पत्रकार के घर पर भू० माफियाओं का तांडव, पुलिस नाट रिचेबल, पत्रकारों में आक्रोश
18 घंटे बाद भी पुलिस सुस्त, पत्रकार व परिजन को सुरक्षा देने में नाकाम राजधानी की पुलिस, मुख्यमंत्री के मंशा की धज्जियां उड़ती राजधानी लखनऊ की पुलिस





*राजधानी में कानून के इकबाल को चुनौती*
*पत्रकार के घर पर भू-माफियाओं का तांडव, 18 घंटे बाद भी पुलिस सुस्त*
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब शासन-प्रशासन की नाक के नीचे पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। लखनऊ के कल्याणी विहार इलाके में बीते 18 मार्च को एक निर्भीक पत्रकार के आवास पर करीब 25-30 असलहाधारी गुंडों और भू-माफियाओं ने सरेआम हमला कर सनसनी फैला दी। इस हमले में न केवल संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया, बल्कि परिवार की बुजुर्ग महिला सदस्य के साथ भी अभद्रता की गई।
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित पत्रकार अर्चित के कल्याणी विहार स्थित आवास पर बुधवार को भारी संख्या में उपद्रवियों ने धावा बोल दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर अवैध असलहों से लैस थे। उन्होंने घर पर जमकर पथराव किया और घर के भीतर घुसने का प्रयास किया।
पीड़ित ने बताया कि हमलावरों का मुख्य उद्देश्य डरा-धमका कर जमीन पर कब्जा करना और आवाज दबाना था। इस हमले के दौरान पत्रकार की बुजुर्ग नानी, जो कि हृदय रोग (Heart Patient) से पीड़ित हैं, उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद से पूरा परिवार गहरे सदमे और दहशत में है।
*पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल*
हैरानी की बात यह है कि घटना के 18 घंटे बीत जाने के बावजूद लखनऊ पुलिस ने अब तक किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है। राजधानी के वीआईपी क्षेत्र के पास हुई इस वारदात ने कानून-व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि पुलिस को तत्काल सूचना देने के बाद भी ठोस कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल वाला रवैया अपनाया जा रहा है।
आज एक पत्रकार नहीं, एक पीड़ित इंसाफ की गुहार लगा रहा है। जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तो जनता की आवाज ही आखिरी उम्मीद होती है-अर्चित तिवारी पीड़ित पत्रकार
सोशल मीडिया पर न्याय की मुहिम
घटना के बाद से पत्रकार जगत और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। सोशल मीडिया पर #JusticeForArchit और #JournalistSafety जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी उत्तर प्रदेश से मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ ‘बुलडोजर’ जैसी सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, पूरा पत्रकार समुदाय एकजुट होकर प्रशासन से यह सवाल पूछ रहा है: क्या लखनऊ में अब सच लिखना और अपने घर में रहना भी सुरक्षित नहीं है?