E-Paperhttps://navbharatdarpan.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedक्राइमखेलछत्तीसगढ़टेक्नोलॉजीटॉप न्यूज़दिल्ली NCRदुनियादेशधर्मपंजाबबिहारबॉलीवुडमध्य प्रदेशमहाराष्ट्रयुवायूपीराजनीतिराजस्थानराज्यलोकल न्यूज़
Trending

**सिधांई का 'चौमुखी सिंडिकेट': मंदिर की ज़मीन पर कब्ज़ा, मनरेगा में लूट और सेक्रेटरी-लेखपाल की लीपापोती उजागर!**

**शाहगंज में प्रशासनिक साज़िश: भू-माफिया और प्रधान संग मिले सेक्रेटरी-लेखपाल, मंदिर ज़मीन कब्ज़ाने का पर्दाफाश!**

CNO40019426052509_47631032 (3)

CNO40019426052532_47621915


## **शाहगंज का ‘चौमुखी सिंडिकेट’: मंदिर की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा, मनरेगा में महाघोटाला और लीपापोती की खुली पोल!**

* **विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:** *उत्कर्ष तिवारी*

जौनपुर!उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्टाचार एवं भू-माफियाओं के विरुद्ध चलाए जा रहे ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) अभियान और ‘एंटी भू-माफिया’ मुहीम को जनपद जौनपुर की शाहगंज तहसील अंतर्गत **ग्रामसभा सिधांई** में खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। शाहगंज तहसील के प्रशासनिक गलियारों और सिधांई गांव की फिजाओं में इस समय एक ऐसा संवेदनशील एवं महा-विस्फोटक मामला गरमाया हुआ है, जिसने शासन-प्रशासन के पूरे तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
यहाँ भू-माफिया, एक तथाकथित फर्जी पुजारी (सुरेश तिवारी), वर्तमान ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सेक्रेटरी एवं स्थानीय हलका लेखपाल का एक **’चतुष्कोणीय सिंडिकेट’ (Quadrangular Syndicate)** सक्रिय है, जिसने न केवल जन-आस्था के प्राचीन केंद्र को निशाना बनाया है, बल्कि मनरेगा जैसी राष्ट्रव्यापी कल्याणकारी योजना के सरकारी खजाने में भी जमकर डाका डाला है।

### 📌 **१. आस्था पर सीधा कुठाराघात: प्राचीन देवस्थान की ज़मीन पर अवैध निर्माण**
ग्रामसभा सिधांई में वर्षों पुराना एक अति-प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर स्थित है, जो समूचे क्षेत्र के ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और जन-विश्वास का प्रमुख केंद्र बिंदु है। आरोप है कि इस मंदिर की करोड़ों रुपये मूल्य की बेशकीमती भूमि पर गांव के ही एक तथाकथित फर्जी पुजारी सुरेश तिवारी द्वारा स्थानीय दबंग भू-माफियाओं के संरक्षण और शह पर अवैध रूप से पक्का मकान निर्माण कराया जा रहा है। जन-आस्था की इस पवित्र भूमि को कौड़ियों के दाम भू-माफियाओं के हवाले करने का यह दुस्साहस स्थानीय प्रशासनिक संरक्षण के बिना कतई संभव नहीं था।
इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की छवि को धूमिल करते हुए हलका लेखपाल ने अपनी कार्यशैली से भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब लेखपाल सिधांई गांव पहुँचा, तो वह किसी निष्पक्ष जांच या अवैध निर्माण रोकने हेतु नहीं, बल्कि आरोपी फर्जी पुजारी सुरेश तिवारी की पैरवी और वकालत करने आया था। लेखपाल ने ग्रामीणों पर अनुचित प्रशासनिक दबाव बनाते हुए मंदिर की अवैध रूप से कब्जाई गई भूमि को वैध घोषित कराने के उद्देश्य से एक ‘अनापत्ति पत्र’ (NOC) पर हस्ताक्षर कराने का कुत्सित प्रयास किया।

> **लेखपाल की सरेआम सीनाजोरी:**
> जब जागरूक और एकजुट ग्रामीणों ने भ्रष्ट लेखपाल के इस दस्तखत अभियान को सिरे से खारिज कर दिया, तब लेखपाल ने सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों के सम्मुख फर्जी पुजारी को आश्वस्त करते हुए दबंगई से कहा— *”आपका कब्जा बरकरार रहेगा, कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा।”* लेखपाल का यह आचरण स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभ, पदीय दुरुपयोग और माफिया संरक्षण की ओर इशारा करता है, जिसके कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
>

### 📌 **२. मनरेगा में व्यापक ‘परिवारवाद’ और लाखों रुपये का वित्तीय गबन**
शाहगंज तहसील के सिधांई गांव में भ्रष्टाचार का दायरा केवल ज़मीन कब्ज़ाने तक सीमित नहीं है। भारत सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा (MGNREGA) में भी नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर व्यापक वित्तीय अनियमितता और महाघोटाला अंजाम दिया गया है।
ग्राम प्रधान ने इस जनकल्याणकारी योजना को अपने परिवार का निजी बैंक खाता समझ लिया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने ही परिवार, निकटतम सगे-संबंधियों, मित्रों और प्रभाव क्षेत्र के लोगों के नाम पर दर्जनों फर्जी ‘जॉब कार्ड’ जारी कर रखे हैं। धरातल पर बिना कोई भौतिक कार्य कराए, अथवा केवल कागजों पर फर्जी मस्टरोल (Mustroll) तैयार करके विगत कई वर्षों से शासकीय बजट के लाखों रुपयों का खुलेआम गबन किया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि ब्लॉक मुख्यालय स्तर से सिधांई गांव के मनरेगा लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक (Public) कर दी जाए और निष्पक्ष फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, तो यह पारिवारिक घोटाला पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।

### 🚨 **३. आईजीआरएस पोर्टल का खुलासा: जांच के नाम पर लीपापोती और फर्जी सहमति!**
इस पूरे मामले में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS Portal) पर दर्ज जन-शिकायत (शिकायत संख्या: **40019426052509** एवं **40019426052532**) के आधिकारिक ट्रैक रिकॉर्ड से अत्यंत चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाए पूरा तंत्र लीपापोती में जुटा हुआ है।

> **आईजीआरएस फीडबैक और धरातल की हकीकत:**
> निर्वाचन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ग्रामसभा सिधांई की कुल आबादी **2,500 से अधिक** है। इतने बड़े गांव के धार्मिक और वित्तीय मामले की जांच करने पहुँचे जांच अधिकारी / ग्राम पंचायत सेक्रेटरी की भूमिका पूरी तरह संदेह के कटघरे में है। सेक्रेटरी द्वारा पूरी आबादी को दरकिनार कर केवल एक ही परिवार (जिलेदार तिवारी व गुड्डू तिवारी) से जबरन सहमति पत्र बनवाकर हस्ताक्षर करा लिया गया, जो निष्पक्ष जांच आख्या (Report) की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
>
जागरूक ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया है कि जब पूर्व की शुरुआती जांच में ही अवैध कब्जे और देवस्थान की भूमि के अतिक्रमण का मामला पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है, तो फिर स्थानीय तहसील प्रशासन और पुलिस बल मिलकर एंटी भू-माफिया अभियान के तहत भूमि को तत्काल कब्जामुक्त क्यों नहीं करा रहे? क्या उच्चाधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की प्रशासनिक साज़िश रची जा रही है?

### 🔨 **४. ग्रामीणों की मुख्य मांगें और अपेक्षित त्वरित कार्रवाई**
ग्रामसभा सिधांई के समस्त जागरूक ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी जौनपुर एवं उत्तर प्रदेश शासन से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कड़क कार्रवाई की गुहार लगाई है:

1. **बुलडोजर कार्रवाई:** मंदिर की पवित्र भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण को तत्काल रुकवाते हुए ‘बुलडोजर’ द्वारा अतिक्रमण ध्वस्त किया जाए एवं ज़मीन को पूर्णतः कब्जामुक्त कराया जाए।

2. **विशेष फॉरेंसिक जांच:** ब्लॉक स्तर से जॉब कार्ड धारकों की सूची सार्वजनिक की जाए तथा वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के मनरेगा एवं ग्राम निधि के आय-व्यय की गहन फॉरेंसिक जांच हो।

3. **भ्रष्ट अधिकारियों पर दंडात्मक एक्शन:** भू-माफिया को संरक्षण देने वाले लेखपाल व संदिग्ध सेक्रेटरी को तत्काल निलंबित कर विजिलेंस (Vigilance) जांच बिठाई जाए और उनकी अनुपातहीन संपत्ति की जांच हो।
> *”देर से मिला न्याय अन्याय के बराबर है! यदि उत्तर प्रदेश शासन और जौनपुर जिला प्रशासन ने इस चौमुखी सिंडिकेट (पुजारी-माफिया-प्रधान-लेखपाल/सेक्रेटरी) के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाए, तो ग्रामसभा सिधांई का जन-आक्रोश बहुत जल्द सड़कों पर उग्र आंदोलन के रूप में नज़र आएगा।”*

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!