,*ख़बरदार ब्लैकमेलर! एक हजार फर्जी शिकायतों वाले कामरान गैंग पर कसेगा नकेल*
*RTI के नाम पर महाठगी: मीडिया को डराने वाले कामरान सिंडिकेट की उलटी गिनती शुरू, CM योगी से गुहार*


*मीडिया जगत के खिलाफ साजिश रचने वाले ‘ब्लैकमेलर’ मोहम्मद कामरान और उसके गिरोह की गिरफ्तारी की मांग*
*मुख्यमंत्री योगी से गुहार लगाएगा पत्रकार समुदाय*
लखनऊ:मीडिया जगत में फर्जी और झूठी शिकायतों के जरिए ब्लैकमेलिंग का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मोहम्मद कामरान नाम का एक व्यक्ति RTI, IGRS, धारा 156 (3) और तथ्यहीन जनहित याचिकाओं (PIL) का दुरुपयोग करके पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर दबाव बनाने का धंधा चला रहा है। कामरान के इस काम में उसके साथ एक पूरा सिंडिकेट शामिल है।
*फर्जी दस्तावेजों और शिकायतों का जाल*
मिली जानकारी के अनुसार, कामरान ने जाली दस्तावेजों और फर्जी अनुभव के आधार पर प्रेस मान्यता हासिल की थी, जिसे निष्पक्ष जांच के बाद शासन द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच से भी उसे कड़ी फटकार मिल चुकी है तथा तथ्यहीन याचिकाएं दाखिल करने पर हाईकोर्ट उस पर अर्थदंड (जुर्माना) भी लगा चुका है।
कामरान पर अब तक 1000 से अधिक फर्जी शिकायतें दर्ज कराने का रिकॉर्ड है। उसने पत्र-पत्रिकाओं, न्यूज चैनलों, प्रेस क्लबों, मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों, छायाकारों और वीडियो जर्नलिस्टों के खिलाफ शिकायतों की भरमार लगा रखी है। नवभारत टाइम्स और अमर उजाला जैसे बड़े अखबारों से लेकर सैकड़ों लघु व मध्यम समाचार पत्रों को निशाना बनाया गया है।
*मुख्य उद्देश्य: सूचना विभाग पर दबाव और वसूली*
मोहम्मद कामरान का मुख्य उद्देश्य चैनलों व अखबारों के विज्ञापनों, उनकी सूचीबद्धता और पत्रकारों की मान्यता को लेकर फर्जी शिकायतों के जरिए सूचना विभाग पर दबाव बनाना, मोटी रकम वसूलना और मुख्यमंत्री के विभाग को बदनाम करना है। वह चैनलों के खिलाफ 156 (3) का दुरुपयोग कर FIR करवाने की कोशिशें भी कर चुका है।
वह विधायकों के जरिए विधानसभा सत्रों में क्षेत्रीय चैनलों से जुड़े सवाल उठवाता रहा है, ताकि टीवी चैनलों के विज्ञापनों पर रोक लग सके और वहां कार्यरत निर्दोष टीवी जर्नलिस्टों, एंकरों, रिपोर्टरों और वीडियो जर्नलिस्टों की प्रेस मान्यता समाप्त हो जाए तथा उनकी रोजी-रोटी छीन जाए। जबकि हकीकत यह है कि चैनल अपनी मेहनत और नियम-कानून के तहत काम कर रहे हैं और जो सुविधाएं या विज्ञापन उन्हें मिल रहे हैं, वे उनके हक के हैं।
*8 सदस्यों के ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश*
मोहम्मद कामरान अकेले यह काम नहीं कर रहा, बल्कि उसके साथ आठ लोगों का एक पूरा गिरोह (सिंडिकेट) काम कर रहा है। इस गिरोह में जो प्रमुख नाम सामने आए हैं:
* मोहम्मद कामरान
*तनवीर अहमद सिद्दीकी
* अनिल कुमार सैनी
* त्रिवेदी
* अजय वर्मा
* सरदार परमजीत सिंह
* गुरमीत कौर
* अनिल तिवारी
* शेखर पंडित
यह गिरोह सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर, जनहित से जुड़े IGRS प्लेटफॉर्म और RTI का दुरुपयोग करके और महिलाओं तक को ब्लैकमेल करने जैसे अपराधों में संलिप्त बताया गया है। कामरान पेशे से वकील होने के बावजूद वकालत छोड़ फर्जी “RTI एक्टिविस्ट” बनकर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
*बार काउंसिल और एलडीए वीसी को भेजी जाएगी शिकायत*
कामरान के इंदिरा नगर स्थित आवास के पते का उल्लेख करते हुए एलडीए (LDA) वीसी को शिकायती पत्र भेजा गया है। इसके अलावा, मोहम्मद कामरान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और फर्जीवाड़े के दस्तावेजों को संलग्न करते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष को भी इनके एल० एल ०बी ०की फर्जी डिग्री भी शीघ्र जारी की जाएगी इतना ही नहीं बल्कि पत्र भेजकर उसकी वकालत की सनद/मान्यता रद्द करने की मांग की जाएगी।
*एकजुट हुआ संपूर्ण मीडिया जगत*
मोहम्मद कामरान और उसके सहयोगियों की इस दुर्भावनापूर्ण गतिविधि के खिलाफ पूरे प्रदेश का मीडिया जगत (पत्रकार संगठन, टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन) अब एकजुट हो गया है। पत्रकार समुदाय जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मोहम्मद कामरान और उसके पूरे सिंडिकेट (सभी 8 सदस्यों) की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेगा।