*"माता रानी धूप में, पुजारी जी महल में! जौनपुर में देवस्थान की जमीन पर 'भतीजा कल्याण योजना' चालू, सो रहा प्रशासन।"**
## *"गाटा संख्या 414 पर 'दिव्य' कब्ज़ा: मंदिर की जमीन पर खिंच गई दीवार, आस्था के आंगन में बह रहा टॉयलेट का पानी!"**

*# ख़ास रिपोर्ट: आदरणीय पुजारी जी का ‘दिव्य’ कब्ज़ा, क्या अब गर्भगृह में ही बनेगा बेडरूम?*
**शाहगंज (जौनपुर)।**
कहते हैं भगवान कण-कण में हैं, लेकिन जौनपुर के शाहगंज तहसील के ग्राम सिंघाई में रहने वाले तथाकथित पुजारी जी ने इस परिभाषा को थोड़ा और ‘अपग्रेड’ कर दिया है। उनके लिए भगवान अब सिर्फ कण-कण में नहीं, बल्कि गाटा संख्या 414 की कई लाख रुपये की कीमती जमीन के ईंट, गारे और सीमेंट में भी वास कर रहे हैं!
ग्राम सिंघाई में मां दुर्गा के देवस्थान पर इन दिनों आस्था की नहीं, बल्कि ‘अवैध निर्माण’ की बयार बह रही है। आरोप है कि मंदिर की देखरेख के लिए रखे गए तथाकथित पुजारी जी को अचानक दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ कि माता रानी को खुले आसमान के नीचे रखकर खुद के और अपने भतीजे के लिए आलीशान भवन खड़ा कर लेना ही असली ‘राजधर्म’ है।
*### टॉयलेट का ‘पवित्र’ पानी और सोता हुआ प्रशासन*
हद तो तब हो गई जब देवस्थान की मर्यादा को ताक पर रखकर वहां गंदगी का साम्राज्य फैला दिया गया। जिस परिसर में श्रद्धालु सिर झुकाते हैं, वहां कथित तौर पर टॉयलेट का पानी और तमाम प्रकार की गंदगी बह रही है। यह सब कुछ किसी जंगल में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुस्तैद शासन और शाहगंज तहसील प्रशासन की नाक के ठीक नीचे हो रहा है। लेकिन मजाल है कि प्रशासन की ‘कुंभकरणी नींद’ टूट जाए! शायद अधिकारी इस इंतजार में हैं कि खुद माता रानी त्रिशूल लेकर आएं और अवैध कब्जा हटाकर जाएं, क्योंकि फाइलों के देवता तो अभी मौन व्रत पर हैं।
*## संविधान का कौन सा अनुच्छेद देता है ‘कब्जे’ का अधिकार?*
अब आते हैं आपके उस यक्ष प्रश्न पर कि आखिर इस तथाकथित पुजारी को यह अधिकार किसने दिया? भारत के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को लेकर बेहद स्पष्ट नियम हैं:
* **अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता):** यह देश के हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार देता है। लेकिन, **यह किसी व्यक्ति (पुजारी या प्रबंधक) को मंदिर की सार्वजनिक या देवस्थान की जमीन को अपनी निजी संपत्ति बनाने का अधिकार कतई नहीं देता।**
* **कानूनी स्थिति (देवता एक ‘विधिक व्यक्ति’ हैं):** भारतीय कानून के मुताबिक, मंदिर की जमीन का असली मालिक वहां के आराध्य देव (इस मामले में मां दुर्गा) होते हैं। पुजारी सिर्फ एक ‘सेवक’ या ‘प्रबंधक’ (Manager) होता है। उसे मंदिर की एक इंच जमीन भी अपने या अपने रिश्तेदारों के नाम करने या उस पर निजी मकान/शौचालय बनाने का कोई कानूनी हक नहीं है।
> ** संविधान के किसी अनुच्छेद में यह नहीं लिखा है कि “पुजारी जी मंदिर की जमीन पर अपने भतीजे का बंगला तान सकते हैं।” अगर ऐसा कोई कानून है, तो शाहगंज तहसील के अधिकारियों को वह गुप्त पन्ना जनता के सामने जरूर उजागर करना चाहिए!
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*## जनता की पुकार: जागिए हुजूर, वरना देर हो जाएगी!*
एक तरफ सूबे के मुखिया का सख्त निर्देश है कि धार्मिक स्थलों और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, वहीं दूसरी तरफ सिंघाई गांव में आस्था को मलबे तले दबाया जा रहा है। कोई सुनने वाला नहीं है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
क्या शाहगंज का तहसील प्रशासन और थाना पुलिस इस मामले पर संज्ञान लेकर गाटा संख्या 414 को इस ‘कथित बाबा’ और उनके भतीजे के चंगुल से मुक्त कराएगी? या फिर कागजी कार्रवाई की चादर तानकर सोती रहेगी? जवाब का इंतजार सिंघाई की जनता और मां दुर्गा के भक्त बेसब्री से कर रहे हैं।
