## **उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के संयोजक की बड़ी कार्यवाही: समिति से सात पत्रकार बर्खास्त, रडार पर कई और**
## **संयोजक प्रभात त्रिपाठी का कड़ा रुख— साजिश रचने वाले सात सदस्य बाहर!**


## **बड़ी कार्रवाई: समिति को अस्थिर करने वाले 7 पत्रकार बाहर, प्राथमिक सदस्यता रद्द!**
### **संयोजक प्रभात त्रिपाठी का कड़ा रुख— “अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं, निजी एजेंडा चलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई”**
**लखनऊ।**
जिले और राज्य मुख्यालय के पत्रकारों के विश्वास और भारी जनसमर्थन से गठित पुनर्गठित समिति में भीतरघात और साजिश रचने वालों के खिलाफ संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है। समिति को लगातार अस्थिर करने और अपने निजी स्वार्थ के लिए कुचक्र रचने के आरोप में **7 सदस्यों को तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखाते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता को रद्द कर दिया गया है।**
निष्कासित किए गए लोगों में:
1. शेखर पंडित
2. अनिल तिवारी
3. सुजीत दुबे
4. लखन मिश्र
5. खालिद सिद्दीकी
6. बबिता ओबरॉय
7. राजू रफ्तार
शामिल हैं। समिति के इस कड़े फैसले के बाद से ही पूरे पत्रकार जगत और मीडिया गलियारों में हड़कंप मच गया है।
*### **”बार-बार दिया मौका, लेकिन नहीं सुधरे हालात”**
समिति के संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने बेहद कड़े शब्दों में अन्य सदस्यों को सूचित करते हुए कहा कि इन लोगों को कई बार समझाया गया और सुधरने का पूरा मौका दिया गया था, ताकि ये सैकड़ों पत्रकारों के विश्वास से बनी इस समिति के खिलाफ साजिश रचना बंद कर दें। लेकिन, जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो समिति के हित और गरिमा को बनाए रखने के लिए यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।
**कड़ी चेतावनी:** “अब ये सभी लोग पुनर्गठित समिति के सदस्य नहीं हैं। यदि इनमें से कोई भी व्यक्ति समिति के नाम, पद या रसूख का दुरुपयोग करता पाया गया, तो वह खुद जिम्मेदार होगा और उसके खिलाफ सीधे कानूनी दायरे में सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
### **सारे दस्तावेज और सबूत संयोजक के पास सुरक्षित**
कार्रवाई को पूरी तरह पारदर्शी और अकाट्य बताते हुए स्पष्ट किया गया है कि इन सभी लोगों ने स्वयं आकर संयोजक के समक्ष सदस्यता फॉर्म भरा था। नियम और शर्तों को स्वीकार करते हुए अपने आवश्यक पहचान पत्र (जैसे मान्यता कार्ड व अन्य दस्तावेज), फोटो और हस्ताक्षर सौंपे थे, जिनकी मूल प्रतियां (Original Copies) आज भी संयोजक के पास सुरक्षित हैं। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने पर यह कार्रवाई पूरी तरह संवैधानिक और न्यायसंगत है।
### **रडार पर कुछ और नाम, आखिरी चेतावनी जारी!**
विस्फोटक खबर यह भी है कि कार्रवाई का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला। समिति के सूत्रों के अनुसार, कुछ और सदस्य भी अभी रडार पर हैं जो अंदरूनी तौर पर साजिशी गतिविधियों में लिप्त हैं। संयोजक ने उन्हें आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी है कि वे तुरंत अपनी नकारात्मक गतिविधियां बंद कर दें, अन्यथा अगला नंबर उनका हो सकता है।
### **निजी एजेंडा नहीं, पत्रकार हित सर्वोपरि**
प्रभात त्रिपाठी ने सैकड़ों सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समिति किसी के व्यक्तिगत रसूख या निजी एजेंडे से नहीं, बल्कि कड़े अनुशासन और पारदर्शिता से चलेगी। यह समिति लखनऊ जिले और राज्य मुख्यालय के पत्रकारों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए बनी है और इसके सख्त नियम सबके लिए बराबर हैं।