नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी को बड़ा झटका, कांग्रेस को मिली राहत, ईडी की चार्जशीट को न्यायालय ने अवैध करार देते हुए किया खारिज
नेता विपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी व अन्य आरोपी नेताओं को बड़ी राहत, कोर्ट ने खारिज किया आरोपपत्र


*ईडी को बड़ा कानूनी झटका: कांग्रेस को बड़ी राहत*
*नेशनल हेराल्ड केस में ED की चार्जशीट खारिज*
*कोर्ट ने कहा – मनी लॉन्ड्रिंग की जांच क्षेत्राधिकार से बाहर*
*कृष्णानन्द शर्मा*
नई दिल्ली।नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज कांग्रेस पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान (Cognizance) लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस निर्णय से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें ED ने ₹2,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति हड़पने के आरोप में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी बनाया था।
न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्रीय जांच एजेंसी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार के “राजनीतिक प्रतिशोध” के खिलाफ ‘सत्य की निर्णायक जीत’ बताया है।
*कोर्ट की टिप्पणी: PMLA जांच के लिए कानूनी आधार ही नहीं*
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ED की जांच में मूल आपराधिक मामला (Predicate Offence) ही दर्ज नहीं था, जो PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत कार्रवाई के लिए प्राथमिक शर्त है।
* न्यायालय का तर्क: कोर्ट ने कहा कि ED का मामला भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेशों पर आधारित है, न कि किसी विधिवत दर्ज प्राथमिकी (FIR) पर।
* कानूनी निहितार्थ: कोर्ट की यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि बिना किसी पंजीकृत एफआईआर के मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करना कानूनी रूप से दोषपूर्ण है, जिससे यह पूरी जांच प्रक्रिया ही क्षेत्राधिकार से बाहर हो गई।
हालांकि, कोर्ट ने ED को इस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को इकट्ठा करने और आगे की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन चार्जशीट को स्वीकार नहीं किया गया।
*कांग्रेस का तीखा हमला: ‘मोदी सरकार बेनकाब हुई*
कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने तत्काल सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाला। पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि
सत्य की जीत हुई है। मोदी सरकार की बदनीयत और गैरकानूनी तरीके से की गई कार्रवाई पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। माननीय अदालत ने यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ ED की कार्रवाई को अवैध और दुर्भावना से ग्रसित पाया है।”पार्टी ने जोर दिया कि पिछले एक दशक से मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से किए जा रहे निराधार आरोप आज धराशायी हो गए हैं, क्योंकि न तो कोई धनशोधन, न अपराध की आय और न ही संपत्ति का हस्तांतरण साबित हुआ।
*नेशनल हेराल्ड केस की पृष्ठभूमि और विवाद*
यह मामला देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1937 में स्थापित एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है, जो नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज जैसे अखबार प्रकाशित करता था।
| घटनाक्रम | प्रमुख विवरण |
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| कर्ज और YIL का उदय | 2008 तक घाटे में चल रही AJL पर कांग्रेस पार्टी का ₹90.25 करोड़ से अधिक का कर्ज चढ़ा। 2010 में, सोनिया-राहुल गांधी की हिस्सेदारी वाली यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) ने कथित तौर पर मात्र ₹50 लाख में इस कर्ज की वसूली का अधिकार हासिल कर लिया। |
| स्वामी का आरोप | सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में आरोप लगाया कि YIL ने इस सौदे के माध्यम से AJL की ₹2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति को गलत तरीके से अधिग्रहित किया। |
| ED की कार्रवाई | 2014 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और गांधी परिवार सहित अन्य आरोपियों से पूछताछ की। |
| न्यायिक इतिहास | 2015 में ट्रायल कोर्ट से जमानत मिली। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया, लेकिन व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी थी। |
यह फैसला राजनीतिक गलियारों में बड़े पैमाने पर बहस छेड़ सकता है, क्योंकि यह केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा विपक्षी नेताओं की जांच के तरीके पर एक मजबूत न्यायिक टिप्पणी है।


