*शाहगंज:मनरेगा में महाघोटाला: शाहगंज में कागजों पर ‘मजदूर’ बने प्रधान के रिश्तेदार!*
*सरकारी धन पर डाका: जौनपुर में ब्लॉक और प्रधान के सिंडिकेट ने लुटा मनरेगा का बजट!*

*मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की लूट! शाहगंज के ग्राम सभा सिंघाई में भ्रष्टाचार चरम पर, कागजों में ‘मजदूर’ बने प्रधान के रिश्तेदार*
विशेष संवाददाता
जौनपुर, शाहगंज के ग्रामीण इलाकों में गरीबों और मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मनरेगा’ (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना अब भ्रष्टाचार का अड्डा बनती जा रही है। जनपद जौनपुर की शाहगंज तहसील अंतर्गत ग्राम सभा सिंघाई से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी योजनाओं के धन का खुलेआम बंदरबांट किया जा रहा है।
प्राप्त पुख्ता साक्ष्यों और धरातली पड़ताल के अनुसार, ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार कर लाखों रुपये के सरकारी बजट को हड़पने का ‘सिंडिकेट’ चलाया जा रहा है।
*कागजों में रोजगार, धरातल पर सन्नाटा*
सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच ज़मीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। जिन लोगों के नाम पर हर महीने मनरेगा का मस्टर रोल भरकर भुगतान उठाया जा रहा है, उनमें से कई लोग गांव में रहते तक नहीं हैं या फिर पूरी तरह से संपन्न हैं।
फर्जीवाड़े की बानगी देखिए:
* ससुराल और दुकानों में रहने वाले बने मजदूर: डॉ. सोचन (पुत्र फेंकू बिंद) और मीरा कुमारी (पत्नी डॉ. किसुन) जो अपनी ससुराल में रहते हैं, उनके नाम से भी मजदूरी का पैसा निकाला जा रहा है। वहीं, राज कुमार यादव (पुत्र राम भुवाल यादव) जो शाहगंज में दुकान चलाते हैं, उनका नाम भी मनरेगा मजदूरों की सूची में शामिल है।
* प्रधान के रिश्तेदारों की पौ-बारह: भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं नहीं रुकता। प्रधान के अपने चहेतों और रिश्तेदारों को रेवड़ियों की तरह मनरेगा का फंड बांटा जा रहा है। गायत्री (पत्नी संदीप बिंद – प्रधान की भतीजी), नीलम (पत्नी जयप्रकाश बिंद – प्रधान की भतीजी) और विनोद (पुत्र राम भिखारी – प्रधान का भाई) के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी धन आहरित किया जा रहा है।
* संपन्न और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी शामिल: गांव के कोटेदार अजय कुमार (पुत्र जियालाल) के साथ-साथ अनीता (पत्नी प्रभाकर तिवारी) और सुजुल (पुत्र सुरेश तिवारी) जैसे दर्जनों ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें कागजी ‘मजदूर’ बनाकर योजना को चूना लगाया जा रहा है।
ब्लॉक और प्रधान की सांठगांठ से चल रहा ‘सिंडिकेट’
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना प्रशासनिक शह के संभव नहीं है। ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौन सहमति तथा ग्राम प्रधान की सांठगांठ से सैकड़ों फर्जी नामों का सिंडिकेट तैयार किया गया है। हर महीने बिना कोई काम किए डिजिटल मस्टर रोल में हाजिरी दर्ज कराई जाती है और बजट का बंदरबांट कर आपस में बांट लिया जाता है।
कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे प्रकरण के उजागर होने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। वास्तविक पात्र और गरीब मजदूर काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि फर्जी नामों के जरिए सरकारी खजाने को डकारा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर यह फाइल भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।

