**लोक भवन में 'बर्थडे ब्लास्ट': सरकारी मसनद पर केक और मंत्रोच्चार, सुरक्षा राम भरोसे!**
* **सत्ता के केंद्र में 'पिकनिक': जब सरकारी प्रेस रूम बना 'हैप्पी बर्थडे' का अड्डा, उठे तीखे सवाल!**




# **लोक भवन या ‘बर्थडे पैलेस’? जब सत्ता के शीर्ष केंद्र में गूंजा ‘हैप्पी बर्थडे’, सुरक्षा और गरिमा पर उठे विस्फोटक सवाल!**
**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश की सत्ता का सबसे सुरक्षित और गरिमामयी केंद्र ‘लोक भवन’ इन दिनों जनहित के फैसलों के बजाय एक अजीबो-गरीब विवाद को लेकर सुर्खियों में है। मामला लोक भवन के उस मीडिया सेंटर का है, जिसे पत्रकारों के लिए समाचार संकलन और सरकारी ब्रीफिंग के उद्देश्य से आवंटित किया गया था। लेकिन बीते दिनों जो कुछ वहां हुआ, उसने इस संवेदनशील सरकारी परिसर को एक ‘व्यक्तिगत पिकनिक स्पॉट’ में तब्दील कर दिया।
### **मंत्रोच्चार के साथ कटा केक, सज गई व्यक्तिगत महफिल**
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप उपाध्याय का जन्मदिन लोक भवन के मीडिया सेंटर के भीतर बेहद धूमधाम से मनाया गया। जिस मंच का उपयोग गंभीर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने के लिए होता है, वहां उस दिन बकायदा मंत्रोच्चार गूंज रहा था। पत्रकार श्री पंडित सुमंत शुक्ल ने पूरे विधि-विधान से मंत्र पढ़कर प्रदीप उपाध्याय को आशीर्वाद दिया।
इस ‘हाई-प्रोफाइल’ व्यक्तिगत समारोह में शहर के कई जाने-माने चेहरे और पत्रकारों का जमावड़ा लगा रहा, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
* श्री शेखर श्रीवास्तव
* श्रीमती दया विष्ट
* श्रीमती अमिता मिश्रा
* श्री राजू रफ्तार
* श्री उमेश कुमार मिश्र
* श्री शशि नाथ दूबे
* श्री दिलीप शुक्ल
* श्री परमजीत सिंह
* श्री अशोक चकलादर
* श्री त्रिनाथ शर्मा
* श्री अमरीश शर्मा
इन सभी दिग्गजों ने मिलकर लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर के भीतर व्यक्तिगत उत्सव का जमकर लुत्फ उठाया और सरकारी मर्यादाओं को ताक पर रख दिया।
### **बड़ा सवाल: जब सीएम और मंत्री नहीं मनाते, तो पत्रकारों को यह खुली छूट क्यों?**
इस भव्य और अनधिकृत आयोजन के बाद अब सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच एक बेहद तीखा और विस्फोटक सवाल तैरने लगा है:
> **”क्या कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री, किसी कैबिनेट मंत्री या शासन के किसी शीर्ष आईएएस-आईपीएस अधिकारी ने आज तक अपना जन्मदिन मनाने के लिए लोक भवन का उपयोग किया है?”**
जवाब है—**कदापि नहीं!** जब सूबे के सर्वेसर्वा और नियम-कानून तय करने वाले राजनेता या शीर्ष अफसर कभी लोक भवन जैसी अति-संवेदनशील जगह पर अपनी निजी खुशियां नहीं मनाते, तो फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दम भरने वाले इन तथाकथित पत्रकारों को यह खुली छूट किसने और क्यों दी?
### **प्रेस सेंटर या ‘परमानेंट’ इवेंट वेन्यू? सुरक्षा व्यवस्था तार-तार**
इस घटना ने सीधे तौर पर लोक भवन की सुरक्षा और सूचना विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
* **क्या मीडिया सेंटर अब ‘पार्टी हॉल’ है?** सरकार ने करोड़ों की लागत से इस भव्य मीडिया सेंटर का निर्माण इसलिए कराया था ताकि पत्रकार वहां बैठकर जनहित की खबरें लिख सकें, न कि केक काटने और मंत्रोच्चार के साथ निजी महफिलें सजाने के लिए।
* **कहां सो रही थी सुरक्षा एजेंसियां?** क्या सूचना विभाग और लोक भवन की सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि कोई भी वीआईपी परिसर के भीतर आकर निजी पार्टी आयोजित कर ले और किसी को कानों-कान खबर न हो?
### **कड़े एक्शन की मांग: एलआईयू और शीर्ष अधिकारियों को हस्तक्षेप की जरूरत**
इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद अब मांग उठ रही है कि अपर मुख्य सचिव (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) **श्री संजय प्रसाद** और निदेशक **श्री विशाल सिंह** इस मामले को गंभीरता से लें। लोक भवन और एनेक्सी सुरक्षा के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर इन तथाकथित पत्रकारों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। अगर आज लगाम नहीं कसी गई, तो ये गैरजिम्मेदार लोग लोकतंत्र के इन पवित्र स्थानों को ‘चिड़ियाघर’ बनाकर रख देंगे। इस पूरे मामले में स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की शिथिलता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें ऐसे संवेदनशील परिसरों में हर गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होती है।
**ब्यूरो रिपोर्ट:**
इस विस्फोटक खुलासे के बाद अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस घोर अनुशासनहीनता का संज्ञान लेकर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई करता है, या फिर लोक भवन का यह मीडिया सेंटर यूं ही रसूखदारों के लिए ‘बर्थडे पैलेस’ बना रहेगा? **’नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क’** अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और जांबाज स्ट्रिंगर्स के जरिए ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रख रहा है। लोकतंत्र के सभी स्तंभों की लोकप्रियता, पारदर्शिता और गरिमा को बनाए रखने के लिए हम ऐसे चेहरों को बेनकाब करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध हैं।