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**यूपी के पत्रकारिता इतिहास में नया अध्याय: संयोजक प्रभात त्रिपाठी के नेतृत्व में गूंजी उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की सिंहगर्जना!**

**२५ करोड़ की आबादी वाले राज्य में पत्रकारों की सबसे बुलंद आवाज; उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी का ऐतिहासिक महाशंखनाद!**

*# ऐतिहासिक उपलब्धि: हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्ष और उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का शंखनाद*

**विशेष संवाददाता**
**लखनऊ।**

*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम”*

भारतीय चेतना, स्वाधीनता आंदोलन और आधुनिक समाज के निर्माण की संवाहक रही ‘हिंदी पत्रकारिता’ ने अपने गौरवशाली इतिहास के २०० वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक और युगांतरकारी अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भव्य और विचारोत्तेजक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक संगोष्ठी **पुनर्गठित उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति** के तत्वावधान में संपन्न हुई, जिसके मुख्य सूत्रधार, मार्गदर्शक और संयोजक वरिष्ठ पत्रकार **श्री प्रभात त्रिपाठी जी** रहे।
पुनर्गठित समिति के इस प्रथम वृहद वैचारिक समागम ने न केवल हिंदी पत्रकारिता के दो दशकों के स्वर्णिम सफर, संघर्षों और उपलब्धियों पर गहरा मंथन किया, बल्कि वर्तमान डिजिटल युग में पत्रकारों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक सशक्त रोडमैप भी तैयार किया। संगोष्ठी में देश और प्रदेश के कोने-कोने से आए प्रख्यात संपादकों, वरिष्ठ पत्रकारों, विचारकों और नीति-निर्धारकों ने शिरकत की। पूरे आयोजन के दौरान समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी का दूरदर्शी नेतृत्व, पत्रकारों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और हिंदी भाषाई पत्रकारिता के प्रति उनका अगाध सम्मान स्पष्ट रूप से प्रतिध्वनित हुआ।
## १. संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ और वैचारिक पृष्ठभूमि
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि, विशिष्ट बुद्धिजीवियों और पुनर्गठित समिति के संयोजक श्री प्रभात त्रिपाठी जी, महासचिव **श्री ज्ञानेश पाठक जी**, उपाध्यक्ष **श्री के. के. सिंह जी**, वरिष्ठ पत्रकार **श्री अमरेंद्र सिंह जी** व **श्री रूपेंद्र उपाध्याय जी** द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और ‘मां सरस्वती’ के वंदन के साथ हुआ।
३० मई १८२६ को पंडित युगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित प्रथम हिंदी साप्ताहिक पत्र **’उदन्त मार्तण्ड’** की यात्रा से शुरू होकर आज के मल्टीमीडिया और एआई (AI) युग तक की हिंदी पत्रकारिता की विकास यात्रा को एक वृत्तचित्र (Documentary) के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अत्यंत सारगर्भित और भावुक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा:
> “हिंदी पत्रकारिता केवल समाचारों के प्रेषण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा की आवाज है। आज जब हमारी पत्रकारिता २००वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, तब पुनर्गठित उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का यह दायित्व है कि वह पत्रकारिता के उन मूल आदर्शों की रक्षा करे और साथ ही ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले संवाददाताओं को एक सुरक्षित व सम्मानित परिवेश प्रदान करे।”
>
## २. पुनर्गठित समिति की एकजुटता और सशक्त नेतृत्व
इस संगोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसने उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पुनर्गठन के बाद अपनी सांगठनिक शक्ति, एकजुटता और अद्वितीय समन्वय क्षमता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। पिछले कुछ समय से पत्रकारों के हितों, उनकी सुरक्षा और मान्यता संबंधी विसंगतियों को लेकर जो शून्यता बनी हुई थी, उसे श्री प्रभात त्रिपाठी के नेतृत्व में पूरी कोर टीम ने मिलकर समाप्त कर दिया है।
मंच पर समिति के पदाधिकारियों—महासचिव **ज्ञानेश पाठक**, उपाध्यक्ष **के. के. सिंह**, संयुक्त सचिव **अर्चना गुप्ता** एवं संयुक्त सचिव **राजू यादव** की सक्रियता और तालमेल देखते ही बनती थी। विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में स्वीकार किया कि प्रभात त्रिपाठी ने दलगत राजनीति और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को एक मंच पर लाने का भगीरथ प्रयास किया है। उनकी समन्वयवादी नीति का ही परिणाम था कि इस संगोष्ठी में न केवल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दिग्गज शामिल हुए, बल्कि न्यू मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े पत्रकारों को भी समान महत्व और सम्मान दिया गया।
## ३. मुख्य वैचारिक सत्र: “२०० वर्षों की यात्रा और चुनौतियां”
संगोष्ठी के मुख्य सत्र में **”हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्ष: राष्ट्र निर्माण से कॉरपोरेट युग और विश्वसनीयता का संकट”** विषय पर गंभीर विमर्श हुआ। इस महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार **श्री शुक्ला जी** ने हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्षों के सफर पर अपने गहन और व्यावहारिक विचार रखे।
> **अध्यक्षीय उद्बोधन (श्री शुक्ला जी):**
> “२०० वर्षों का यह मील का पत्थर हमें हमारे गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है, लेकिन साथ ही यह समय आत्मनिरीक्षण का भी है। पत्रकारिता की साख और उसकी शुचिता को बचाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है और उत्तर प्रदेश की यह पुनर्गठित समिति इस दिशा में एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।”
>
विमर्श के दौरान समिति के वरिष्ठ सदस्यों और कार्यकारिणी के साथियों का पक्ष बेहद प्रखर रहा:
* **स्वाधीनता आंदोलन से आज तक का सफर:** वक्ताओं ने याद दिलाया कि कैसे हिंदी पत्रकारिता ने पराधीन भारत में क्रांतिकारियों की वाणी बनकर ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं।
* **बाजारवाद और कॉरपोरेटिकरण का दबाव:** इस विमर्श पर हस्तक्षेप करते हुए संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने समिति का पक्ष रखते हुए कहा कि बाज़ार के दबावों के बीच भी हिंदी पत्रकारिता का आम जनमानस से जुड़ाव कम नहीं हुआ है। अंग्रेजी मीडिया की तुलना में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के पत्रकार आज भी धूल, धूप और ज़मीन पर रहकर सच को सामने ला रहे हैं।
* **वैचारिक सहभागिता:** विमर्श को समृद्ध करने में कार्यकारिणी सदस्य **सुरेन्द्र दुबे**, **सियाराम यादव**, **धनंजय सिंह** और **सुभाष मिश्र** कार्यकारिणी सदस्य विवेक शुक्ला ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन वरिष्ठ साथियों ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए खोजी और नैतिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
## ४. पत्रकार सुरक्षा और कल्याण: समिति का ऐतिहासिक घोषणा पत्र
संगोष्ठी मात्र एक अकादमिक विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि श्री प्रभात त्रिपाठी की कार्ययोजना और महासचिव ज्ञानेश पाठक के सांगठनिक सहयोग से इसे पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई का एक ठोस मंच बनाया गया। संगोष्ठी के उत्तरार्ध में पुनर्गठित उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की ओर से एक **’ऐतिहासिक संकल्प पत्र’** प्रस्तुत किया गया, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित किया।
इस संकल्प पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
* **पत्रकार सुरक्षा कानून (Journalist Protection Act):** उत्तर प्रदेश में फील्ड पर काम करने वाले संवाददाताओं पर बढ़ते हमलों और उत्पीड़न को रोकने के लिए राज्य में एक सख्त पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग सरकार से की जाएगी।
* **मान्यता प्रक्रियाओं का सरलीकरण:** जिला से लेकर राज्य मुख्यालय स्तर तक मान्यता (Accreditation) की प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और त्वरित बनाया जाए, ताकि वास्तविक पत्रकारों को उनका हक मिल सके और बिचौलियों का अंत हो।
* **आवास और स्वास्थ्य बीमा:** सभी मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना और सुलभ आवासीय योजनाओं की व्यवस्था के लिए समिति सरकार के साथ निरंतर संवाद और दबाव की नीति अपनाएगी।
* **गैर-मान्यता प्राप्त और तहसील स्तर के पत्रकारों को संबल:** हालांकि यह समिति मान्यता प्राप्त पत्रकारों की है, लेकिन नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि समिति ग्रामीण और तहसील स्तर के उन पत्रकारों की आवाज भी बनेगी जो बिना किसी सुरक्षा के सबसे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं।
## ५. देश के शीर्ष पत्रकारों द्वारा प्रयासों की सराहना
संगोष्ठी में आए विशिष्ट अतिथियों, वरिष्ठ संपादकों और मीडिया विश्लेषकों ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पुनर्गठन और उसके बाद इस तरह के बड़े आयोजन के लिए प्रभात त्रिपाठी और उनकी पूरी टीम की खुले दिल से सराहना की।
वरिष्ठ पत्रकार **अमरेंद्र सिंह** और **रूपेंद्र उपाध्याय** ने अपने संयुक्त संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता हमेशा से देश की राजनीति और पत्रकारिता की दिशा तय करती रही है। ऐसे समय में जब पत्रकारों की आवाज को बिखेरने की कोशिशें हो रही हों, प्रभात त्रिपाठी जैसे जुझारू और संवेदनशील व्यक्तित्व का नेतृत्व में आना और ज्ञानेश पाठक जैसी सांगठनिक शक्ति का साथ मिलना उत्तर प्रदेश के पत्रकार जगत के लिए एक शुभ संकेत है।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रमुख चेहरों ने कहा कि संयुक्त सचिव अर्चना गुप्ता और राजू यादव सहित कार्यकारिणी के सदस्यों सुरेन्द्र दुबे, सियाराम यादव, धनंजय सिंह व सुभाष मिश्र सदस्य विवेक शुक्ला की सक्रिय भागीदारी यह सिद्ध करती है कि पुनर्गठित समिति सही हाथों में है और आने वाले समय में पत्रकारों के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
## ६. सम्मान समारोह: हिंदी पत्रकारिता के पुरोधाओं का वंदन
संगोष्ठी के एक अत्यंत भावुक और गरिमामयी सत्र में, पुनर्गठित समिति द्वारा हिंदी पत्रकारिता में अपना संपूर्ण जीवन खपा देने वाले उत्तर प्रदेश के १० वरिष्ठ और वयोवृद्ध पत्रकारों को **’हिंदी पत्रकारिता गौरव सम्मान’** से विभूषित किया गया।
शॉल, स्मृति चिह्न और सम्मान राशि भेंट कर इन मनीषियों का सम्मान करते हुए संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया। प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि *”इन बुजुर्ग पत्रकारों का संघर्ष ही हमारी पूंजी है। हम इनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही नई पीढ़ी के पत्रकारों को संस्कारित और निडर बना सकते हैं।”* इस दृश्य ने वहां उपस्थित समस्त जनसमूह को उद्वेलित कर दिया और पूरा सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा।
## ७. उपसंहार और भविष्य का रोडमैप: धन्यवाद ज्ञापन
संगोष्ठी के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के संयोजक श्री प्रभात त्रिपाठी और महासचिव ज्ञानेश पाठक ने देश भर से आए अतिथियों, सहयोगियों और पत्रकार साथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने घोषणा की कि आने वाले महीनों में समिति उत्तर प्रदेश के विभिन्न संभागों (Divisions) में जाकर क्षेत्रीय पत्रकारों की समस्याओं को सुनेगी और लखनऊ में एक **’केंद्रीय पत्रकार सहायता प्रकोष्ठ’** की स्थापना की जाएगी, जो किसी भी पत्रकार के साथ होने वाले उत्पीड़न या आकस्मिक संकट के समय २४ घंटे सक्रिय रहेगा।
यह संगोष्ठी इस मायने में मील का पत्थर साबित हुई कि इसने हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्षों के गौरव को याद करते हुए, वर्तमान और भविष्य के लिए एक अत्यंत मजबूत सांगठनिक नींव रखी। पूरे आयोजन में श्री प्रभात त्रिपाठी का कुशल प्रबंधन, वैचारिक स्पष्टता और पत्रकारों के प्रति अटूट निष्ठा अग्रगामी रही। संगोष्ठी की भव्य सफलता ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि पुनर्गठित उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति अब राज्य के पत्रकारों की सबसे बुलंद, प्रामाणिक और निर्भीक आवाज बन चुकी है।
राष्ट्रगान के सामूहिक गान के साथ इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ, जिसने उत्तर प्रदेश के पत्रकारिता इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

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कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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