शेखर पंण्डित उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष निर्वाचित
यह जीत संघर्ष का है, पद का नहीं-शेखर पण्डित

*सड़क पर संग्राम, शेखर पंडित के सिर सजा ‘पत्रकारिता का ताज*
*एनेक्सी के बंद गेट के बाहर तपती धूप में रचा गया इतिहास; लखनऊ की सड़कों पर हुआ ‘लोकतंत्र’ का उदय*
*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम”*
लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी में बुधवार को सत्ता के गलियारों के बाहर एक ऐसा ‘चुनावी महाकुंभ’ देखने को मिला, जिसकी गूँज लंबे समय तक सुनाई देगी। तमाम प्रशासनिक अड़चनों और एनेक्सी मीडिया सेंटर के बंद किवाड़ों को चुनौती देते हुए, पत्रकारों ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया और शेखर पंडित को उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) का नया अध्यक्ष चुन लिया।
*जब लोकतंत्र के लिए ‘सड़क’ बनी संसद*
यह चुनाव सामान्य नहीं था। जिस एनेक्सी परिसर में प्रमुख सचिव के आदेशानुसार मतदान होना था, वहां अचानक रहस्यमयी तरीके से ताले जड़ दिए गए। प्रशासन की इस ‘नाकेबंदी’ के सामने न तो पत्रकार झुके और न ही निर्वाचन अधिकारी। चिलचिलाती धूप और खुली सड़क को ही ‘पोलिंग बूथ’ बना दिया गया। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक पत्रकारों ने सड़क पर कतारबद्ध होकर अपने मत का प्रयोग किया।
*शेखर पंडित की शानदार जीत: आंकड़ों की जुबानी*
निर्वाचन अधिकारी उमेश चंद्र मिश्रा और अजीत सिंह की देखरेख में हुई मतगणना के बाद जब परिणामों की घोषणा हुई, तो सड़क ‘शेखर पंडित जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठी।
* अध्यक्ष: शेखर पंडित (78 वोट पाकर शिखर पर पहुंचे)
* महासचिव: ज्ञानेश पाठक (52 वोट)
* कोषाध्यक्ष: विक्रम राव (41 वोट)
उपाध्यक्षों की कमान: सर्वाधिक 129 वोट लेकर अमन अग्रवाल ने अपनी धमक दिखाई, वहीं जीतेन्द्र कुमार सिंह यादव (90 वोट) और कृष्णा कुमार सिंह (28 वोट) भी विजयी रहे।
*यह जीत संघर्ष की है, पद की नहीं” – शेखर पंडित*
निर्वाचित होने के बाद अध्यक्ष शेखर पंडित ने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि हर उस पत्रकार की है जिसने सिस्टम की मनमानी के खिलाफ सड़क पर खड़े होकर वोट दिया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि अब पत्रकारों के अधिकारों, उनकी पेंशन और सुरक्षा की लड़ाई को नए सिरे से धार दी जाएगी।
जब कलम के सिपाहियों को सड़क पर चुनाव के लिए मजबूर किया जाता है, तो वहीं से बदलाव की नई इबारत लिखी जाती है।”
> — नवनिर्वाचित टीम का साझा संकल्प
*प्रशासन की ‘तालाबंदी’ पर उठे सुलगते सवाल*
सचिवालय प्रशासन द्वारा अंतिम समय में गेट बंद किए जाने के पीछे की साजिश अब जांच का विषय बन गई है। वरिष्ठ पत्रकारों ने इस घटनाक्रम को प्रेस की आजादी पर हमला करार दिया है। चुनाव संयोजक प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि जल्द ही भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा और सरकार के समक्ष पत्रकारों की मांगों का चार्टर रखा जाएगा।
*विशेषता:*
हजारों की संख्या में पत्रकारों की मौजूदगी और सड़क पर हुई मतगणना के बावजूद, न तो यातायात बाधित हुआ और न ही कोई अप्रिय घटना हुई। यह अनुशासन शेखर पंडित की नई टीम के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा।
