राजधानी लखनऊ में बस संचालकों से जबरदस्त धन उगाही, प्रताड़ना का आरोप
अवैध वसूली, अवैध चालान व वाहन सीज होने पर आक्रोशित हैं वाहन स्वामी, कठोर कार्यवाही व विजिलेंस हस्तक्षेप की मांग
*राजधानी में पुलिसिया तंत्र का ‘वसूली स्टैंड’?*
*चिनहट के कामता डिपो पर निजी बस मालिकों का फूटा गुस्सा*
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिनहट कोतवाली अंतर्गत कामता डिपो और उपट्रान चौकी के पास निजी बसों के संचालन को लेकर एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कामता चौकी पर तैनात उप निरीक्षक विवेक मिश्रा के संरक्षण में यहाँ अवैध वसूली का खेल चल रहा है। बस मालिकों का दावा है कि जो ऑपरेटर ‘दैनिक चढ़ावा’ नहीं देता, उसकी बसों को जबरन बंद कर दिया जाता है।
*प्रमुख आरोप: ‘बिना चढ़ावा, नो रास्ता*
बस संचालकों का आरोप है कि उप निरीक्षक विवेक मिश्रा खुलेआम यह चुनौती देते हैं कि सरकार में उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। शिकायतकर्ताओं के अनुसार:
* अवैध वसूली: हर बस से ₹500 का दैनिक ‘टैक्स’ मांगा जाता है।
* उत्पीड़न: 28 दिसंबर को कई बसें सिर्फ इसलिए बंद कर दी गईं क्योंकि उन्होंने अवैध वसूली देने से मना कर दिया था।
* अधिकारों का दुरुपयोग: बुकिंग वाली सवारियों को बीच रास्ते उतारकर बसों को सीज करने के बजाय थाने में खड़ा कर दिया जाता है, ताकि दबाव बनाया जा सके।
*शासन-प्रशासन से तीखे सवाल*
बस मालिकों ने सरकार और परिवहन विभाग की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं:
* टैक्स बनाम प्रताड़ना: जब बस मालिक रोड टैक्स, बीमा, परमिट, फिटनेस, नगर निगम टैक्स और टोल प्लाजा का भुगतान कर रहे हैं, तो सड़क पर उन्हें क्यों रोका जा रहा है?
* ऑनलाइन सिस्टम की अनदेखी: सरकार ने ‘परिवहन ऐप’ और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दिया है। अगर कागजों में कमी है, तो ऑनलाइन चालान क्यों नहीं किया जाता? गाड़ी को सीधे बंद करना भ्रष्टाचार का जरिया क्यों बना हुआ है?
* लंबे समय से तैनाती: एक ही चौकी पर वर्षों से जमे रहने के कारण पुलिस कर्मियों के हौसले बुलंद हैं। उप निरीक्षक विवेक मिश्रा की संपत्ति की जाँच की भी माँग उठ रही है।
*जनता और मालिकों का शोषण*
सवारियों को बीच सड़क पर उतार देना न केवल बस मालिकों का आर्थिक नुकसान है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा के साथ भी खिलवाड़ है। बस मालिकों का कहना है कि “या तो सरकार बसों की बिक्री पर ही रोक लगा दे, ताकि लोग कर्ज लेकर बसें न खरीदें, या फिर इन ‘वर्दीधारी वसूली केंद्रों’ पर लगाम लगाए।”
*क्या कहती है गाइडलाइन?*
नियमों के मुताबिक, पुलिस को चलती गाड़ी को रोककर सवारियों को परेशान करने का अधिकार तभी है जब कोई गंभीर सुरक्षा उल्लंघन हो। कागजी कमियों के लिए चालान का प्रावधान है, न कि सवारी उतारकर बस को डंप करने का।