*## लखनऊ-अयोध्या रूट पर खाकी का 'वसूली खेल': खटारा रोडवेज 'वीआईपी', चमचमाती प्राइवेट बसें 'डग्गामार'!*
*# स्टिंग से मचा हड़कंप: 'वसूली भाई' बने ट्रैफिक कर्मियों की लाइव आडियो लीक, अब सीधे मंत्री करेंगे हिसाब!*

*# लखनऊ से अयोध्या तक ‘वसूली’ का नंगा नाच! खाकी के संरक्षण में प्राइवेट बस मालिकों का दम घोंट रहा है भारी भ्रष्टाचार*
**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या तक के मुख्य मार्गों पर यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के नाम पर भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज खेल चल रहा है, जिसने परिवहन विभाग की नीतियों और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। एक हालिया आडियो स्टिंग में हुए हैरान करने वाले खुलासों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
आडियो से साफ हुआ है कि सरकार एक तरफ जहां खुद चमचमाती निजी गाड़ियों और बसों की धड़ल्ले से बिक्री करवा रही है, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर उतरते ही इन प्राइवेट वाहनों को **’डग्गामार’** का तमगा देकर अवैध उगाही का सबसे बड़ा जरिया बना दिया गया है।
### कबाड़ रोडवेज ‘वीआईपी’ और चमचमाती प्राइवेट बसें ‘डग्गामार’?
आडियो में तीखे सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की सरकारी बसें चाहे कितनी भी कबाड़ और खटारा हो चुकी हों, जो जगह-जगह नियमों को ताक पर रखकर सवारियां उठाती हैं, उन्हें कोई डग्गामार नहीं कहता। लेकिन, यदि कोई प्राइवेट बस मालिक अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर 1 करोड़ रुपये की वीआईपी बस भी सड़क पर उतार दे, तो उसे ‘डग्गामार’ घोषित कर दिया जाता है। इस दोहरी नीति के पीछे का सच बेहद खौफनाक है।
### हर मोड़ पर ‘वसूली लखनऊ से अयोध्या तक बिछा है जाल
खुलासे के मुताबिक, टैक्स, फिटनेस, बीमा और नगर निगम का टोकन मिलाकर एक प्राइवेट बस मालिक रोजाना करीब ₹2,000 और महीने का ₹60,000 से अधिक का राजस्व सरकार को ईमानदारी से चुकाता है। इसके बावजूद सड़कों पर कदम-कदम पर खाकी वर्दीधारी उनका उत्पीड़न करने के लिए खड़े हैं।
> **कहाँ-कहाँ चल रहा है अवैध वसूली का नेटवर्क?**
> * **लखनऊ लोकल:** चिनहट, मटियांरी, भिटौली चुंगी, चारबाग और पीजीआई से लेकर एयरपोर्ट मार्ग तक ट्रैफिक पुलिस ने वसूली प्वाइंट बना रखे हैं।
> * **अयोध्या रूट:** अयोध्या ब्रिज के नीचे, देवकाली बाईपास, बाराबंकी में सागर कॉलेज के पास और कमता चौक व समतामूलक चौराहे पर टीआई (Traffic Inspectors) और टीएसआई बकायदा बलेरो गाड़ियां लेकर सिर्फ और सिर्फ अवैध वसूली के लिए घात लगाए रहते हैं।
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### ‘आतंक का पर्याय’ बने अधिकारी, पत्रकारों तक को नहीं बख्शा!
आडियो में सीधे तौर पर दो अधिकारियों—**दिनेश पांडे और राहुल वर्मा** का नाम उजागर किया गया है, जिन्हें समतामूलक चौक से लोहिया पार्क तक ‘आतंक का पर्याय’ बताया गया है। हद तो तब हो गई जब इस सिंडिकेट ने एक निर्भीक पत्रकार की गाड़ी का भी महज 24 घंटे के भीतर ₹24,000 का चालान काट दिया, जिसके बाद पीड़ित पत्रकार ने थक-हारकर अपनी गाड़ी ऑफिस पर खड़ी कर दी।
आरोप है कि लखनऊ की नवनियुक्त डीसीपी ट्रैफिक मैडम रवीना त्यागी के नाक के नीचे यह पूरा तंत्र बेलगाम हो चुका है। ट्रैफिक पुलिस का मुख्य काम सड़कों से जाम हटाना होना चाहिए, लेकिन वे एआरटीओ (ARTO) के अधिकारों पर डाका डालकर बसों को सीज करने और अवैध चालान ठोकने की धमकी देकर मोटी रकम वसूल रहे हैं। जो बस मालिक ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) नहीं देता, उसकी गाड़ी हफ्ते-दस दिन के लिए थाने में खड़ी कर दी जाती है।
### माननीय मंत्री जी के कानों तक पहुँची गूंज, जल्द गिरेगी गाज!
निडर पत्रकार ने भी अब कमर कस ली है और वह इस पूरे उगाही सिंडिकेट का वीडियो और ऑन-कैमरा बयान रिकॉर्ड कर सीधे शासन को भेजने की तैयारी में है। उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द लखनऊ-अयोध्या रूट के भ्रष्ट ट्रैफिक कर्मियों और अफसरों पर मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री का बड़ा हंटर चलने वाला है।