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## **आस्था की आड़, 'आईना' का जाल: क्या हनुमान जी के भंडारे और डिप्टी सीएम की तस्वीर के पीछे छुपेंगे मोहम्मद कामरान के काले कारनामे?**

## **आईना' संगठन पर महा-विस्फोट: न्यायालय की लताड़ के बाद अचानक जागा 'सनातन प्रेम', जांच के घेरे में संगठन से जुड़े संदिग्ध हिंदू चेहरे!**

**सनातन की ‘ढाल’ और रसूखदारों का ‘जाल’: क्या ‘आईना’ प्रमुख मोहम्मद कामरान के चक्रव्यूह में फंस रहा है सिस्टम? पढ़िए, इस छद्मवेष का सबसे बड़ा और विस्फोटक खुलासा!**

## **धमाका: आस्था के नाम पर ‘पाप धोने’ का महा-अभियान!**

राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमों तक इस समय केवल एक ही सुगबुगाहट है— आखिर पत्रकारिता और संगठन की आड़ में चल रहा यह खेल कब तक थमेगा? ऑल इंडिया न्यूजपेपर एसोसिएशन (AINA) के प्रमुख मोहम्मद कामरान द्वारा हाल ही में किए गए ‘धार्मिक आयोजनों’ ने श्रद्धा से ज्यादा संदेह को जन्म दे दिया है।
सनातन धर्म में ‘हनुमान जी का भंडारा’ और ‘प्रसाद वितरण’ आत्मा को पवित्र करने और समाज को जोड़ने का जरिया है। लेकिन जब इतिहास के पन्नों पर न्यायालय की गंभीर फटकार, ब्लैकमेलिंग के आरोप और **’दृष्टांत’** जैसी प्रतिष्ठित खोजी पत्रिका के सनसनीखेज खुलासों की स्याही लगी हो, तो अचानक जागा यह ‘धार्मिक प्रेम’ श्रद्धा नहीं, बल्कि कानून के शिकंजे से बचने की एक छटपटाहट नजर आता है।
क्या यह सीधे तौर पर सनातन संस्कृति में एक सोची-समझी घुसपैठ है? क्या अपराधियों और संदिग्धों के लिए अब हिंदू धार्मिक आयोजन खुद को ‘पाक-साफ’ साबित करने का नया टूल बन गए हैं?

## **डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की सादगी का ‘राजनैतिक इस्तेमाल’?**
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक अपनी जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। वे दलगत और धर्मगत राजनीति से ऊपर उठकर हर आम और खास के बुलावे पर पहुंच जाते हैं। सूत्रों का दावा है कि मोहम्मद कामरान ने डिप्टी सीएम की इसी ‘सहजता और सादगी’ को अपने लिए एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।

### **तस्वीरों का मायाजाल और प्रशासनिक दबाव की क्रोनोलॉजी**
* **फोटोग्राफी पॉलिटिक्स:** वीआईपी नेताओं को धोखे से या अनौपचारिक रूप से बुलाकर उनके साथ तस्वीरें खिंचवाना।
* **प्रशासन को डराना:** इन तस्वीरों को सोशल मीडिया और अपने नेटवर्क में फैलाकर स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर यह धौंस जमाना कि “देखिए, हमारी पहुंच सीधे सरकार के शीर्ष तक है।”
* **कृत्यों पर पर्दा:** माननीय न्यायालय द्वारा समय-समय पर लगाई गई फटकार और पुराने मुकदमों के काले दागों को इन चमचमाती तस्वीरों के पीछे छुपा देना।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली सरकार के डिप्टी सीएम को इस तरह भ्रम में रखकर मोहम्मद कामरान अपने पिछले कृत्यों की जवाबदेही से बच पाएंगे? जवाब है— कतई नहीं।

## **आईना’ का काला चिट्ठा: न्यायालय की लताड़ और ‘दृष्टांत’ के तीखे तीर**
मोहम्मद कामरान का अतीत विवादों, जांचों और अदालती कार्यवाहियों से भरा पड़ा है। पत्रकारिता की पवित्र साख को बट्टा लगाने वाले इस संगठन ‘आईना’ के खिलाफ समय-समय पर गंभीर शिकायतें आती रही हैं।

### **न्यायालय की वो ऐतिहासिक फटकार**
वैधानिक सूत्रों के मुताबिक, मोहम्मद कामरान को उनके संदेहास्पद आचरण और कानून को ठेंगा दिखाने की प्रवृत्ति के लिए माननीय न्यायालय से कड़ी फटकार मिल चुकी है। न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया था कि पत्रकारिता का चोगा ओढ़कर किसी को भी कानून से ऊपर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

### **दृष्टांत’ पत्रिका का वो विस्फोटक अंक**

खोजी पत्रकारिता के बेबाक मंच **’दृष्टांत’** ने पूर्व में एक विस्तृत कवर स्टोरी के जरिए मोहम्मद कामरान और उनके सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। पत्रिका ने तथ्यों के साथ उजागर किया था कि किस तरह यह संगठन धौंस, डराने-धमकाने और अनुचित लाभ लेने के खेल में संलिप्त रहा है। जब इस खुलासे के बाद जमीन खिसकने लगी, तो अचानक खुद को ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘सनातन प्रेमी’ दिखाने का यह नया स्वांग रचा गया।

## **संगठन के ‘हिंदू चेहरे’ या देशविरोधी साजिश का मोहरा?**
इस पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील और रोंगटे खड़े कर देने वाला पहलू यह है कि इस ‘आईना’ संगठन में कुछ हिंदू नाम भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा ‘रेड फ्लैग’ (चेतावनी) है।
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⚠️ आईना संगठन का संदिग्ध ताना-बाना ⚠️
मोहम्मद कामरान (प्रमुख) हिंदू चेहरे (मुखौटे)
(अदालती फटकार और आरोपों से घिरे) (लालच या ब्लैकमेलिंग का शिकार?)
आशंका: देशविरोधी गतिविधियों
और प्रशासनिक घुसपैठ का जाल!

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### **जांच के घेरे में ‘जयचंद’ की भूमिका!**
आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़े आर्थिक लाभ, जमीनी विवादों के निपटारे, या प्रशासनिक सेटिंग के लालच में आकर कुछ हिंदू भी इस संगठन का मोहरा बन चुके हैं।
* क्या इन हिंदुओं का इस्तेमाल केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि जब भी मोहम्मद कामरान पर आंच आए, तो इसे ‘सांप्रदायिक’ रंग दिया जा सके?
* क्या इस संगठन की आड़ में कोई ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है जो देश की आंतरिक सुरक्षा, खुफिया जानकारियों या प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित कर रहा है?

> **कड़वा सच:** राष्ट्रविरोधी और छद्म ताकतें हमेशा सीधे हमला नहीं करतीं। वे बहुसंख्यक समाज के भीतर से ही कुछ लालची चेहरों को ढूंढती हैं, उन्हें संगठन में ऊंचे पद और पैसे का लालच देती हैं, और फिर उनकी आड़ में देश की जड़ों को खोखला करने का काम करती हैं। ‘आईना’ संगठन में शामिल हिंदुओं की भूमिका की जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि राष्ट्र की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
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## **हाई-लेवल जांच की मांग: अब आर-पार की लड़ाई!**
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ ‘बुलडोजर नीति’ और सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए पूरे देश में जानी जाती है। ऐसे में ‘आईना’ जैसे संगठन का यह खेल सरकार की साख को भी चुनौती दे रहा है।

### **सरकार से जनता के सीधे सवाल:**
1. **फंडिंग का चक्रव्यूह:** इन भव्य आयोजनों, भंडारों और ‘आईना’ संगठन के पास आ रहे बेहिसाब पैसे का असली सोर्स क्या है? क्या इसकी कोई विदेशी (Foreign Funding) लिंक है?
2. **एसआईटी (SIT) जांच की जरूरत:** क्या सरकार इस संगठन के सभी पदाधिकारियों, उनके बैंक खातों और उनके पिछले पांच वर्षों के इतिहास की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन करेगी?
3. **एजेंसियों की सतर्कता:** खुफिया विभाग (Local Intelligence Unit) इस पूरे घटनाक्रम पर मौन क्यों है? क्या किसी बड़ी अनहोनी या राष्ट्रविरोधी साजिश के मुहाने पर खड़ा है यह संगठन?

## **उपसंहार: अब हटेगा छद्मवेष का नकाब!**
यह नया भारत है, और यह नया उत्तर प्रदेश है। यहां न तो कोई अपराधी किसी नेता के साथ फोटो खिंचवाकर खुद को कानून से बड़ा साबित कर सकता है, और न ही हनुमान जी के पवित्र भंडारे की आड़ लेकर अपने पापों को छुपा सकता है।
मोहम्मद कामरान और उनके संगठन ‘आईना’ के खिलाफ उठ रही यह आवाज किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जो धर्म और सेवा का इस्तेमाल अपनी काली करतूतों को छुपाने के लिए ‘कवच’ की तरह करती है। अब समय आ गया है कि सरकार बिना किसी देरी के इस पूरे सिंडिकेट की उच्च स्तरीय जांच कराए, ताकि सनातन धर्म की पवित्रता भी बची रहे और देश की सुरक्षा पर मंडरा रहा यह छद्म खतरा भी हमेशा के लिए नेस्तनाबूद हो जाए!

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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