*## वर्दी की हनक या अधिकारों पर डाका? कठौता चौराहे पर जाम खुलवाने की जगह बसों में 'अदालत' चला रहे टी०एस०आई०##*
*## ऑल यूपी परमिट' पर लखनऊ पुलिस का अपना ही कानून; सवारियों को बंधक बना बयान दर्ज कर रहे टी०एस०आई० सावक कुमार सिंह!##*

*कृष्णानन्द शर्मा*
लखनऊ,कठौता चौराहे पर यातायात पुलिस की मनमानी और दादागीरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। **जाम खुलवाने के लिए तैनात किए गए टीएसआई सावक कुमार सिंह** अपनी मूल ड्यूटी भूलकर, आरटीओ (RTO) के अधिकारों पर डाका डाल रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि यातायात सुचारू रूप से चलाने के बजाय, टीएसआई सावक सिंह बीच सड़क पर बसों को जबरन रोककर सवारियों के बयान दर्ज कर रहे हैं!
*### 🚨 आखिर किसकी शह पर चल रहा है अधिकारों का उल्लंघन?*
नियमों के मुताबिक, वाहनों के पेपर चेक करना, रूट परमिट की जांच करना और सवारियों के बयान लेना **एआरटीओ (ARTIO) या परिवहन विभाग का काम है, न कि किसी टीएसआई का।** ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है:
* आखिर किस हैसियत से टीएसआई सावक सिंह बसों को रोककर सवारियों का बयान ले रहे हैं?
* क्या यातायात पुलिस को अब परिवहन विभाग के सारे अधिकार सौंप दिए गए हैं?
* **अगर यह इनकी ड्यूटी नहीं है, तो इसके पीछे इनकी असली मंशा और लालच क्या है?**
*### 📄 ‘रूट परमिट’ के नाम पर डग्गामारी का खेल!*
जब सरकार पूरे उत्तर प्रदेश के लिए **’ऑल यूपी परमिट’ (All UP Permit)** जारी करती है, तो लखनऊ के भीतर टीएसआई द्वारा अलग से ‘रूट परमिट’ की मांग करना समझ से परे है।
> **बड़ा सवाल:** लखनऊ के भीतर आखिर कितनी गाड़ियां पूरी तरह से रूट परमिट पर चल रही हैं? क्या खुद साहब को ‘डग्गामारी’ की सही परिभाषा भी पता है? जो बात विधानसभा तक में स्पष्ट नहीं हो पाई, उस पर कठौता चौराहे के टीएसआई अपनी अलग ही अदालत चला रहे हैं।
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*### 🔊 जनता पूछ रही है सवाल: जाम हटाना काम या कोई नया तरीका?*
चौराहों पर टीएसआई की तैनाती इसलिए की जाती है ताकि जनता को जाम से मुक्ति मिल सके। लेकिन यहाँ तो टीएसआई खुद ही बसों को रुकवाकर चौराहे पर जाम का कारण बन रहे हैं। विभाग को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए कि आखिर **यातायात नियमों के नाम पर यह कौन सा नया खेल खेला जा रहा है!**
