरोधी नेक्सस पर CBI-NIA जांच की भारी मांग**
**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश की सियासत और ब्यूरोक्रेसी के सबसे सुरक्षित गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और हिलाकर रख देने वाली खबर सामने आ रही है। लखनऊ स्थित सचिवालय (लोक भवन) से लेकर विधानसभा की सुरक्षा दीवारों को भेदकर सरकारी व्यवस्था के भीतर एक ऐसे कथित ‘स्लीपर सेल’ तंत्र के सक्रिय होने का पर्दाफाश हुआ है, जिसने देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि **’परफेक्ट मीडिया’** और **कामरान, बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित, अनिल तिवारी** का एक बेहद खतरनाक और शातिर सिंडिकेट सत्ता के शीर्ष केंद्रों में अपनी जड़ें जमा चुका है, और चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेक्सस की कमान अब मीडिया जगत के कुछ बड़े और कथित रसूखदार चेहरों के हाथों में आ गई है।
## ### **सबूतों के अंबार के बाद भी FIR क्यों नहीं? अदालत से स्वतः संज्ञान की मांग!**
इस पूरे सनसनीखेज मामले में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सरकारी तंत्र को खोखला करने वाले इस फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत सामने आने के बावजूद, अब तक संबंधित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया? आखिर शासन-प्रशासन के भीतर बैठी वो कौन सी अदृश्य और ताकतवर कठपुतलियां हैं, जो इस देशविरोधी गठजोड़ को अपना अभयदान दे रही हैं?
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक यह मांग पुरजोर तरीके से उठने लगी है कि:
* माननीय न्यायालय इस पूरे प्रकरण पर तत्काल **स्वतः संज्ञान (Suo Motu)** ले।
* प्रशासन को बिना किसी देरी के इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
## ### **कथित उपाध्याय और बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित ‘गैंग’ की एंट्री: डिप्टी सीएम के साथ फोटो का वो ‘गंदा खेल’**
भीतरखाने से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस पूरे खेल के तार सिर्फ कामरान या प्रदीप उपाध्याय बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि, विभिन्न प्रतिष्ठित चैनलों से बाहर का रास्ता दिखाए जा चुके कुछ तथाकथित और दागी पत्रकार भी इस ‘गैंग’ का हिस्सा बनकर कूद पड़े हैं।
इस सिंडिकेट में एक ऐसे चेहरे का नाम सबसे तेजी से उभर रहा है, जो खुद को सिस्टम में स्थापित और रसूखदार दिखाने के लिए एक खास पैंतरा अपनाता है।
**”डिप्टी सीएम और बड़े-बड़े वीआईपी के आस-पास मंडराना, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाना और फिर उन्हीं तस्वीरों की आड़ में शासन-प्रशासन पर धौंस जमाना।”**
इन रसूखदार तस्वीरों का इस्तेमाल केवल अपने काले कारनामों को छिपाने और अधिकारियों को डराने-धमकाने के लिए एक ‘शील्ड’ के रूप में किया जा रहा है। इस पूरे गैंग की उच्च स्तरीय स्क्रूटनी होना अब बेहद लाजिमी हो चुका है।
## ### **IS-गजवा-ए-हिंद कनेक्शन की आशंका: तत्काल रद्द हों विधानसभा और लोक भवन के पास!**
यह मामला सिर्फ पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग या रसूख चमकाने का नहीं है; इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। आशंका जताई जा रही है कि इस नेक्सस के तार कथित तौर पर **’ISI’** और **’गजवा-ए-हिंद’** जैसे देश विरोधी एजेंडों और संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश की सुरक्षा के लिहाज से यह एक ‘टाइम बम’ की तरह है।
अतः सुरक्षा विश्लेषकों और जानकारों की तरफ से दो बेहद कड़े कदमों की मांग की जा रही है।
1. **परफेक्ट मीडिया और कामरान तथा बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित** से जुड़े इस पूरे तंत्र की एक-एक कड़ी की गहनता से ‘बैकग्राउंड चेकिंग’ की जाए।
2. इस गैंग के जितने भी गुर्गे पत्रकारिता का चोला ओढ़कर विधानसभा, लोक भवन या अन्य संवेदनशील सरकारी दफ्तरों में घूम रहे हैं, उनके **प्रवेश पास (Pass) और सरकारी मान्यताएं तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel)** की जाएं।
## ### **दूध का दूध, पानी का पानी: CBI और NIA जांच ही एकमात्र रास्ता**
मामले के तार जिस तरह से फर्जीवाड़े, सरकारी रसूख के दुरुपयोग और देश विरोधी ताकतों के संदिग्ध जुड़ाव से जुड़ रहे हैं, उसे देखते हुए अब स्थानीय पुलिसिया जांच पर भरोसा करना नाकाफी लग रहा है। यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इस कथित महा-घोटाले और सुरक्षा चूक की जांच देश की सबसे प्रीमियर और केंद्रीय एजेंसियों यानी **CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो)** और **NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी)** को सौंपने की मांग ने तूल पकड़ लिया है।
अब देखना यह है कि बाबा के सुशासन में इस ‘स्लीपर सेल’ तंत्र पर कानून का हथौड़ा कब चलता है और इस नेक्सस के पीछे छिपे ‘असली आकाओं’ के चेहरे कब बेनकाब होते हैं!
