**जौनपुर में फूटा भ्रष्टाचार का बम: 'प्रधान-लेखपाल' के चतुष्कोणीय नेक्सस पर DM सख्त, BDO और तहसीलदार से तलब की रिपोर्ट!"**
**शाहगंज में महाघोटाला: मंदिर की भूमि पर भू-माफिया का कब्जा, मनरेगा में लाखों की लूट; DM जौनपुर ने बैठाई ऑनलाइन जांच!"**


जौनपुर जिले की शाहगंज तहसील से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हड़कंप मचा दिया है। ग्रामसभा सिधांई के जागरूक ग्रामीणों ने एकजुट होकर भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी (DM) जौनपुर को एक प्रार्थना पत्र सौंपा है, जिसमें शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगा दिखाने वाले एक **’चतुष्कोणीय गठजोड़’** का पर्दाफाश किया गया है।
इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी महोदय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए **तत्काल ऑनलाइन माध्यम से जांच एवं सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत खंड विकास अधिकारी (BDO) शाहगंज, तहसीलदार शाहगंज और सहायक विकास अधिकारी (ADO) जौनपुर को निर्देशित कर पूरे मामले की विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की गई है।**
## 🚨 *महाघोटाले का सनसनीखेज खुलासा: ‘पुजारी-माफिया-प्रधान-लेखपाल’ का नेक्सस*
शिकायती पत्र में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि ग्रामसभा सिधांई में सरकारी तंत्र, जनप्रतिनिधि और भू-माफिया मिलकर जन-आस्था को कुचलने और सरकारी धन को लूटने का एक बड़ा खेल खेल रहे हैं।
### 1. *आस्था पर बुलडोजर चलाने की तैयारी: मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जा*
ग्रामीणों का आरोप है कि सिधांई गांव में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर की बेशकीमती सरकारी भूमि पर गांव के ही एक तथाकथित फर्जी पुजारी सुरेश तिवारी द्वारा भू-माफियाओं की शह पर अवैध रूप से पक्का मकान निर्माण कराया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध कब्जे को रोकने के बजाय वर्तमान ग्राम प्रधान और स्थानीय हलका लेखपाल मुख्य सूत्रधार (Key Players) बनकर इस खेल को संरक्षण दे रहे हैं।
### 2. *मनरेगा में लाखों का ‘पारिवारिक’ महाघोटाला*
शिकायत में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा (MGNREGA) में हुए एक बड़े वित्तीय गबन का भी भंडाफोड़ किया गया है। आरोप है कि वर्तमान ग्राम प्रधान ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही परिवार, सगे-संबंधियों और मित्रों के नाम पर फर्जी ‘जॉब कार्ड’ जारी कर रखे हैं। धरातल पर बिना कोई काम कराए या सिर्फ कागजों पर फर्जी मस्टरोल भरकर विगत कई वर्षों से सरकारी बजट के लाखों रुपयों की खुली लूट मचाई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि ब्लॉक मुख्यालय स्तर से सिधांई गांव की मनरेगा लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक कर दी जाए, तो यह पारिवारिक घोटाला पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।
### 3. “*कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा…” – लेखपाल की खुली चुनौती और काली कमाई*
इस पूरे मामले में स्थानीय लेखपाल की भूमिका सबसे ज्यादा विवादों में है। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय फर्जी पुजारी सुरेश तिवारी की खुलकर वकालत की। उसने ग्रामीणों पर अवैध रूप से कब्जाई गई भूमि को वैध घोषित करने के लिए ‘अनापत्ति पत्र’ (NOC) पर जबरन हस्ताक्षर कराने का कुत्सित प्रयास किया। जब जागरूक ग्रामीणों ने साइन करने से मना कर दिया, तो लेखपाल ने सरेआम ग्रामीणों के सामने फर्जी पुजारी को आश्वस्त करते हुए कहा, **”आपका कब्जा बरकरार रहेगा, कोई कुछ नहीं उखाड़ पाएगा।”** लेखपाल के इस भ्रष्ट आचरण और उसकी अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) की विजिलेंस जांच की मांग अब जोर पकड़ चुकी है।
## 🔥 *ग्रामीणों की हुंकार: ‘बुलडोजर’ एक्शन और फॉरेंसिक जांच की मांग*
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के सामने अपनी मुख्य मांगें बेहद कड़े शब्दों में रखी हैं:
* **मंदिर भूमि विवाद:** अवैध निर्माण को तुरंत रुकवाकर ‘बुलडोजर’ द्वारा अतिक्रमण ध्वस्त किया जाए और प्राचीन मंदिर की भूमि को पूरी तरह मुक्त कराया जाए।
* **मनरेगा घोटाला:** जॉब कार्ड धारकों की सूची सार्वजनिक कर ग्राम प्रधान के वित्तीय खातों की गहन ‘फॉरेंसिक जांच’ कराई जाए।
* **लेखपाल पर गाज:** भू-माफिया को संरक्षण देने वाले भ्रष्ट लेखपाल को तत्काल निलंबित किया जाए और उसकी आय से अधिक संपत्ति की विजिलेंस जांच हो।
*## ⚡ एक्शन में प्रशासन: ऑनलाइन मांगी गई रिपोर्ट*
इस विस्फोटक शिकायत पत्र के बाद जिलाधिकारी जौनपुर ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। शासकीय धन की लूट और जन-आस्था से खिलवाड़ के इस मामले में त्वरित गति से **ऑनलाइन माध्यम से जांच शुरू कर दी गई है। खंड विकास अधिकारी (BDO) शाहगंज को मनरेगा घोटाले की जांच, तहसीलदार शाहगंज को मंदिर भूमि और लेखपाल के आचरण की जांच, तथा सहायक विकास अधिकारी (ADO) जौनपुर को पूरे मामले की संयुक्त आख्या जल्द से जल्द प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।**
अब देखना यह होगा कि इस ‘चतुष्कोणीय गठजोड़’ पर प्रशासन का चाबुक कितनी जल्दी चलता है और क्या ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है! सिधांई गांव के इस महाघोटाले की परतें जैसे-जैसे खुलेंगी, कई बड़ी मछलियों का फंसना तय माना जा रहा है।