# **भंडारे में 'सियासी बारूद'! कतिल-अब्दुल वहीद का सनातनी मुखौटा बेनकाब, ACS संजय प्रसाद को फंसाने की बड़ी साजिश!**
## **आस्था पर 'सपा' का कब्जा या विदेशी साजिश? कतिल शेखर और अब्दुल वहीद के 'भंडारा कांड' से लखनऊ के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप!**





# **सनातनी आस्था पर ‘राजनैतिक’ सर्जिकल स्ट्राइक? हनुमान जी के भंडारे को बनाया अखाड़ा, सपा प्रमुख की एंट्री के पीछे गहरी साजिश की बू!**
**लखनऊ।**उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आस्था के पावन पर्व ‘बड़ा मंगल’ पर आयोजित एक भंडारे को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल आ गया है। हनुमान जी के प्रसाद वितरण के एक पवित्र धार्मिक कार्यक्रम को पूरी तरह से राजनैतिक रंग में तब्दील करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने धनबल और कुछ चुनिंदा पत्रकारों के माध्यम से सनातन धर्म के इस पावन आयोजन को ‘हाईजैक’ करने का प्रयास किया है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक गहरी सोची-समझी साजिश, प्रशासनिक अधिकारियों को फंसाने के जाल और विदेशी फंडिंग तक की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
### **पर्दे के पीछे का खेल: ‘नाममात्र के हिंदू चेहरे, असली रिमोट कंट्रोल कहीं और’**
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे भंडारे का ताना-बाना जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ, लखनऊ के कुछ चेहरों—**कतिल शेखर, अब्दुल वहीद और जुबेर अहमद**—द्वारा बुना गया था, जो राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं।
आरोप है कि इन तथाकथित पत्रकारों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मोटी रकम (धन) लेकर इस भंडारे का आयोजन किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मीडिया संगठन के संरक्षक और अधिकांश मुख्य पदाधिकारी एक विशेष वर्ग से आते हैं, जबकि हिंदुओं को केवल नाममात्र के पदों पर ‘मुखौटे’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी का फायदा उठाकर सपा प्रमुख ने सनातन आस्था के मंच का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किया।
### **प्रसाद वितरण में ‘प्रेसवार्ता’ का तड़का और अकूत संपत्ति का ‘मास्टरमाइंड’ कनेक्शन**
धार्मिक भंडारे में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नजारा तब देखने को मिला, जब वहां अचानक अखिलेश यादव ने बकायदा एक **प्रेसवार्ता** (Media Briefing) शुरू कर दी। भक्ति के माहौल को पूरी तरह से चुनावी और राजनैतिक अखाड़े में बदल दिया गया।
इस पूरे खेल में **कतिल शेखर और अब्दुल वहीद** जैसे पत्रकारों का नाम अब प्रमुखता से उभर रहा है। आरोप है कि इन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित की थी। अब उसी ‘एहसान’ की कीमत ये लोग वफादारी के रूप में चुका रहे हैं। इनका मुख्य काम अपने संगठन के किसी हिंदू चेहरे को आगे कर नेताओं, मंत्रियों और बड़े अधिकारियों को आमंत्रित करना, फोटो शूट कराना, अपना ‘भौकाल’ बनाना और फिर अवैध रूप से धन ऐंठना है।
### **अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को फंसाने की साजिश?**
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादित पहलू उत्तर प्रदेश शासन के **अपर मुख्य सचिव (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) श्री संजय प्रसाद** को इस कार्यक्रम में बुलाना रहा।
> **साजिश का शिकार हुए ACS?**
> सूत्रों का दावा है कि संजय प्रसाद जी को पूरी तरह भ्रामक और साजिशपूर्ण सूचना देकर इस भंडारे में आमंत्रित किया गया था। उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि वहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव आने वाले हैं और इसे एक राजनीतिक मंच का रूप दिया जा चुका है।
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वहीं दूसरी ओर, **निदेशक (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) श्री विशाल सिंह** ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए इस विवादित कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यह **कतिल शेखर, अब्दुल वहीद और हेमंत तिवारी मोहम्मद कामरान जैसे तथाकथित पत्रकारों की एक गहरी चाल थी। इनकी मंशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके सबसे ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी संजय प्रसाद के बीच अनबन पैदा करने की थी, ताकि मुख्यमंत्री की नजरों में उनकी छवि को गिराया जा सके और यह लॉबी इसका फायदा उठा सके।
### **विदेशी फंडिंग की आशंका: उच्च स्तरीय जांच और मान्यता रद्द करने की मांग**
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब योगी सरकार और ईमानदार अधिकारियों को बदनाम करने वाले इस ‘सिंडिकेट’ के खिलाफ आक्रोश भड़क गया है।
* **विदेशी फंडिंग का शक:** जिस तरह से एक पवित्र धार्मिक आयोजन को अचानक हाईजैक कर सरकार विरोधी एजेंडा चलाया गया, उसमें विदेशी फंडिंग की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
* **मान्यता रद्द करने की मांग:** जागरूक नागरिकों और पत्रकारों के एक बड़े वर्ग ने मांग की है कि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले इन तथाकथित पत्रकारों (कतिल शेखर, अब्दुल वहीद, जुबेर अहमद आदि) की संपत्तियों की जांच हो और तत्काल प्रभाव से इनकी पत्रकार मान्यता रद्द की जाए।
**बड़ा सवाल:** क्या संजय प्रसाद जी जैसे शीर्ष अधिकारियों व मंत्रियों को अब ऐसे संदिग्ध संगठनों के छद्म आयोजनों में जाने से पूरी तरह परहेज नहीं करना चाहिए? देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत इस ‘भंडारा कांड’ के मास्टरमाइंड्स पर क्या कार्रवाई होती है।