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उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन

कांग्रेस व अन्य संगठनों ने जताया विरोध, सड़कों पर तोड़े गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर

## **आक्रोश की आग में सुलगता उत्तर प्रदेश: स्मार्ट मीटर के खिलाफ ‘जन-क्रांति’ या अराजकता?**
**लखनऊ से लेकर वाराणसी तक सड़कों पर फूटा जनता का गुस्सा; हजारों मीटर मलबे में तब्दील, सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान!**
### **बड़ी खबर: यूपी में ‘स्मार्ट’ सिस्टम पर भारी पड़ा जनता का ‘पावर’**

*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम”*

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इस वक्त विकास के दावों और जनता के आक्रोश के बीच एक भीषण टकराव की स्थिति बनी हुई है। जिसे सरकार ‘सुधार’ कह रही थी, उसे प्रदेश की जनता ने ‘आर्थिक डकैती’ करार दे दिया है। राजधानी लखनऊ समेत मेरठ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं हैं।
गुस्साई जनता ने अपने घरों के बाहर लगे **प्रीपेड स्मार्ट मीटरों** को उखाड़ फेंका है। कहीं मीटरों की होली जलाई जा रही है, तो कहीं उन्हें बीच सड़क पर पटककर हथौड़ों से चकनाचूर किया जा रहा है। बिजली विभाग के खिलाफ उपजा यह जन-आक्रोश अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है।
### **शहर-दर-शहर: विरोध की धधकती चिंगारी**
उत्तर प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो, जहाँ स्मार्ट मीटर का विरोध न हो रहा हो। प्रदर्शन का केंद्र बने प्रमुख शहरों का हाल कुछ इस प्रकार है:
| शहर | विरोध का स्वरूप | मुख्य घटना |
|—|—|—|
| **लखनऊ** | सड़कों पर घेराव | शक्ति भवन के बाहर सैकड़ों मीटरों का ढेर लगाया गया। |
| **वाराणसी** | घाटों से गलियों तक गूँज | काशी की तंग गलियों में बिजली विभाग की टीमों को खदेड़ा गया। |
| **मेरठ** | हिंसक झड़प | प्रदर्शनकारियों ने मीटरों को सड़क पर रखकर उस पर बुलडोजर चलाने की कोशिश की। |
| **प्रयागराज** | छात्र और युवा शक्ति | संगम नगरी में छात्रों ने ‘मीटर हटाओ, प्रदेश बचाओ’ के नारे बुलंद किए। |
| **कानपुर** | औद्योगिक आक्रोश | व्यापारियों ने स्मार्ट मीटर को ‘व्यापार का दुश्मन’ बताते हुए सामूहिक बहिष्कार किया। |
### **क्यों भड़की है विद्रोह की ये ज्वाला?**
जनता के इस जबरदस्त गुस्से के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है, बल्कि शिकायतों की एक लंबी फेहरिस्त है:
1. **तेज रफ्तार से भागते मीटर:** उपभोक्ताओं का आरोप है कि पुराने मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर की रीडिंग **30% से 50%** अधिक आ रही है।
2. **प्रीपेड का फंदा:** “पहले इस्तेमाल करें, फिर भुगतान करें” की जगह “पहले पैसे दें, वरना अंधेरा झेलें” वाली नीति गरीब और मध्यम वर्ग को रास नहीं आ रही है।
3. **बिना सूचना बिजली गुल:** बैलेंस खत्म होते ही रात के 2 बजे भी बिजली कट जाना, जनता के सब्र का बांध तोड़ रहा है।
4. **तकनीकी खामियां:** सर्वर डाउन होने के कारण रिचार्ज न होना और शिकायत पर कोई सुनवाई न होना आम बात हो गई है।
### **सियासी अखाड़ा बना ‘स्मार्ट मीटर’: कांग्रेस और विपक्षी दलों का हल्ला बोल**
इस जन-आक्रोश ने विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार दे दिया है। **कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय संगठनों** ने इस मुद्दे पर कंधे से कंधा मिला लिया है।
> “यह स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि जनता की जेब काटने वाली मशीन है। जब तक ये मीटर हटाए नहीं जाते, कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता सड़कों पर संघर्ष करेगा।”
> — **विपक्षी नेताओं का साझा बयान**
>
प्रतापगढ़, जौनपुर और भदोही जैसे जिलों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मीटरों को बोरियों में भरकर जिला मुख्यालयों पर जमा कर दिया है। फैजाबाद और गोरखपुर में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन मीटर लगाए गए, तो बिजली दफ्तरों में तालाबंदी कर दी जाएगी।
### **विस्फोटक मंजर: जब सड़कों पर टूटे कांच और उम्मीदें**
सीतापुर और जौनपुर से आई तस्वीरों ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं। वहां आक्रोशित महिलाओं ने हाथ में डंडे लेकर बिजली विभाग की टीम को वापस जाने पर मजबूर कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अंधेरे में रहने को तैयार हैं, लेकिन इस ‘लूट’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सड़कों पर पड़े टूटे हुए मीटरों के अवशेष इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जनता अब केवल आश्वासन से मानने वाली नहीं है। पुलिस ने कई जगहों पर लाठीचार्ज भी किया, लेकिन भीड़ का हौसला कम होने के बजाय और बढ़ता गया।
### **निष्कर्ष: क्या पीछे हटेगी सरकार?**
उत्तर प्रदेश में फैला यह विद्रोह बिजली विभाग और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ तकनीकी प्रगति का दावा है, तो दूसरी तरफ धरातल पर त्राहि-त्राहि मचाती जनता।
**क्या प्रशासन इन मीटरों की जांच कराएगा? क्या प्रीपेड व्यवस्था में बदलाव होगा? या फिर यह आंदोलन 2027 के चुनाव से पहले सरकार के लिए एक बड़ा ‘करंट’ साबित होगा?**
फिलहाल, यूपी की सड़कों पर गूँजते नारे और टूटते स्मार्ट मीटर एक ही संदेश दे रहे हैं— **”हक की लड़ाई, अब आर-पार की!”**

NAV BHARAT DARPAN

कृष्णानन्द शर्मा "शिवराम" 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं, दैनिक जागरण,अमर उजाला, युनाइटेड भारत, स्वतंत्र भारत, सन्मार्ग जैसे हिन्दी दैनिक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के जरिए उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, समसामयिक मुद्दों पर प्रकाश डालते रहे, वर्तमान में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क में प्रधान सम्पादक पद पर कार्यरत हैं, फिल्म सिटी नोएडा से नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क का संचालन करते हैं, जिसमें हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, न्यूज पोर्टल, वेबसाइट,व यूट्यूब न्यूज चैनल व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहें हैं।

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