**पत्रकारिता का नकाब या आपराधिक रिकॉर्ड? हजरतगंज में दर्ज 8वीं FIR ने खोली विवादित पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की पोल*
**सांसद रवि किशन विवाद से लेकर 'कट्टा' बरामदगी तक: जातिगत जहर घोलने वाले कथित पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर कड़ा कानूनी शिकंजा!**

# **पत्रकारिता का नकाब या आपराधिक इतिहास? विवादित पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर दर्ज हुई 8वीं एफआईआर; हजरतगंज कोतवाली में खुली दावों की पोल**
### **जातिगत वैमनस्यता फैलाने, महिलाओं के चरित्र हनन और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता के लीगल नोटिस की अनदेखी पर पुलिस का कड़ा शिकंजा**
**विशेष समाचार रिपोर्ट (लखनऊ)**
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अति-संवेदनशील एवं प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्र हजरतगंज कोतवाली में विवादित पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के विरुद्ध एक और गंभीर मामले में प्राथमिकी (**FIR No. 8**) दर्ज की गई है। मुंबई, बस्ती, नोएडा और प्रदेश के अन्य हिस्सों में दर्ज मुकदमों की शृंखला में यह आठवां मामला है। पुलिस द्वारा विस्तृत जांच और लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई इस प्राथमिकी की तहरीर ने कथित पत्रकार की गतिविधियों, उनकी कार्यशैली और उनके आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े कई गंभीर तथ्यों को उजागर किया है। हजरतगंज में दर्ज प्राथमिक पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आरोपी पत्रकार कोई आलोचनात्मक पत्रकारिता नहीं कर रहा, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने और जातीय विद्वेष भड़काने के उद्देश्य से आदतन गतिविधियों में संलिप्त है।
### **पत्रकारिता की आड़ में सामाजिक विद्वेष भड़काने का आरोप**
हजरतगंज कोतवाली में 27 जून को दर्ज हुई इस एफआईआर की विस्तृत तहरीर के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी सरकार या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामान्य आलोचना या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित नहीं है। तहरीर में साफ-साफ रेखांकित किया गया है कि अभिषेक उपाध्याय द्वारा उत्तर प्रदेश में त्रि-पक्षीय जातीय विद्वेष—विशेष रूप से **यादव, ब्राह्मण और क्षत्रिय** समाजों के बीच आपस में वैमनस्यता, विद्वेष और अविश्वास का वातावरण बनाने का योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किया जा रहा था।
अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपी पत्रकार सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी विवादित सामग्री प्रसारित कर रहा था, जिससे विभिन्न समुदायों के मध्य तनाव पैदा हो। हाल के दिनों में आरोपी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘ठाकुरवाद’, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर, इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और आलोक सिंह जैसे अधिकारियों के नामों को उछालकर यह प्रदर्शित करने की कोशिश की जा रही थी कि उसे निष्पक्ष बात करने की सजा दी जा रही है। परंतु पुलिस की जांच और प्राथमिक साक्ष्यों से यह बात सामने आई है कि यह संपूर्ण विवाद वास्तव में स्वयं ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा शुरू की गई विधिक कार्रवाइयों का परिणाम था, जिसे आरोपी द्वारा गलत दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।
### **गोरखपुर सांसद रवि किशन प्रकरण एवं लीगल नोटिस का पूरा सच**
पूरे विवाद का मुख्य केंद्र गोरखपुर के सांसद और प्रसिद्ध अभिनेता रवि किशन शुक्ला के विरुद्ध प्रसारित की गई आपत्तिजनक एवं अनर्गल टिप्पणियां रहीं। आरोपी अभिषेक उपाध्याय ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सांसद रवि किशन के संदर्भ में कई भ्रामक बातें प्रसारित की थीं। इस विषय पर ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध जनों ने कड़ा संज्ञान लिया। गोरखपुर निवासी राजकुमार शुक्ला तथा प्रयागराज निवासी गणेश बल्लभ द्विवेदी एवं उनके एक अन्य सहयोगी ने सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन. सिंह के माध्यम से अभिषेक उपाध्याय को एक औपचारिक 3-पेज का विस्तृत लीगल नोटिस प्रेषित किया था।
#### **लीगल नोटिस (पैरा 11) एवं कानूनी चेतावनियों के मुख्य बिंदु:**
1. **पैरा 11 का स्पष्ट निर्देश:** लीगल नोटिस के पैरा 11 में स्पष्ट तौर पर यह चेतावनी दी गई थी कि यदि अभिषेक उपाध्याय 3 दिनों के भीतर अपनी आपत्तिजनक टिप्पणियों को वापस लेकर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ सक्षम न्यायालयों और थानों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
2. **नोटिस की अवहेलना:** आरोपी द्वारा नोटिस प्राप्त होने की लिखित स्वीकृति दी गई, परंतु उन्होंने अपनी गतिविधियों में सुधार करने के बजाय नोटिस का मजाक उड़ाया।
3. **विवादित सामग्री में तेजी:** नोटिस मिलने के उपरांत माफी मांगने के बजाय आरोपी द्वारा और अधिक तीव्रता से भड़काऊ और विवादित पोस्ट डाली जाने लगीं।
जब मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज करा दी गई, तब आरोपी ने जनता और अपने समर्थकों को यह कहकर भ्रमित करने का प्रयास किया कि उसके ऊपर ‘ठाकुरवाद’ के खिलाफ बोलने के कारण कार्रवाई हो रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि कानूनी नोटिस देने वाले और प्राथमिक कार्रवाई की नींव रखने वाले स्वयं शुक्ला जी और द्विवेदी जी थे, जो उसी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
### **महिलाओं के चरित्र हनन और चार्जशीटेड मुकदमे**
अभिषेक उपाध्याय का विवादों से नाता केवल भड़काऊ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है। प्राथमिक दस्तावेजों और न्यायालय में लंबित मुकदमों के विवरण से यह सिद्ध होता है कि आरोपी पर गंभीर आपराधिक धाराएं दर्ज हैं। उनके विरुद्ध दो अलग-अलग मुकदमों में दो महिलाओं द्वारा सोशल मीडिया पर चरित्र हनन और अभद्र टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस द्वारा इन दोनों मामलों में गहन जांच के बाद न्यायालय में बाकायदा **चार्जशीट (आरोप पत्र)** दाखिल की जा चुकी है। यह तथ्य दर्शाता है कि पुलिस की प्राथमिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए गए हैं और मामला न्यायालय के समक्ष विचारणीय है।
### **अंबेडकर प्रतिमा विवाद, कट्टा-कारतूस बरामदगी और फरार होने के आरोप**
अभिषेक उपाध्याय के आपराधिक इतिहास का एक और अत्यंत गंभीर अध्याय लखनऊ के सआदतगंज थाने से जुड़ा हुआ है। सआदतगंज थाने में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने / तोड़े जाने के संदर्भ में आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
> **सआदतगंज मामला और न्यायालय की स्थिति:**
> सआदतगंज थाने में दर्ज मामले में पुलिस जांच के दौरान अवैध हथियार (कट्टा) और कारतूस की बरामदगी दर्शायी गई थी। इस मामले में भी पुलिस द्वारा न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वर्तमान में यह मामला लखनऊ के एसीजेएम-4 (ACJM 4) की अदालत में विचाराधीन है। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी अभिषेक उपाध्याय अदालत में लगातार अनुपस्थित (गैरहाजिर) चल रहे हैं, जिसके कारण न्यायालय द्वारा सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
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### **महाराष्ट्र (मुंबई-ठाणे) और महाकुंभ से जुड़ा विवाद**
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों (लखनऊ, बस्ती, नोएडा) में दर्ज एफआईआर के अलावा आरोपी की आपराधिक गतिविधियों का दायरा महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। वर्ष 2025 में मुंबई के ठाणे जिले में अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी।
विशेष बात यह है कि मुंबई में यह एफआईआर ब्राह्मण समाज के ही सनोज मिश्रा द्वारा दर्ज कराई गई थी। यह विवाद महाकुंभ के दौरान अपनी सुंदरता के कारण इंटरनेट पर चर्चित हुई ‘मोनालिसा’ नामक युवती से जुड़े प्रकरण को लेकर शुरू हुआ था। इस मामले में अभिषेक उपाध्याय और सनोज मिश्रा के बीच तीखा विवाद हुआ, जिसके बाद लीगल नोटिस और पुलिस शिकायत का दौर चला। अंततः ठाणे पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया।
### **दर्ज मामलों का संक्षिप्त तालिकाबद्ध विवरण**
| क्र.सं. | स्थान / थाना | मुख्य आरोप एवं विषय-वस्तु | वर्तमान स्थिति |
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| **1** | हजरतगंज कोतवाली (लखनऊ) | जातीय वैमनस्यता (यादव-ब्राह्मण-क्षत्रिय), सांसद रवि किशन पर अशोभनीय टिप्पणी | 8वीं FIR दर्ज, जांच जारी |
| **2** | सआदतगंज थाना (लखनऊ) | डॉ. अंबेडकर मूर्ति विवाद, अवैध कट्टा व कारतूस की बरामदगी | चार्जशीट दाखिल, ACJM-4 में गैरहाजिर |
| **3** | मुंबई (ठाणे) – 2025 | सनोज मिश्रा से विवाद, महाकुंभ (मोनालिसा प्रकरण) संबंधी विवाद | FIR दर्ज, विधिक प्रक्रिया जारी |
| **4-5** | विभिन्न थाने (लखनऊ) | दो अलग-अलग महिलाओं द्वारा सोशल मीडिया पर चरित्र हनन का आरोप | दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल |
| **6-8** | बस्ती, नोएडा एवं अन्य | विवादित पोस्ट, भ्रम फैलाने एवं शांति भंग से जुड़े मामले | FIR दर्ज, विवेचनाधीन |
### **निष्कर्ष: पत्रकारिता का दायरा या कड़े कानूनी शिकंजे की शुरुआत?**
कुल मिलाकर, स्वयं को पत्रकार बताने वाले अभिषेक उपाध्याय द्वारा फैलाए गए कथित भ्रम की परतें अब एक-एक कर उतर रही हैं। कानून के विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारिता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, परंतु यह स्वतंत्रता किसी नागरिक के चरित्र हनन, सामाजिक समूहों में घृणा फैलाने या अवैध हथियार रखने का अधिकार नहीं देती।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता द्वारा भेजे गए नोटिस की अवहेलना, विभिन्न अदालतों में गैरहाजिरी और दर्ज मुकदमों की संख्या (8 एफआईआर) यह दर्शाती है कि मामला अभिव्यक्ति की आजादी का न होकर आदतन कानून के उल्लंघन का है। हजरतगंज पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्यों का संकलन किया जा रहा है और कानून के अनुसार अग्रिम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
