कांग्रेस के पूर्व मंत्री अरूण कुमार सिंह"मुन्ना का निधन, जौनपुर के राजनीति का स्वर्णिम अध्याय समाप्त
सियासत का बादशाह पंचतत्व में विलीन


**सियासत का ‘बादशाह’ पंचतत्व में विलीन: नहीं रहे दिग्गज कांग्रेसी अरुण सिंह मुन्ना, जौनपुर की राजनीति का स्वर्णिम अध्याय समाप्त**
*आशीष पाण्डेय*
जौनपुर(ब्यूरो)उत्तर प्रदेश की राजनीति में आधी सदी तक अपनी धमक बनाए रखने वाले, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री **अरुण सिंह मुन्ना** का सोमवार शाम प्रयागराज के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पूर्वांचल से लेकर लखनऊ के सियासी गलियारों में सन्नाटा पसर गया।
### **इलाहाबाद से उठी लहर, लखनऊ में बना तूफान**
अरुण सिंह मुन्ना का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं था। 1970 के दशक में जब देश में बड़े राजनीतिक बदलाव हो रहे थे, तब उन्होंने **इलाहाबाद विश्वविद्यालय** की छात्र राजनीति से अपना लोहा मनवाया। 1971 में छात्र संघ अध्यक्ष बनने के बाद वे सीधे **इंदिरा गांधी** और **राजीव गांधी** की कोर टीम का हिस्सा बने। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक ‘संकटमोचक’ थे।
### **शोक में डूबे दिग्गज: “एक युग का अंत”**
उनके निधन पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय दिग्गजों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष **अजय राय** ने इसे पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राज्यसभा सांसद **प्रमोद तिवारी** ने भावुक होते हुए कहा, *”मुन्ना जी ने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।”*
* **आराधना मिश्रा ‘मोना’ (नेता विधानमंडल):** “वे हमारे मार्गदर्शक थे, उनका जाना एक अभिभावक को खोने जैसा है।”
* **रामचन्द्र मिश्र (पूर्व जिलाध्यक्ष):** “जौनपुर ने आज अपना सबसे बुलंद स्वर खो दिया है।”
* **नदीम जावेद (पूर्व विधायक):** “मुन्ना जी का राजनीतिक कौशल नई पीढ़ी के लिए एक पाठशाला था।”
इसके साथ ही कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह और जिलाध्यक्ष प्रमोद सिंह सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।
### **एक नज़र में ऐतिहासिक सफरनामा**
| पड़ाव | उपलब्धियां/विशेष |
|—|—|
| **छात्र राजनीति** | 1971 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में पहचान बनाई। |
| **चुनावी जीत** | 1977 में मछलीशहर और 1991 में रारी (जौनपुर) से विधायक निर्वाचित। |
| **सत्ता का केंद्र** | 10 वर्षों तक प्रदेश सरकार में ताकतवर कैबिनेट मंत्री रहे। |
| **संगठन की कमान** | 2003-2005 के कठिन दौर में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष का पद संभाला। |
| **खास पहचान** | गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिनती। |
### **जौनपुर के मिट्टी के लाल की अंतिम विदाई**
मूल रूप से मुंगराबादशाहपुर के रामनगर गांव निवासी अरुण सिंह मुन्ना अपनी मिट्टी से हमेशा जुड़े रहे। बीमार होने के बावजूद वे कार्यकर्ताओं का हाल-चाल लेते रहते थे। सोमवार शाम जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तो जौनपुर के हर घर में उदासी छा गई।
समर्थकों का कहना है कि राजनीति में ‘अरुण सिंह मुन्ना’ जैसा रसूख और जनता से जुड़ाव अब शायद ही कभी देखने को मिले। उनके निधन से कांग्रेस ने अपना एक ‘स्तंभ’ खो दिया है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक संभव नहीं होगी।


