उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के नवनिर्वाचित अध्यक्ष शेखर पंण्डित बर्खास्त
संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अनुशासन हीनता व संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर शेखर पंण्डित को किया बर्खास्त, बोले संगठन के साथ गद्दारी बर्दाश्त नहीं- प्रभात त्रिपाठी(संयोजक) उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति




**💥 महा-धमाका: यूपी संवाददाता समिति में ‘सफाई अभियान’, संयोजक प्रभात त्रिपाठी का महा-ऐक्शन!**
**लखनऊ।**
इसे कहते हैं असली ‘पावर स्ट्रोक’! उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के सशक्त और कद्दावर संयोजक **प्रभात त्रिपाठी** ने अनुशासनहीनता और गद्दारी के खिलाफ एक ऐसा ऐतिहासिक और विस्फोटक फैसला लिया है, जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के मीडिया गलियारों को हिलाकर रख दिया है।
समिति की साख को अपने खून-पसीने से सींचने वाले संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने यह साफ कर दिया है कि संगठन से बड़ा कोई नहीं है। उन्होंने समिति की पीठ में छुरा घोंपने वाले और एक बाहरी संगठन के इशारे पर ‘कठपुतली’ बने अध्यक्ष शेखर पंडित को **दूध में से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया है।**
शायर ने शायद ऐसे ही हालात के लिए लिखा था—
> *”हम ही से सीखकर हमसे ही आंखें मिलाने लगे,*
> *जो कल तक फर्श पर थे, आज खुद को अर्श का बताने लगे…”*
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### 🔥 प्रभात त्रिपाठी का ‘महा-संकल्प’: न झुके, न रुके, सीधे कर दिया बर्खास्त!
संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने साबित कर दिया कि जब बात पत्रकारों के सम्मान और समिति की गरिमा की आएगी, तो वे कोई भी बड़ा फैसला लेने से हिचकेंगे नहीं। शेखर पंडित लगातार सोशल मीडिया पर मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ रहे थे, समिति के खिलाफ कुचक्र रच रहे थे और संयोजक प्रभात त्रिपाठी के खिलाफ ही अपशब्दों का बाण चला रहे थे।
लेकिन प्रभात त्रिपाठी ने धैर्य का परिचय देते हुए पहले सारे सबूत जुटाए। जब 24 मई को कोषाध्यक्ष विक्रम राव ने शेखर पंडित के ‘डांस’ (दूसरे संगठन के साथ मिलकर की जा रही साजिश) का कच्चा चिट्ठा खोला, तो प्रभात त्रिपाठी ने बिना एक पल गंवाए इस ‘दीमक’ का सफाया करने का हुक्म जारी कर दिया।
### 💪 संयोजक के पीछे चट्टान की तरह खड़ी रही पूरी कार्यकारिणी
प्रभात त्रिपाठी के इस कड़े और न्यायसंगत फैसले की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी की पूरी कोर कमेटी उनके पीछे सेना की तरह खड़ी हो गई। शेखर पंडित पूरी तरह अलग-थलग (Isolation) पड़ गए। संयोजक के फैसले पर एकजुटता दिखाते हुए इन दिग्गजों ने तुरंत हस्ताक्षर किए:
* **ज्ञानेश पाठक (महासचिव):** जिन्होंने गद्दारी के खिलाफ इस फैसले को सही ठहराया।
* **के. के. सिंह व जितेंद्र कुमार सिंह (उपाध्यक्ष):** जिन्होंने समिति के मान-सम्मान की रक्षा के लिए हामी भरी।
* **विक्रम राव (कोषाध्यक्ष):** जिन्होंने साजिश का पर्दाफाश कर पूरी रिपोर्ट सौंपी।
* **अर्चना गुप्ता (संयुक्त सचिव):** जिन्होंने अनुशासनहीनता के खिलाफ इस ऐक्शन का पुरजोर समर्थन किया।
### 📜 हलफनामे (शपथ पत्र) का अपमान पड़ा भारी
शेखर पंडित ने पद संभालते वक्त बाकायदा लिखित कसम खाई थी, हस्ताक्षर किए थे कि वे नियमों का पालन करेंगे। लेकिन वे अपनी ही कसमों से मुकर गए। प्रभात त्रिपाठी ने नियमों का चाबुक चलाकर यह संदेश दे दिया है कि संवाददाता समिति में रहने के लिए मर्यादा और अनुशासन पहली शर्त है।
**अब आगे क्या?**
इस महा-ऐक्शन के बाद प्रभात त्रिपाठी के समर्थकों और सच्चे पत्रकारों में भारी उत्साह है। सब एक सुर में कह रहे हैं कि **”प्रभात त्रिपाठी का यह फैसला समिति की शुद्धिकरण के लिए बेहद जरूरी था।”** कुचक्र रचने वाले अब मुंह छिपाते घूम रहे हैं, और समिति अब और भी ज्यादा मजबूत और बुलंद होकर उभरी है!
