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सर्जिकल स्ट्राइक: बर्खास्त अध्यक्ष और पूर्व प्रवक्ता को सीधे जेल भेजने की तैयारी, संयोजक प्रभात त्रिपाठी का 'पावर स्ट्रोक'!, मामला उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का

महा-धमाका: यूपी मीडिया जगत में भारी उलटफेर, गद्दारों पर चला चाणक्य नीति का चाबुक!

बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित तथा साथ में निष्कासित प्रवक्ता अनिल तिवारी
बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित तथा साथ में निष्कासित प्रवक्ता अनिल तिवारी

# ⚡ महा-विस्फोट: यूपी मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, संयोजक प्रभात त्रिपाठी का महा-ऐक्शन!

### 🛑 विशेष खोजी विश्लेषण: गद्दारी और संदिग्ध गतिविधियों के ‘दीमक’ पर चला चाणक्य नीति का कानूनी चाबुक; कुर्सी विवाद में आर-पार, बर्खास्त अध्यक्ष शेखर पंडित और पूर्व प्रवक्ता अनिल तिवारी को सीधे जेल भेजने की तैयारी!

**— कृष्णानन्द शर्मा “शिवराम”** *(ग्रुप एडिटर, नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क)*

**लखनऊ।** इसे कहते हैं कलयुग का ‘कृष्ण-अवतार’ और पत्रकारिता की राजनीति का ‘पावर स्ट्रोक’! उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के सशक्त, कद्दावर और अभेद्य संयोजक **प्रभात त्रिपाठी** ने अनुशासनहीनता, गद्दारी और संगठन की पीठ में छुरा घोंपने वालों के खिलाफ एक ऐसा ऐतिहासिक, साहसिक और विस्फोटक फैसला लिया है, जिसने लखनऊ के हजरतगंज से लेकर दिल्ली के लुटियन जोन तक के मीडिया गलियारों को हिलाकर रख दिया है।
समिति की साख और मर्यादा को अपने खून-पसीने से सींचने वाले मुख्य संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने यह साफ कर दिया है कि संगठन की गरिमा से बड़ा कोई पद, कोई अध्यक्ष या कोई व्यक्ति नहीं हो सकता। उन्होंने समिति की साख को बट्टा लगाने वाले, अनुशासन की धज्जियां उड़ाने वाले और एक बाहरी व संदिग्ध संगठन के इशारे पर ‘कठपुतली’ बनकर नाचने वाले तत्कालीन अध्यक्ष **शेखर पंडित को दूध में से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया है।** इतना ही नहीं, बिना अनुमति सोशल मीडिया पर ‘ज्ञान’ बांटने वाले और स्वयंभू बनने की कोशिश करने वाले **प्रवक्ता अनिल तिवारी का ‘माइक’ (पद) भी हमेशा के लिए छीन लिया गया है।**
शायर ने शायद ऐसे ही धोखेबाजों और गद्दारों के लिए लिखा था—
> *”हम ही से सीखकर हमसे ही आंखें मिलाने लगे,* > *जो कल तक फर्श पर थे, आज खुद को अर्श का बताने लगे…”*
>

## 🔍 संदिग्ध गतिविधियां और देशविरोधी तत्वों से साठगांठ: क्यों नपे शेखर पंडित?

नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क ने जब इस पूरे मामले की तह में जाकर पड़ताल की, तो जो तथ्य सामने आए वे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को शर्मसार करने वाले हैं। तत्कालीन अध्यक्ष शेखर पंडित लगातार ऐसी संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे, जो एक अत्यंत सम्मानित और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त समिति के अध्यक्ष को कतई शोभा नहीं देतीं।

### १. देशविरोधी गतिविधियों के आरोपी संगठन से ‘सम्मान’ का काला खेल

क्या कोई सोच सकता है कि उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित समिति का अध्यक्ष ऐसे संगठन के मंच पर जाकर मुख्य अतिथि बने और सम्मानित हो, जिसके पदाधिकारियों पर देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के गंभीर आरोप हैं? शेखर पंडित ने यही आत्मघाती कदम उठाया। उन्होंने चंद टुकड़ों और सड़ी-गली वाहवाही के चक्कर में बाहरी व संदिग्ध संगठनों के इशारे पर काम करना शुरू कर दिया, जो सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और पत्रकारिता की साख के साथ खिलवाड़ था।
### २. अस्पताल में ‘बर्थडे केक’ और बीमारी का ढोंग
पूर्व प्रवक्ता अनिल तिवारी की संदिग्ध कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे खुद को ‘बीमार’ बताकर अस्पताल में भर्ती होते थे, ताकि संगठन की बैठकों और जवाबदेही से बच सकें। लेकिन हद तो तब हो गई जब अस्पताल के बेड को उन्होंने पिकनिक स्पॉट बना दिया। वहां बाहरी तत्वों को बुलाकर ‘बर्थडे केक’ काटे जा रहे थे।

### ३. ‘अस्पताल से वीआईपी एग्जिट’ और कुचक्र की लाइव स्क्रिप्ट

तमाशा यहीं नहीं रुका। अस्पताल में गंभीर बीमारी का बहाना बनाकर भर्ती रहने वाले अनिल तिवारी अचानक आधी रात को गायब होते थे, बाहरी संगठनों के गुप्त कार्यक्रमों में शामिल होकर राजनीतिक गोटियां सेट करते थे, और कार्यक्रम खत्म होते ही पुनः आकर अस्पताल के कंबल में मुंह छिपाकर लेट जाते थे। यह नाटक यह साबित करने के लिए पर्याप्त था कि अनिल तिवारी मानसिक और नैतिक रूप से एक स्वच्छ, पारदर्शी और मर्यादित संगठन का नेतृत्व करने के काबिल कतई नहीं हैं।

## 🔥 प्रभात त्रिपाठी का ‘महा-संकल्प’: नियमों का चाबुक चला, सीधे कर दिया बर्खास्त!

संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने साबित कर दिया कि जब बात पत्रकारों के सम्मान, समिति की गरिमा और देश की साख पर आएगी, तो वे ‘वज्र’ से भी कठोर फैसला लेने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेंगे। शेखर पंडित लगातार मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ रहे थे, सोशल मीडिया पर समिति के खिलाफ कुचक्र रच रहे थे और खुद को किंगमेकर समझकर संयोजक प्रभात त्रिपाठी के खिलाफ ही अपशब्दों का बाण चला रहे थे।
लेकिन राणनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रभात त्रिपाठी ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने पहले धैर्य का परिचय दिया, शेखर पंडित की हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी और उनके खिलाफ अचूक सबूत जुटाए। जब २४ मई को समिति के निष्ठावान कोषाध्यक्ष **विक्रम राव** ने शेखर पंडित के ‘ डांस’ (दूसरे संदिग्ध संगठनों के साथ मिलकर की जा रही गद्दारी) का पूरा कच्चा चिट्ठा और अकाट्य दस्तावेज टेबल पर लाकर रखे, तो प्रभात त्रिपाठी ने बिना एक पल गंवाए इस ‘दीमक’ का समूल सफाया करने का हुक्म जारी कर दिया।

## 🔨 बगावत का दूसरा विकेट: चौबीस घंटे में प्रवक्ता अनिल तिवारी भी ‘साफ’!

२५ मई २०२६ की दोपहर ठीक १२ बजे जैसे ही नई नवेली पुनर्गठित समिति ने आकार लिया, वैसे ही लगा कि अब स्थितियां शांत होंगी। लेकिन पद के लालच में अंधे हो चुके पूर्व प्रवक्ता अनिल तिवारी ने अपनी औकात से बाहर जाकर पैर पसारने शुरू कर दिए। बिना महासचिव, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष या खुद मुख्य संयोजक प्रभात त्रिपाठी की अनुमति या राय लिए, अनिल तिवारी ने सोशल मीडिया पर संगठन विरोधी और भ्रामक टिप्पणियां लिखनी शुरू कर दीं।

> **समिति की दोटूक फटकार:** > “सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और कमेंट्स बटोरने से संगठन नहीं चलते। समिति कागजों, नियमों और स्थापित कानूनों से चलती है। अनिल तिवारी को यह आखिरी चेतावनी दी गई है कि वे सिर्फ एक साधारण कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अपनी मर्यादा में रहें, वरना उनके बचे-खुचे पर भी कतर दिए जाएंगे।”
>
समिति के भीतर इस त्वरित कार्रवाई के बाद से यह साफ हो गया है कि अनिल तिवारी यह सब अपने छोटे से दिमाग से नहीं कर रहे थे, बल्कि पुनर्गठित समिति को अस्थिर करने के लिए शेखर पंडित और बैकस्टेज बैठी किसी ‘तीसरी बाहरी ताकत’ के इशारे पर कठपुतली बनकर नाच रहे थे। जिसे मुख्य संयोजक ने एक ही झटके में ‘डिसकनेक्ट’ कर दिया।

## 🏛️ चाणक्य नीति की बड़ी जीत: सारे कागजात ‘लॉकर’ में सुरक्षित, अब सीधे होगी FIR!

यह कोई सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह गद्दारों के खिलाफ एक ऐसी कानूनी सर्जिकल स्ट्राइक है जिससे बचना अब शेखर पंडित और अनिल तिवारी के लिए नामुमकिन है।
### 📜 शपथ पत्र (हलफनामे) का उल्लंघन: जेल जाने की उलटी गिनती शुरू
शेखर पंडित और अनिल तिवारी सहित सभी पदाधिकारियों ने पद संभालते वक्त बाकायदा लिखित कसम खाई थी, नोटरी के सामने लिखित **हलफनामा (शपथ पत्र)** दिया था और अपने दस्तखत किए थे कि वे समिति के नियमों और संविधान का अक्षरशः पालन करेंगे। चूंकि यह पूरा मामला लिखित कानूनी दस्तावेज पर आधारित है, इसलिए अपनी कसमों से मुकरकर संगठन के खिलाफ साजिश रचना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला बनता है।

### 📁 समस्त दस्तावेज सुरक्षित, कानूनी जाल तैयार

संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का पूरा अधिकार, पूर्व के चुनाव, पंजीकरण और वर्तमान पुनर्गठन से संबंधित **समस्त मूल कागजात और वैधानिक दस्तावेज अपने पास पूरी तरह सुरक्षित रखवा दिए हैं।** ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बर्खास्त किया गया कोई भी असामाजिक तत्व या पूर्व पदाधिकारी दस्तावेजों के साथ कोई छेड़छाड़ या हेराफेरी न कर सके। नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क ने खुद इसकी पुष्टि की है कि समिति के नियम व शर्तों का शत-प्रतिशत अनुपालन सिर्फ और सिर्फ संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने किया है।

## 📢 संयोजक प्रभात त्रिपाठी का खुला अल्टीमेटम: “नाम इस्तेमाल किया तो सीधे जाओगे जेल!”

मुख्य संयोजक प्रभात त्रिपाठी और पूरी कार्यकारिणी ने एकजुट होकर प्रेस नोट जारी करते हुए बर्खास्त तत्वों को अंतिम और सबसे खतरनाक चेतावनी दे दी है:
> **”शेखर पंडित को पद से बर्खास्त किया जा चुका है। यदि इसके बावजूद उन्होंने किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट, लेटरहेड, बैनर, पोस्टर, प्रेस विज्ञप्ति या किसी इंटरव्यू में खुद के लिए ‘अध्यक्ष’ पदनाम या उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के नाम का इस्तेमाल किया, तो उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से धोखाधड़ी, प्रतिरूपण (Impersonation) और जालसाजी का मुकदमा (FIR) दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद पुलिस प्रशासन जो हश्र करेगा और जो जेल यात्रा होगी, उसके जिम्मेदार शेखर पंडित खुद होंगे।”**
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## 💪 संयोजक के पीछे चट्टान की तरह खड़ी रही पूरी कार्यकारिणी

प्रभात त्रिपाठी के इस कड़े, निष्पक्ष और न्यायसंगत फैसले की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी की पूरी कोर कमेटी उनके पीछे एक अभेद्य सेना की तरह खड़ी हो गई। शेखर पंडित और अनिल तिवारी पूरी तरह से अलग-थलग (Isolation) पड़ गए हैं। संयोजक के फैसले पर एकजुटता दिखाते हुए समिति के इन सभी दिग्गजों ने तुरंत अपने हस्ताक्षर कर मोहर लगा दी:
* **ज्ञानेश पाठक (महासचिव):** जिन्होंने गद्दारी और अनुशासनहीनता के खिलाफ इस विधिक फैसले को पूर्णतः सही ठहराया।
* **के. के. सिंह व जितेंद्र कुमार सिंह (उपाध्यक्ष):** जिन्होंने समिति के मान-सम्मान और पत्रकारों की अस्मिता की रक्षा के लिए हामी भरी।
* **विक्रम राव (कोषाध्यक्ष):** जिन्होंने अपनी पैनी नजरों से शेखर पंडित की साजिश का पर्दाफाश कर पूरी वित्तीय व प्रशासनिक रिपोर्ट सौंपी।
* **अर्चना गुप्ता (संयुक्त सचिव):** जिन्होंने अनुशासनहीनता के खिलाफ इस ‘क्लीनिंग ऑपरेशन’ का पुरजोर समर्थन किया।
## 📊 यूपी संवाददाता समिति के महासंग्राम की वर्तमान स्थिति
| क्र. सं. | नाम व पद | वर्तमान स्थिति | कार्रवाई का मुख्य कारण | भावी विधिक कदम |
|—|—|—|—|—|
| **१** | **प्रभात त्रिपाठी (मुख्य संयोजक)** | **पूर्ण संप्रभु व शक्तिशाली नेतृत्व** | संगठन की साख व नियमों की रक्षा करना | भ्रामक प्रचार करने वालों पर FIR की तैयारी |
| **२** | **शेखर पंडित (तत्कालीन अध्यक्ष)** | **तत्काल प्रभाव से बर्खास्त** | देशविरोधी तत्वों से सम्मान लेना, अस्पताल का ढोंग, गद्दारी | पदनाम इस्तेमाल करने पर सीधे जेल भेजने की चेतावनी |
| **३** | **अनिल तिवारी (तत्कालीन प्रवक्ता)** | **प्रवक्ता पद से मुक्त (सिर्फ सदस्य)** | बिना अनुमति सोशल मीडिया पर भ्रामक बयानबाजी | दोबारा गलती करने पर पूर्ण निष्कासन |
| **४** | **समस्त कोर कार्यकारिणी** | **प्रभात त्रिपाठी के साथ चट्टान की तरह एकजुट** | समिति के शुद्धिकरण और मर्यादा की रक्षा | सर्वसम्मति से लिखित प्रस्ताव पारित |

## 🔮 महा-निष्कर्ष: निजी स्वार्थ का अंत, अब सिर्फ पत्रकारों का हित!

मुख्य संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने अपनी ‘हंटर नीति’ से उत्तर प्रदेश के पूरे मीडिया जगत को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यह पत्रकारों के सामूहिक हितों, उनके अधिकारों, उनकी पेंशन, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई लड़ने वाला एक पवित्र संगठन है, किसी की बपौती या ब्लैकमेलिंग की जागीर नहीं।
जो कोई भी इस संगठन की थाली में खाकर इसी में छेद करने की कोशिश करेगा, उसका हश्र शेखर पंडित और अनिल तिवारी जैसा ही होगा। इस ऐतिहासिक और विस्फोटक कार्रवाई के बाद लखनऊ के लुटियंस और मीडिया कॉरिडोर्स में कुचक्र रचने वाले अब मुंह छिपाते घूम रहे हैं।
सच्चे और ईमानदार पत्रकारों में इस फैसले से भारी उत्साह है। सब एक सुर में कह रहे हैं कि **”प्रभात त्रिपाठी का यह फैसला समिति को गद्दारों और दीमकों से मुक्त कराने के लिए बेहद जरूरी था।”** अब उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति मुख्य संयोजक प्रभात त्रिपाठी के कुशल, ईमानदार और जुझारू नेतृत्व में पहले से कहीं अधिक मजबूत, बुलंद, पारदर्शी और अजेय होकर उभरी है, जिसे हिला पाना अब किसी भी बाहरी या आंतरिक गद्दार के बस की बात नहीं है!

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल,ओ०टी०टी०, आईपी०टीवी व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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