## **वर्दी की आड़ में महालूट! लखनऊ के कामता पुलिस बूथ पर TSI राजेश सिंह का तानाशाही फरमान— 'पैसा दो, नहीं तो काटूंगा चालान'!**
## **राजधानी लखनऊ के कामता बूथ या 'वसूली अड्डा'? TSI राजेश सिंह का सरेआम गुंडाराज; नो घूस, तो 'चालान एनकाउंटर'!**

# **सड़क पर महालूट! कामता बूथ बना TSI राजेश कुमार सिंह का ‘वसूली अड्डा’, पैसे न देने पर सरेआम बसों का ‘चालान एनकाउंटर’!**
**लखनऊ का सबसे सनसनीखेज खुलासा:**
राजधानी लखनऊ के ट्रैफिक महकमे में एक ऐसा ‘सुलतान’ तैनात है, जिसके आगे नियम-कायदे और सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पानी भरती नजर आ रही है। कामता ट्रैफिक बूथ पर तैनात **टी एस आई (TSI) राजेश कुमार सिंह** ने सड़क को अपनी जागीर और वर्दी को अवैध वसूली का लाइसेंस बना लिया है। आज सुबह जो कुछ भी कामता चौराहे पर हुआ, उसने यूपी ट्रैफिक पुलिस की साख को तार-तार कर दिया है।
### **सुबह 6:50 का ‘सड़क कांड’: खाकी का खौफ या सीधे डकैती?**
**तारीख: 29 जून 2026, समय: सुबह करीब 06:50 बजे।** जब शहर सोकर ठीक से जागा भी नहीं था, तब कामता बूथ पर TSI राजेश कुमार सिंह अपनी ‘वसूली गन’ (मोबाइल कैमरा) तानकर शिकार की तलाश में थे। तभी वहाँ से **प्राइवेट बस संख्या UP 42 AT 9046** गुजरी।
* **जबरन घेराबंदी:** टीएसआई ने बस को ऐसे रुकवाया जैसे कोई बड़ा अपराधी पकड़ा गया हो।
* **कैमरे का ब्लैकमेल:** बिना किसी कारण के बस के आगे और पीछे जाकर धड़ाधड़ फोटो खींची गईं। यह कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि ‘डीलिंग’ की शुरुआत थी।
* **क्लीनर की ‘ना’ और साहब का ‘अहंकार’:** टीएसआई ने क्लीनर को साइड में बुलाकर सीधे ‘सुविधा शुल्क’ की डिमांड की। लेकिन, जब मेहनत की कमाई में से रिश्वत देने से क्लीनर ने मना कर दिया, तो साहब का ईगो हर्ट हो गया। आनन-फानन में बिना किसी जुर्म के बस का ‘डिजिटल चालान’ काटकर हाथ में थमा दिया गया।
**### **’रिश्वत मास्टर’ का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड: जहाँ-जहाँ पैर पड़े, वहाँ-वहाँ वसूली के मेले लगे**
यह कोई पहली वारदात नहीं है। पूरे ट्रांसपोर्ट महकमे में इस बात की चर्चा है कि TSI राजेश कुमार सिंह जहाँ भी तैनात रहते हैं, वहाँ का ‘कलेक्शन’ आसमान छूने लगता है। प्राइवेट बस ड्राइवरों का कहना है:
> *”साहब का एक ही मंत्र है— **पैसा फेंको, तमाशा देखो। पैसा नहीं तो फोटो खींचकर बर्बाद कर दूंगा।** कई बार बड़े अधिकारियों से लिखित शिकायत की गई, लेकिन साहब की ‘सेटिंग’ इतनी मजबूत है कि आज तक कोई इनका बाल भी बांका नहीं कर पाया। इसी शह के कारण इनका मन सातवें आसमान पर है।”*
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### **तानाशाही फरमान: “मेरे इलाके से प्राइवेट बस गुजरी, तो तबाह कर दूंगा!”**
पीड़ितों के मुताबिक, यह टीएसआई सरेआम धमकी देता है कि *’कोई भी प्राइवेट बस मेरे क्षेत्र से जिंदा (बिना चालान के) नहीं निकल सकती।’*
अब सीधा सवाल सूबे के मुखिया और आला अफसरों से है:
1. **टैक्स दें या घूस?** एक बस मालिक लाखों रुपये का रोड टैक्स, भारी-भरकम फिटनेस फीस और इंश्योरेंस का पैसा सरकार को ईमानदारी से देता है। अगर गाड़ियां सड़क पर चलने ही नहीं दी जाएंगी, तो यह पैसा कहाँ से आएगा? क्या बस मालिक अपनी किश्तें चुकाए या इन भ्रष्ट अफसरों की जेबें भरे?
2. **कामता चौराहा किसका?** क्या लखनऊ की सड़कों पर अब यूपी सरकार का कानून नहीं, बल्कि राजेश कुमार सिंह का ‘जंगलराज’ चलेगा?
### **योगी जी की ‘जीरो टॉलरेंस’ को खुली चुनौती— अब आर-पार की जंग!**
इस महालूट के खिलाफ अब ट्रांसपोर्टर्स और पीड़ित बस संचालकों का गुस्सा फूट पड़ा है। समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से **माननीय मुख्यमंत्री महोदय** और **डीजीपी उत्तर प्रदेश** से सीधी मांग की गई है:
* इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ के मुखिया TSI राजेश कुमार सिंह को तत्काल सस्पेंड किया जाए।
* इनके द्वारा काटे गए सभी चालानों की हिस्ट्री निकालकर उनकी सत्यता जांची जाए।
* अगर इस ‘वसूली भाई’ पर तुरंत एक्शन नहीं हुआ, तो चक्का जाम करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।
**देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का हंटर इस बेलगाम अधिकारी पर कब चलता है, या फिर खाकी का यह ‘वसूली तंत्र’ ऐसे ही आम जनता का खून चूसता रहेगा!**
