# **सुप्रीम कोर्ट का बड़ा धमाका: बेदाग अपर मुख्य सचिव गृह उत्तर प्रदेश संजय प्रसाद को मिली बड़ी राहत, हाईकोर्ट के आदेश की उड़ी धज्जियां !**
# **विरोधियों के मंसूबे पस्त: संकटमोचक संजय प्रसाद पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, एकतरफा आदेश पर लगा 'सुपर स्टे'!**

## **सुप्रीम कोर्ट में सत्य की जीत: विरोधी पस्त, बेदाग छवि के ‘संकटमोचक’अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद पर सर्वोच्च अदालत की न्यायिक मुहर!**
*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम”*
**नई दिल्ली / लखनऊ:**
इसे कहते हैं न्याय का असली और जोरदार तमाचा! उत्तर प्रदेश शासन के सबसे कड़क, ईमानदार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘राइट हैंड’ माने जाने वाले **अपर मुख्य सचिव (गृह, गोपन, सूचना एवं जनसंपर्क) संजय प्रसाद (IAS)** के खिलाफ रची गई प्रशासनिक और कानूनी घेराबंदी को देश की सबसे बड़ी अदालत ने ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा की गई तल्ख और एकतरफा टिप्पणियों पर **सुप्रीम कोर्ट** ने न सिर्फ कड़ा रुख अपनाया, बल्कि उस आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए उस पर **तुरंत प्रभाव से रोक (Stay)** लगा दी। यह संजय प्रसाद के बेदाग करियर और उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को दिन-रात चमकाने वाले उनके प्रयासों की सबसे बड़ी नैतिक और कानूनी जीत है।
### **हाईकोर्ट का ‘अति-उत्साह’ पड़ा फीका, सुप्रीम कोर्ट ने थामी न्याय की कमान**
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 3 जून को एक बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले की आड़ में पूरी यूपी सरकार और गृह विभाग के मुखिया संजय प्रसाद को घेरने की कोशिश की थी। कोर्ट ने उनके आचरण पर उंगली उठाते हुए उनके खिलाफ DoPT (कार्मिक विभाग) को पत्र लिखने तक का निर्देश दे दिया था, ताकि उनके भविष्य के करियर को नुकसान पहुंचाया जा सके।
लेकिन **माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल चंदुरकर की पीठ** ने मामले की गंभीरता और संजय प्रसाद की बेदाग प्रशासनिक साख को देखते हुए पल भर में इस दुर्भावनापूर्ण आदेश को फ्रीज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया कि एसी कमरों में बैठकर अधिकारियों की मेहनत पर पानी फेरने वाली टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
### **क्यों हैं संजय प्रसाद यूपी के सबसे ‘पावरफुल और ईमानदार’ अफसर?**
संजय प्रसाद केवल एक आईएएस अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सुशासन की रीढ़ की हड्डी हैं।
* **अपराधियों पर काल:** गृह विभाग के मुखिया के तौर पर उन्होंने यूपी में माफियाराज और अपराधियों की कमर तोड़ी है।
* **पारदर्शिता के प्रतीक:** सूचना और गोपन विभाग जैसी संवेदनशील कुर्सियों पर रहने के बावजूद आज तक उन पर एक पैसे के भ्रष्टाचार या लापरवाही का दाग नहीं लगा।
* **24×7 एक्टिव लीडिंग:** जब पूरा प्रदेश सोता है, तब संजय प्रसाद सूबे की सुरक्षा और जनता की भलाई के लिए रणनीति तैयार कर रहे होते हैं।
> **सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल:** सुप्रीम कोर्ट के इस ‘विस्फोटक’ फैसले के बाद संजय प्रसाद के विरोधियों और प्रशासनिक गलियारों में उनके खिलाफ लॉबिंग करने वाले तत्वों के मुंह पर ताला लग गया है। इस फैसले ने साबित कर दिया है कि जो अधिकारी जनता और देश की सेवा में पूरी ईमानदारी से लगा है, उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता।
>
### **सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं!**
एक साधारण से कस्टडी केस को प्रशासनिक मुद्दा बनाकर जिस तरह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद की साख को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर पानी फेर दिया है। अब यह साफ हो गया है कि संजय प्रसाद बिना किसी दबाव के, पूरी ठसक और ईमानदारी के साथ उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के अपने मिशन में जुटे रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ संजय प्रसाद की जीत नहीं है, बल्कि यह देश के हर उस नौकरशाह की जीत है जो बिना डरे, पूरी निष्ठा के साथ देश सेवा में लगा हुआ है। संजय प्रसाद के पक्ष में आया यह फैसला वाकई में एक **ऐतिहासिक और धमाकेदार न्याय है!
