उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के प्रवक्ता अनिल तिवारी पद से हटाए गए
सोशल मीडिया में पर समिति विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए थे प्रवक्ता अनिल तिवारी, संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अंतिम मौका देते हुए सदस्यता रद्द नहीं किया लेकिन प्रवक्ता पद से हटाया, समिति के सम्मान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं - प्रभात त्रिपाठी(संयोजक) उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति

**लेटर वॉर से थर्राया लखनऊ का पत्रकारिता जगत!**
* **कुर्सी विवाद में आर-पार: UP मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक!**
* **बिना पूछे सोशल मीडिया पर उंगली चलाई तो छिन गया प्रवक्ता का ‘माइक’!**
* **संयोजक प्रभात त्रिपाठी का अल्टीमेटम- ‘कानूनी जाल में फंसेंगे बगावत करने वाले!’**
**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति पुनर्गठित पत्रकार हित में काम करना चाहती है लकिन कुछ लोग पीछे से एक देशद्रोही संघटन आईना की शह का शिकार अपनी समिति को बनाने मे जुटे है। कुछ मुठ्ठी भर पदाधिकारी शपथ लेने के बाद भी समिति को अस्थिर कर रहे है। 25 मई की दोपहर ठीक 12 बजे जैसे ही नई नवेली पुनर्गठित समिति ने आकार लिया, वैसे ही बगावत के सुर भी बुलंद हो गए। लेकिन इस बार ‘हाईकमान’ के मूड में रहम की कोई गुंजाइश नहीं थी। अनुशासन की मर्यादा लांघने के आरोप में तत्कालीन अध्यक्ष शेखर पंडित को पहले ही बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका था, और अब उसी कड़ी में अगला विकेट **प्रवक्ता अनिल तिवारी** का गिरा है!
सोशल मीडिया पर बिना इजाजत ‘ज्ञान’ बांटना प्रवक्ता साहब को इतना भारी पड़ेगा, इसकी उम्मीद शायद उन्हें भी नहीं रही होगी।
### **सोशल मीडिया पर ‘विस्फोट’ और पद ‘स्वाहा’!**
सूत्रों के मुताबिक, अनिल तिवारी ने पद संभालते ही संगठन के नियमों को ताक पर रख दिया। महासचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष और खुद संयोजक प्रभात त्रिपाठी की राय लिए बिना उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा लिख दिया, जिससे समिति की साख पर आंच आ गई। फिर क्या था? सभी 20 पदाधिकारियों ने एक सुर में ‘अंगूठा’ दिखाया और अनिल तिवारी से प्रवक्ता का तमगा हमेशा के लिए छीन लिया।
> **समिति की दोटूक फटकार:**
> “सोशल मीडिया पर लाइक और कमेंट्स बटोरने से संगठन नहीं चलते। समिति कागजों और कानूनों से चलती है। अनिल तिवारी को यह आखिरी चेतावनी है, सुधर जाएं वरना कार्यकारिणी से भी पर कतर दिए जाएंगे।”
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### **बैकस्टेज से कोई ‘कठपुतली’ तो नहीं नचा रहा?**
समिति के भीतर इस कार्रवाई के बाद से एक गंभीर सुगबुगाहट तेज हो गई है। संगठन के बड़े नेताओं को अंदेशा है कि अनिल तिवारी यह सब अपने मन से नहीं कर रहे थे, बल्कि पुनर्गठित समिति को अस्थिर करने के लिए किसी ‘तीसरे संगठन’ के इशारे पर यह पूरी स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। समिति ने साफ कहा है कि किसी भी बाहरी ताकत के इशारे पर नाचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
### **सीधे FIR की तैयारी: अब कोर्ट-कचहरी में होगा फैसला?**
यह सिर्फ एक पद से हटाने की सामान्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे कानूनी हंटर चलाने की पूरी तैयारी है। समिति के सभी पदाधिकारियों ने बकायदा **शपथ पत्र और लिखित हस्ताक्षर** किए हैं, जिससे यह पूरा मामला कानूनी दायरे में आ चुका है।
संयोजक प्रभात त्रिपाठी और पदाधिकारियों ने खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा है:
> “अगर बर्खास्त अध्यक्ष (शेखर पंडित) और हटाए गए पूर्व प्रवक्ता (अनिल तिवारी) ने सोशल मीडिया या किसी इंटरव्यू के जरिए नई समिति को कमजोर करने या इस्तेमाल करने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ सीधे **मुकदमा (FIR)** दर्ज कराया जाएगा। जेल जाने के लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।”
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### **निजी एजेंडा चलाने वालों पर सर्जिकल स्ट्राइक**
संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी हंटर नीति साफ कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि यह पत्रकारों का संगठन है, किसी की जागीर नहीं। जो कोई भी संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया जाएगा, उसका हश्र भी शेखर पंडित और अनिल तिवारी जैसा ही होगा।
इस विस्फोटक कार्रवाई के बाद लखनऊ के मीडिया कॉरिडोर्स में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब देखना यह है कि पद गंवाने के बाद क्या अनिल तिवारी इस ‘आखरी मौके’ की कद्र करते हैं या फिर ये चिंगारी किसी नए कानूनी बवंडर को जन्म देती है!

