*सहानुभूति का नकाब, विभीषणों' का साथ: निष्पक्षता के नाम पर योगी सरकार को घेरने का विस्फोटक षड्यंत्र!*
*पत्रकारिता या राजनीतिक मोहरा? सरकार विरोधी 'स्पॉन्सर्ड एजेंडे' का सनसनीखेज खुलासा!*

*पीत पत्रकारिता का खेल या राजनीतिक प्रायोजित षड्यंत्र? सरकार को घेरने वाले पत्रकार की मंशा पर उठे गंभीर सवाल!*
लखनऊ / दिल्ली:
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे एक तथाकथित पत्रकार की निष्पक्षता और नीयत पर अब गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में पशुपालन विभाग और अन्य प्रशासनिक फैसलों को लेकर मुख्यमंत्री और सरकार पर निशाना साधने वाले इस वीडियो को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह पत्रकारिता का निष्पक्ष रूप है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र चल रहा है?
*क्या किसी के इशारे पर हो रही है पूरी ‘स्टोरियां’?*
सूत्रों और विश्लेषकों का मानना है कि केवल सरकार और उसके प्रशासनिक अधिकारियों (जैसे संजय प्रसाद और निदेशक विशाल सिंह व अन्य तमाम)को निशाना बनाना किसी निष्पक्ष पत्रकारिता का हिस्सा नहीं हो सकता। सवाल उठ रहा है कि जो पत्रकार हमेशा सरकार पर सवाल दागता है, क्या उसने कभी पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार या अखिलेश यादव के कार्यकाल के भ्रष्टाचार और फैसलों पर इस तरह का मुखर रुख अपनाया है?
*नौकरशाही के विभीषणों और ‘खास’ वकीलों की भूमिका*
खबरों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ राजनीतिक शह ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में मौजूद कुछ विभीषणों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आरोप लग रहे हैं कि सरकार के भीतर बैठे कुछ लोग और विरोधी खेमे की शह पर इस पूरे मामले को हवा दी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिलने के बाद हौसले बुलंद होना और बड़े-बड़े वकीलों के दम पर कानूनी दांव-पेच खेलकर फिर से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना, इस बात की ओर इशारा करता है कि यह मामला महज जनहित या पत्रकारिता से जुड़ा नहीं है।
*सवालों के घेरे में ‘एजेंडा जर्नलिज्म*
पत्रकारिता का मूल धर्म सवाल पूछना और जनहित के मुद्दे उठाना है, लेकिन जब सवाल केवल एकतरफा, प्रायोजित और राजनीतिक विरोधी दलों को फायदा पहुंचाने की मंशा से प्रेरित लगने लगें, तो उसे ‘पीत पत्रकारिता’ और ‘एजेंडा जर्नलिज्म’ के सिवा क्या कहा जाएगा?
अब देखना यह होगा कि सरकार के खिलाफ रचे जा रहे इस कथित षड्यंत्र और इसके पीछे छिपे किरदारों का सच कब तक पूरी तरह बेनकाब होता है!