*दमनकारी चक्र: UNI दफ्तर पर छापेमारी और नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क के प्रखर पत्रकार अर्चित तिवारी को डराने की कोशिश, सच की ताकत के आगे झुके साजिशकर्ता*
*राजधानी में पत्रकारिता पर संकट: UNI में महिला कर्मियों से बदसलूकी और 'एक्सेस न्यूज़' संपादक अर्चित तिवारी को दबाने का प्रयास नाकाम, 48 घंटे में बेनकाब हुई विशेष लॉबी*

*UNI मुख्यालय पर पुलिसिया तांडव और ‘नवभारत दर्पण’ के एंकर अर्चित तिवारी को धमकाने की साजिश*
*क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने की हो रही है तैयारी?*
*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम”*
नई दिल्ली,राजधानी दिल्ली के रफी मार्ग स्थित देश की सबसे पुरानी समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) के मुख्यालय पर दिल्ली पुलिस की अचानक हुई छापेमारी ने प्रेस की स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस घटना ने हाल ही में नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क के प्रख्यात न्यूज एंकर और एक्सेस न्यूज के संपादक अर्चित तिवारी के खिलाफ रची गई साजिशों की यादें ताजा कर दी हैं, जहाँ पत्रकारिता की बुलंद आवाज को दबाने का असफल प्रयास किया गया था।
*UNI दफ्तर में दबंगई और महिला कर्मियों से बदसलूकी*
‘द स्टेट्समैन’ समूह के स्वामित्व वाली एजेंसी UNI के दफ्तर में हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। संस्थान ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने न केवल समाचार सेवाओं को बाधित किया, बल्कि महिला कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार भी किया। उन्हें अपना निजी सामान और मोबाइल तक ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। यूएनआई प्रबंधन ने इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटने’ वाली कार्रवाई बताया है। हालांकि, नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे वीडियोग्राफी के साये में की गई एक कानूनी प्रक्रिया करार दिया है।
*एक्सेस न्यूज व नवभारत दर्पण के एंकर अर्चित तिवारी को भी डराने की हुई थी कोशिश*
पत्रकारिता पर बढ़ते इन हमलों के बीच नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क के प्रखर एंकर और एक्सेस न्यूज के संपादक अर्चित तिवारी भी एक विशेष लॉबी के निशाने पर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, एक प्रभावशाली गुट ने अर्चित तिवारी को उनकी बेबाक पत्रकारिता के लिए डराने-धमकाने और दबाने का हरसंभव प्रयास किया था।
लेकिन, अर्चित तिवारी की अडिग पत्रकारिता और सच्चाई की ताकत के आगे यह विशेष लॉबी टिक नहीं सकी। पत्रकारिता की इस गौरवशाली विजय का प्रमाण यह रहा कि साजिश रचने वाले अपराधियों को महज 48 घंटों के भीतर घुटने टेकने पड़े और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित समझौता कर माफी मांगी।
*चौतरफा संकट में पत्रकारिता*
चाहे वह UNI जैसी ऐतिहासिक संस्था पर पुलिसिया दबिश हो या नवभारत दर्पण और एक्सेस न्यूज जैसे संस्थानों के संपादकों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना, ये घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि स्वतंत्र मीडिया पर दबाव बढ़ाने के लिए कानूनी और गैर-कानूनी दोनों रास्ते अपनाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जब अर्चित तिवारी जैसे पत्रकार और UNI जैसे संस्थान निशाने पर हों, तो यह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

