**प्रतापगढ़ ब्रेकिंग:खाकी पर दाग: दर्जनों मुकदमों वाले गैंगस्टर पर पुलिस मेहरबान, पीड़ित ने लगाई SSP से गुहार!**
**सांगीपुर में कानून तार-तार! हत्या के प्रयास के आरोपियों को बचाने में जुटी पुलिस?**




*## सनसनीखेज खुलासा: दर्जनों मुकदमों वाले बेखौफ हिस्ट्रीशीटरों को बचा रही है पुलिस? पीड़ित ने लगाई कप्तान से गुहार*
**ब्यूरो रिपोर्ट-प्रतापगढ़।**
कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक और जीता-जागता सबूत सामने आया है। मामला सांगीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां एक पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
*### हत्या के प्रयास के बाद भी पुलिस की ‘मेहरबानी*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सांगीपुर थाना क्षेत्र में विगत दिनों पहले प्रशांत मिश्र नामक एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। इस मामले में पुलिस ने धारा 308 (हत्या का प्रयास) जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई छोटे-मोटे अपराधी नहीं, बल्कि इलाके के कुख्यात अपराधी हैं।
*### दर्जनों मुकदमों वाले ‘गैंगस्टर’ को किसका संरक्षण?*
पीड़ित प्रशांत मिश्र का आरोप है कि जिन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, उनका लंबा आपराधिक इतिहास है।
* आरोपियों पर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं।
* ये अपराधी इलाके के हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर हैं।
* इन पर पहले से ही हत्या (302), लूट और छिनैती जैसे दर्जनों संगीन मामले चल रहे हैं।
इतना बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड होने के बाद भी थाना प्रभारी (SHO) त्रिवेदी द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी न करना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि पुलिस एक खूंखार हिस्ट्रीशीटर को छूने से भी कतरा रही है?
> **”कप्तान साहब ही करेंगे इंसाफ!”**
> स्थानीय पुलिस की इस ढीली कार्रवाई और टालमटोल से तंग आकर अब पीड़ित प्रशांत मिश्र पुत्र स्व०श्री जगदीश प्रसाद मिश्र ने सीधे जिले के पुलिस कप्तान (SP) का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। पीड़ित ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और एफआईआर की कॉपी उच्चाधिकारियों को भेज दी है, ताकि इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर बेखौफ घूम रहे अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
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अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिले के आला अधिकारी क्या कड़ा रुख अपनाते हैं और सांगीपुर पुलिस की इस लापरवाही पर क्या गाज गिरती है!
