**योगी सरकार के खिलाफ बड़ी साजिश, कैमरे की आड़ में देशद्रोह का खेल!**
**पत्रकारिता के चोले में ISI का स्लीपर सेल: यूपी में बड़ा खुलासा!**

**लखनऊ।**
उत्तर प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और विस्फोटक खबर सामने आ रही है। सुरक्षा एजेंसियों और शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से हुए एक बड़े खुलासे ने राजधानी से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है।
प्राप्त पुख्ता जानकारी के आधार पर, पत्रकारिता की पवित्र आड़ में देश की जड़ों को खोखला करने वाले एक ऐसे **‘अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट’** का पर्दाफाश हुआ है, जिसके निशाने पर सीधे तौर पर हमारी सनातन संस्कृति और देश की आंतरिक सुरक्षा है।
*### ‘मिशन उत्तर प्रदेश’ पर सीमा पार के आका: ISI और बांग्लादेशी नेटवर्क*
खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में एक ऐसा खतरनाक कॉकटेल सक्रिय है जिसे सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी **ISI और बांग्लादेश के भारत-विरोधी संगठनों** से संचालित किया जा किया जा रहा है। जिस तरह देश में अवैध मदरसों को विदेशों से बेहिसाब फंडिंग भेजी जाती है, ठीक उसी तर्ज पर इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के मुखिया को सीधे विदेशी बैंक खातों और हवाला के जरिए मोटी रकम ट्रांसफर की जा रही है। इस फंडिंग का एकमात्र मकसद है—**उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर ‘स्लीपर सेल्स’ को पालना और उन्हें मुख्यधारा में स्थापित करना।**
### JNU का ‘वामपंथी कनेक्शन’ और योगी सरकार को अस्थिर करने की साजिश
इस पूरे खेल का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब इसके तार **जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कट्टर वामपंथी गुटों** से जुड़े पाए गए। यह पूरा सिंडिकेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और उनके द्वारा राष्ट्रविरोधी तत्वों पर की गई सख्त कार्रवाई से बुरी तरह बौखलाया हुआ है।
*अति-गोपनीय ठिकानों की रेकी:*
यह कोई साधारण दुष्प्रचार गैंग नहीं है। सूत्रों का दावा है कि पत्रकार का मुखौटा पहने इस गिरोह के लोग **लोक भवन, मुख्यमंत्री आवास और राजभवन** जैसी अति-संवेदनशील और सुरक्षित जगहों पर कैमरे लेकर बेखौफ घूम रहे हैं। इनका मकसद वहां की पल-पल की गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर सीधे सीमा पार अपने आकाओं को भेजना है।
*### ‘रसूख’ की आड़ में फंडिंग का गंदा खेल: मंत्रियों के साथ फोटो का सच*
यह सिंडिकेट कितना शातिर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका मुख्य सरगना सरकार के रसूखदार मंत्रियों (जैसे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक व अन्य वरिष्ठ नेताओं) के इर्द-गिर्द मंडराता रहता है।
1. **पहला कदम:** वह चालाकी से मंत्रियों और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तस्वीरें खिंचवाता है।
2. **दूसरा कदम:** इन तस्वीरों को डिजिटल माध्यम से तुरंत पाकिस्तान और बांग्लादेश में बैठे अपने आकाओं को भेजा जाता है।
3. **तीसरा कदम:** इन तस्वीरों को ‘अथॉरिटी और रसूख’ के सबूत के तौर पर दिखाकर विदेशों से करोड़ों की नई फंडिंग ऐंठी जाती है, ताकि भारत में मौजूद उनके स्लीपर सेल्स (जो पत्रकार बनकर घूम रहे हैं) का खर्च चलाया जा सके।
### अब आर-पार की लड़ाई: देशव्यापी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की मांग
योगी सरकार द्वारा मदरसों के सिंडिकेट को ध्वस्त किए जाने के बाद, अब इस तथाकथित पत्रकारिता संगठन के खिलाफ देश के प्रबुद्ध वर्ग और सुरक्षा विशेषज्ञों ने मोर्चा खोल दिया है। शासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से मांग की जा रही है कि:
* **तत्काल मान्यता रद्द हो:** जिला स्तर से लेकर राज्य मुख्यालय स्तर तक, इस देशविरोधी गिरोह और इनके स्लीपर सेल्स को दी गई तमाम सरकारी पत्रकारिता मान्यताओं (Accreditation) को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
* **मंत्रियों को सख्त निर्देश:** सरकार के सभी मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी हों कि वे कैमरे और आईडी कार्ड की आड़ में घूमने वाले ऐसे संदिग्ध तत्वों से तुरंत दूरी बनाएं।
* **CBI और NIA की संयुक्त जांच:** इस पूरे मामले की कमान देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों—**CBI और NIA** को सौंपी जाए। बाकायदा एक हाई-पावर केंद्रीय कमेटी का गठन हो जो इस बात की जांच करे कि लखनऊ और यूपी के अन्य जिलों में ऐसे कितने संगठन सक्रिय हैं।
**विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ‘आईना’ जैसे संदिग्ध और छद्म संगठनों की सबसे पहले और सबसे गहन जांच होनी चाहिए**, ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बदनाम करने वाले और सनातन संस्कृति के खिलाफ साजिश रचने वाले इन सफेदपोश आतंकवादियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।