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# **फर्जी पत्रकारिता का 'महाविस्फोट': शेखर पंडित को अल्टीमेटम, सात दिन में सबूत दो या जेल जाओ!**

# **ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़: यूपी संवाददाता समिति के बर्खास्त पूर्व अध्यक्ष शेखर पंडित पर गिरेगी गाज!**

बर्खास्त पूर्व अध्यक्ष शेखर पंडित
बर्खास्त पूर्व अध्यक्ष शेखर पंडित
# **बड़ा धमाका: यूपी संवाददाता समिति के बर्खास्त पूर्व अध्यक्ष शेखर पंडित को ‘कारण बताओ’ नोटिस,*

*पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग गैंग चलाने और जालसाजी से ‘प्रेस मान्यता’ हथियाने का सनसनीखेज आरोप!**

### **मचेगा महासंग्राम: सूचना विभाग के आलाधिकारियों के खिलाफ साजिश और ‘सहारा’ के दर्जन भर पत्रकारों की मान्यता रद्द कराने के खेल का पर्दाफाश*

*सात दिनों में मांगे वेतन पर्ची और बैंक ट्रांजैक्शन के सबूत, नहीं तो दर्ज होगी FIR!**

**लखनऊ।**
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मीडिया और सियासी गलियारों में आज उस समय भूचाल आ गया, जब ‘उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित)’ के उपाध्यक्ष के.के. सिंह ने समिति के पूर्व और बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और विस्फोटक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर दिया। इस नोटिस के सामने आते ही पत्रकारों के बीच हड़कंप मच गया है। नोटिस में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि शेखर पंडित कोई पेशेवर पत्रकार नहीं हैं, बल्कि वे एक राष्ट्र-विरोधी और पत्रकार-विरोधी ‘ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट’ के मुख्य सिपहसालार (गुर्गे) के रूप में काम कर रहे हैं, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ अवैध वसूली और सम्मानित पत्रकारों को प्रताड़ित करना है।

### **RTI और PIL को बनाया ब्लैकमेलिंग का हथियार!**
उपाध्यक्ष के.के. सिंह द्वारा जारी नोटिस में बेहद तीखे शब्दों में कहा गया है कि जिस ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट के इशारे पर शेखर पंडित काम कर रहे हैं, वह गैंग पत्रकारों को डराने-धमकाने के लिए फर्जी नामों से सैकड़ों झूठी शिकायतें, सूचना का अधिकार (RTI) और जनहित याचिकाएं (PIL) दायर करता है। इतना ही नहीं, प्रदेश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनलों को आर्थिक और सामाजिक चोट पहुंचाने के लिए विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के विधायकों के माध्यम से सुनियोजित तरीके से प्रश्न उठवाकर चैनलों की सूचीबद्धता (Empanellment), विज्ञापन और कार्यरत पत्रकारों की मान्यता समाप्त करवाने की गहरी साजिश भी इस सिंडिकेट द्वारा रची गई, जिसके पुख्ता साक्ष्य समिति के पास मौजूद हैं।

### **सूचना निदेशक के खिलाफ साजिश और ‘सहारा’ के पत्रकारों का उत्पीड़न**

नोटिस में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया गया है कि इस ब्लैकमेलिंग गैंग ने शेखर पंडित का इस्तेमाल कर माननीय सूचना निदेशक और विभाग के आलाधिकारियों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया। इसके अलावा, सहारा मीडिया नेटवर्क के करीब एक दर्जन ईमानदार पत्रकारों की प्रेस मान्यता रद्द कराने की घिनौनी साजिश भी रची गई थी। जब यह मामला पब्लिक डोमेन में आया, तो आक्रोशित पत्रकारों ने शेखर पंडित को अपने प्रतिष्ठित व्हाट्सएप ग्रुपों से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया था, जिसके बाद इन्होंने कई पत्रकारों से मिन्नतें और सिफारिशें करवाकर माफी मांगी थी।

### **सबसे बड़ा सवाल: क्या ‘जालसाजी’ से हासिल की राज्य मुख्यालय की मान्यता?**

इस नोटिस का सबसे विस्फोटक हिस्सा शेखर पंडित की अपनी पत्रकारिता की साख पर उठाया गया सवाल है। नोटिस में सीधा आरोप है कि:
> *”जिस व्यक्ति ने जीवन में एक दिन भी किसी मुख्यधारा के अखबार में पूर्णकालिक वेतनभोगी पत्रकार के रूप में नौकरी नहीं की, वह उत्तर प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकारों का नेता कैसे बन बैठा?”*
>
आरोप है कि शेखर पंडित ने जिस प्रेस मान्यता कार्ड के दम पर संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था, वह कार्ड ही पूरी तरह जालसाजी, धोखाधड़ी और तथ्यों को छुपाकर हासिल किया गया है। वे मंचों से ‘दैनिक जागरण’ और ‘हिन्दुस्तान’ जैसे बड़े संस्थानों में नौकरी करने के जो खोखले दावे करते हैं, उसकी हकीकत सिर्फ छात्र जीवन की एक ‘इंटर्नशिप’ से ज्यादा कुछ नहीं है।

### **संदिग्ध अखबार ‘लोक हस्तक्षेप’ भी रडार पर!**

वर्तमान में शेखर पंडित की मान्यता जिस समाचार पत्र **’लोक हस्तक्षेप’** से संबद्ध है, उसकी प्रामाणिकता पर भी गंभीर उंगली उठाई गई है। नोटिस के अनुसार, यह अखबार किसी भी शहर के किसी भी सेंटर पर आम पाठकों को देखने तक को नहीं मिलता। आरोप है कि इंटरनेट से दूसरे बड़े अखबारों की खबरें अनाधिकृत रूप से चुराकर, ऑपरेटरों के माध्यम से इसकी पीडीएफ (PDF) तैयार कर ली जाती है, ताकि मान्यता का खेल जिंदा रहे।

### **7 दिन का अल्टीमेटम: सबूत दो या जेल जाओ!**

समिति के उपाध्यक्ष के.के. सिंह ने शेखर पंडित को चौतरफा घेरते हुए **सात दिनों के भीतर बिंदुवार स्पष्टीकरण** मांगा है। समिति ने साफ कहा है कि यदि वे खुद को सच्चा पत्रकार साबित करना चाहते हैं, तो:
1. ‘दैनिक जागरण’, ‘हिन्दुस्तान’ या ‘लोक हस्तक्षेप’ से मिली **वेतन पर्ची (Salary Slip), फॉर्म-16 या बैंक ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट** पेश करें।
2. इन अखबारों में अपने नाम से नियमित छपने वाली राज्य मुख्यालय की खबरों (बायलाइन स्टोरीज) के सबूत दें।
### **…तो दर्ज होगी एफआईआर (FIR)**
समिति ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 7 दिनों के भीतर ठोस और कानूनी साक्ष्यों के साथ जवाब नहीं दिया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि सारे आरोप शत-प्रतिशत सही हैं। ऐसी स्थिति में समिति शेखर पंडित की प्राथमिक सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निरस्त करेगी, उनकी अवैध मान्यता को रद्द करने के लिए सूचना विभाग को कड़ी संस्तुति भेजेगी और धोखाधड़ी व जालसाजी के गंभीर मामलों में उनके खिलाफ **कठोर कानूनी कार्रवाई (FIR)** सुनिश्चित करेगी।
अब देखना यह है कि खुद को पत्रकारों का मसीहा बताने वाले शेखर पंडित इस ‘विस्फोटक’ नोटिस के बाद अपनी सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट दिखा पाते हैं या फिर इस बड़े सिंडिकेट के भंडाफोड़ के बाद उन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा!

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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