# **बस्ती में 'टाइम बम' बना बिजली का ट्रांसफार्मर: मात्र आठ फीट की सड़क पर मौत का पहरा, कभी भी मच सकती है चीख-पुकार!रोड चौड़ीकरण और ट्रांसफार्मर हटाए जाने की मांग**
## **सड़क पर 'खुला करंट', दांव पर बच्चों की जान; बस्ती में बड़े हादसे का इंतजार कर रहा बिजली विभाग!**
*रोड चौड़ीकरण और ट्रांसफार्मर हटाए जाने की मांग*
**बस्ती।** जिला मुख्यालय के करीब मोहल्ला बड़ेबंन से ग्राम मड़वा नगर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ सड़क किनारे असुरक्षित तरीके से लगाया गया एक विद्युत ट्रांसफार्मर राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए ‘टाइम बम’ बना हुआ है। किसी भी वक्त यहाँ कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आँखें मूँदे बैठा है।
### **घटकर 8 फीट रह गया रास्ता, टकरा रहे वाहन**
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ेबंन से मड़वा नगर मार्ग के बीच (रविन्द्र प्रकाश एडवोकेट के घर से आशीष चौधरी के घर तक के हिस्से में) इस ट्रांसफार्मर को बेहद गैर-जिम्मेदाराना ढंग से स्थापित किया गया है। स्थानीय निवासी मनीष कुमार ने बताया कि ट्रांसफार्मर के चारों ओर लगाया गया सुरक्षा जाल (लोहे का घेरा) इस कदर सड़क की तरफ फैला हुआ है कि वहाँ से गुजरने वाले वाहनों के उससे टकराने का जोखिम हर वक्त बना रहता है। गलत स्थान चयन के कारण कभी चौड़ा रहा यह मार्ग अब घटकर महज आठ फीट से भी कम** रह गया है, जिससे आए दिन यातायात बाधित हो रहा है, ऐसे में इस मार्ग का चौड़ीकरण अति आवश्यक है।
### **मासूम बच्चों और राहगीरों की जिंदगी दांव पर**
सड़क संकरी होने और खुले करंट के खतरे के कारण सबसे ज्यादा खतरा स्कूल वैन और साइकिलों से आने-जाने वाले मासूम बच्चों को है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जरा सी चूक किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। इस सकरे व्यस्त मार्ग पर पैदल चलने वाले राहगीर भी हर समय खौफ के साए में सफर करने को मजबूर हैं।
**”यह स्थिति स्थानीय निवासियों और बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। किसी भी समय कोई अनहोनी हो सकती है। हमारी माँग है कि विभाग तत्काल इस पर संज्ञान ले।”**
-*मनीष कुमार, स्थानीय निवासी*
### **उठ रही है तत्काल कार्रवाई की माँग**
मोहल्ले वासियों ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उक्त स्थल का तत्काल स्थलीय निरीक्षण किया जाए। जनता की माँग है कि इस ट्रांसफार्मर को नियमानुसार किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाए, ताकि मार्ग बाधामुक्त हो सके और लोगों को इस ‘अघोषित खतरे’ से मुक्ति मिल सके। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी हादसे का इंतजार करता है या समय रहते जागता है।