जौनपुर: स्वाधीन सिंह हत्याकांड के खुलासे पर बड़ा प्रश्न चिह्न, सवालों के घेरे में बदलापुर पुलिस, सीबीआई जांच की मांग,
क्या असली कातिलों को बचाने के लिए पुलिस ने रची फर्जी गिरफ्तारी की पटकथा
*पुलिस पर निर्दोष को फंसाने का संगीन आरोप*
*16 वर्षीय किशोर को ‘मोहरा’ बनाने का दावा, पीड़ित माँ ने डीएम से मांगी सीबीआई जांच*
*सवाल: क्या असली कातिलों को बचाने के लिए बदलापुर पुलिस ने रची ‘फर्जी गिरफ्तारी’ की पटकथा?*
*कृष्णानन्द शर्मा*
लखनऊ। जौनपुर के बहुचर्चित स्वाधीन सिंह उर्फ छोटू हत्याकांड में पुलिस द्वारा पेश की गई ‘सफलता की कहानी’ अब सवालों के घेरे में है। इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए आलोक मिश्रा की माँ रेखा मिश्रा ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे एक ‘सुनियोजित साजिश’ करार दिया है। जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने अपनी नाकामी छिपाने और रसूखदार अपराधियों को बचाने के लिए एक 16 वर्षीय नाबालिग को ‘बलि का बकरा’ बना दिया है।
*खाकी की ‘थ्योरी’ में उलझे कई पेंच*
रेखा मिश्रा ने अपने पत्र में पुलिस की गिरफ्तारी वाली कहानी की धज्जियां उड़ाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि:
* मददगार बना गुनहगार: जिस आलोक ने इंसानियत के नाते स्वाधीन के परिवार को घटना की सूचना दी, पुलिस ने उसी को सलाखों के पीछे भेज दिया।
* अवैध हिरासत का खेल: आरोप है कि आलोक को 30 दिसंबर 2025 को ही पुलिस घर से उठा ले गई थी, लेकिन कागजों में उसकी गिरफ्तारी 8 जनवरी 2026 को दिखाई गई। सवाल यह है कि 10 दिनों तक वह कहाँ और किसकी कस्टडी में था?
* फर्जी बरामदगी: परिजनों का कहना है कि पुलिस द्वारा दिखाया गया अवैध असलहा पूरी तरह से मनगढ़ंत है और उसे पुलिस ने खुद प्लांट किया है।
*सीसीटीवी फुटेज’ बना पुलिस की साख की कसौटी*
पीड़ित माँ ने बेहद आत्मविश्वास के साथ मांग की है कि बदलापुर कोतवाली के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सार्वजनिक किया जाए। उनका दावा है कि फुटेज देखते ही पुलिस की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी, क्योंकि आलोक 30 तारीख से ही थाने में कैद था। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ होने से पहले इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए।
*जनता की अदालत में पुलिसिया साख पर सवाल*
इस मामले ने क्षेत्र में पुलिस के प्रति अविश्वास पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि आखिर पुलिस असली शूटरों तक पहुँचने के बजाय ‘सॉफ्ट टारगेट’ क्यों चुन रही है? क्या वाकई जौनपुर पुलिस किसी बड़े सफेदपोश के दबाव में काम कर रही है?
*न्याय की इस लड़ाई में हम पीछे नहीं हटेंगे। मेरा बेटा निर्दोष है और पुलिस का यह ‘खुलासा’ केवल एक माँ की ममता का कत्ल नहीं, बल्कि कानून की भी हत्या है। हमें सिर्फ और सिर्फ सीबीआई जांच पर भरोसा है।* -*रेखा मिश्रा, आवेदिका (आरोपी की माँ)*