* शिंदे को 'शह' देने के लिए कांग्रेस से 'मात' का सौदा; अंबरनाथ में गठबंधन धर्म का सरेआम कत्ल। * बीजेपी का दोहरा चेहरा: दिल्ली में विरोध,
अंबरनाथ में गठबंधन धर्म का सरेआम कत्ल। * बीजेपी का दोहरा चेहरा: दिल्ली में विरोध, अंबरनाथ में 'कांग्रेस' के साथ दावत!

*सत्ता की हवस में विचारधारा का कत्ल! अंबरनाथ में ‘कांग्रेस-मुक्त’ का नारा देने वाली भाजपा ने उसी का थामा हाथ*
*शिंदे की शिवसेना को धूल चटाने के लिए धुर विरोधी हुए एक; अंबरनाथ नगर परिषद में ‘अपवित्र’ गठबंधन का उदय*
*कृष्णानन्द शर्मा*
नई दिल्ली,सियासत में अवसरवादिता जब अपनी चरम सीमा लांघती है, तो अंबरनाथ जैसी तस्वीर उभरती है। जिस कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) देश के लिए ‘दीमक’ बताती रही, जिसके सफाए के लिए ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ का संकल्प लिया गया, आज उसी कांग्रेस की पालकी पर सवार होकर बीजेपी ने अंबरनाथ नगर परिषद की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता की दहलीज से बाहर धकेलने के लिए बीजेपी ने नैतिकता को खूंटी पर टांगकर कांग्रेस और अजित पवार गुट के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का चोला ओढ़ लिया है।
*विचारधारा गई तेल लेने, कुर्सी ही असली ईमान*
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने पहले ही महायुति के भीतर सुलग रही आग को हवा दे दी थी। 28 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को उम्मीद थी कि गठबंधन का ‘धर्म’ निभाया जाएगा। लेकिन बीजेपी ने अपनी 15 सीटों के साथ नंबर दो पर रहते हुए गेम ही पलट दिया। बीजेपी ने 12 पार्षदों वाली कांग्रेस और 4 पार्षदों वाली एनसीपी (एपी) से हाथ मिलाया और 31 के आंकड़े के साथ सत्ता हथिया ली। तेजश्री करंजुले को अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने जीत तो हासिल कर ली, लेकिन अपनी ही विचारधारा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए।
*शिंदे गुट का करारा प्रहार: “ये पीठ में घोंपा गया छुरा है*
इस ‘अभद्र’ गठबंधन ने महायुति के रिश्तों में ऐसी दरार पैदा कर दी है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं दिखती। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने तमतमाते हुए इसे ‘विश्वासघात’ करार दिया। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि जनता के सामने कांग्रेस को कोसने वाली बीजेपी अब अंबरनाथ की गलियों में कांग्रेसियों के साथ मिलकर विकास का कौन सा मॉडल पेश करेगी? क्या यह सत्ता के लिए किया गया वैचारिक सरेंडर नहीं है?
*भ्रष्टाचार का बहाना और अपनों पर ही निशाना*
बीजेपी ने इस ‘बेमेल निकाह’ को जायज ठहराने के लिए भ्रष्टाचार का सहारा लिया है। बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने खुलेआम आरोप लगाया कि पिछले 25 सालों से अंबरनाथ में शिवसेना ने सिर्फ भ्रष्टाचार किया है। सवाल यह है कि अगर शिंदे गुट इतना ही भ्रष्ट है, तो राज्य सरकार की कैबिनेट में उनके साथ बैठकर बीजेपी कौन सी शुचिता की राजनीति कर रही है?
महायुति के ताबूत में आखिरी कील?
अंबरनाथ का यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की आहट है। सत्ता की खातिर बीजेपी का कांग्रेस से हाथ मिलाना यह संदेश देता है कि चुनाव जीतने के लिए कोई भी ‘दुश्मन’ पराया नहीं और कोई भी ‘दोस्त’ सगा नहीं। आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा की रणनीतियों पर इस ‘अंबरनाथ प्रयोग’ का असर बेहद कड़वा होने वाला है।
