*आजमगढ़:हाईकोर्ट के आदेश पर भारी सांठगांठ: आजमगढ़ में 40 एयर सरकारी जमीन पर भू-माफिया का कब्जा, प्रशासन पस्त!*
*बुलडोजर के दावों की खुली पोल: अफसरों और प्रधान की शह पर सरकारी जमीन निगल गए दबंग, अब अवमानना का खतरा!*
*हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा! प्रधान व अधिकारियों की सांठगांठ से बेखौफ भू-माफिया; 40 एयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार*
आज़मगढ़।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही भू-माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और बुलडोजर कार्रवाई का ढिंढोरा पीटती रहे, लेकिन आजमगढ़ जिले की सदर/निजामाबाद तहसील क्षेत्र के ग्राम चकखैरूल्ला में हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहां तहसील से लेकर हाईकोर्ट तक के आदेशों को धता बताकर ग्राम सभा की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा बरकरार है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की शह स्पष्ट नजर आ रही है।
*कोर्ट का बेदखली आदेश भी ‘रद्दी की टोकरी’ में!*
प्राप्त कानूनी दस्तावेजों और तहसील प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम चकखैरूल्ला स्थित गाटा संख्या 69 (क्षेत्रफल 0.040 हेक्टेयर / नवीन परती) और गाटा संख्या 56 (रकबा 40 एयर) की सार्वजनिक भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध रूप से पक्का मकान, बाउंड्रीवाल, और व्यावसायिक खेती (गन्ना व सब्जी) करके कब्जा जमा लिया गया है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रतिवादियों को इस बेदखली का अंतिम आदेश दिया था। कोर्ट ने अवैध निर्माण को ढहाने, बेदखल करने और 1,500 रुपये क्षतिपूर्ति के साथ निष्पादन व्यय वसूलने का स्पष्ट परवाना जारी किया था। इसके बावजूद, प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज तक मौके से कब्जा नहीं हट सका।
*प्रधान, सेक्रेटरी और अफसरों की ‘मिलीभगत’ का खेल*
शिकायतकर्ता हरगोविन्द द्वारा जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस प्रशासन के चक्कर काटने के बाद भी जमीनी स्तर पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और हलका लेखपाल की साठगांठ के कारण कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जब-जब राजस्व व पुलिस की टीमें मौके पर नापी और निशानदेही के लिए पहुंचीं, तब-तब दबंगों ने गाली-गलौज और विवाद कर काम रुकवा दिया। स्थानीय प्रशासन की ढुलमूल नीति ने अवैध कब्जाधारकों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे सरेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
अब हाईकोर्ट के निशाने पर आएंगे लापरवाह अफसर?
राजस्व न्यायालय के आदेश और शिकायतों की अनदेखी के बाद अब यह मामला न्याय के सबसे बड़े दरवाजे यानी माननीय उच्च न्यायालय (High Court) तक पहुंच चुका है। हाईकोर्ट के स्पष्ट रुख के बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा शिथिलता बरतना सीधे तौर पर ‘कोर्ट की अवमानना’ (Contempt of Court) का मामला बनता है।
अब क्षेत्र में यह चर्चा जोर-शोर पर है कि आखिर माननीय हाईकोर्ट का बुलडोजर कब इन भ्रष्ट अधिकारियों और बेखौफ कब्जाधारकों पर चलेगा:
क्या हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागेगा सोया हुआ आजमगढ़ प्रशासन?
क्या अवैध कब्जा कराने वाले ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और जिम्मेदार लेखपाल पर गाज गिरेगी?
क्या कोर्ट की अवमानना करने वाले अफसरों को जेल या निलंबन का सामना करना पड़ेगा?
प्रशासनिक लापरवाही और सांठगांठ के इस ‘विस्फोटक’ मामले पर अब हर किसी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले सख्त कदम पर टिकी हैं।
