भारतीय हिन्दू मित्र परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय द्वारा आयोजित किया जाएगा जनता की अदालत, होगा ऐतिहासिक खुलासा,
स्वाधीन सिंह उर्फ छोटू हत्याकांड: भारतीय हिन्दू मित्र परिषद द्वारा आयोजित जनता की अदालत में होगा बड़ा खुलासा

*खाकी पर कलंक! जौनपुर में ‘न्याय का एनकाउंटर’, क्या रिश्वत की आग में झोंके गए तीन मासूमों का भविष्य?*
*बदलापुर मर्डर मिस्ट्री: समाजसेवी अरविंद पांडेय का ‘विस्फोटक’ खुलासा, पुलिस की स्क्रिप्ट को बताया 100% फर्जी*
*असली कातिल आजाद, पुलिस की गोद में खेल रहे गुनहगार; ‘जनता की अदालत’ में 11 फरवरी को होगा बड़ा धमाका*
बदलापुर (जौनपुर)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिसिया तंत्र और SOG की कार्यप्रणाली पर एक ऐसा बम फूटा है, जिसकी गूँज लखनऊ तक सुनाई देगी। स्वाधीन सिंह उर्फ छोटू हत्याकांड में पुलिस द्वारा किए गए खुलासे को ‘सफेद झूठ और फरेब’ का पुलिंदा करार देते हुए सोशल एक्टिविस्ट अरविंद कुमार पांडेय ने सीधे पुलिसिया ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है।
अरविंद पांडेय ने आरोप लगाया है कि बदलापुर पुलिस और SOG टीम ने असली हत्यारों से साठगांठ कर, तीन नाबालिग छात्रों को ‘बली का बकरा’ बनाया है। इस अन्याय के खिलाफ 11 फरवरी 2026 को ‘जनता की अदालत’ सजने जा रही है, जो भ्रष्ट तंत्र की चूलें हिलाकर रख देगी।
*पुलिसिया स्क्रिप्ट के वो ‘छेद’, जो चीख-चीख कर बता रहे हैं फर्जीवाड़ा*
आमंत्रण-पत्र में पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ाते हुए तीन ऐसे सवाल खड़े किए गए हैं, जिनका जवाब देना पुलिस के लिए नामुमकिन लग रहा है!
* कातिल या मददगार?: आरोपी बनाया गया आलोक मिश्रा खुद लाश के पास खड़ा रहा और परिजनों को सूचना दी। क्या दुनिया का कोई भी कातिल वारदात के बाद पुलिस और घरवालों का इंतजार करता है?
* तारीखों का मकड़जाल: जब छात्रों को दिसंबर में ही उठा लिया गया था, तो 7 जनवरी को ‘बहरा पार्क’ से गिरफ्तारी की नौटंकी क्यों की गई? क्या पुलिस की डायरी में कानून नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की कलम चलती है?
* वर्दी की सरपरस्ती: आरोप संगीन है— “असली हत्यारे SOG प्रभारी और कोतवाली पुलिस के संरक्षण में खुलेआम घूम रहे हैं।”
*DM-SP की ‘अदालत’ में होगी अग्निपरीक्षा*
समाजसेवी ने इस ‘जनता की अदालत’ में जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जज की भूमिका में आमंत्रित कर उन्हें सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या ये आला अधिकारी जनता के सवालों का सामना करने की हिम्मत जुटा पाएंगे? या फिर खाकी का यह ‘कथित फर्जीवाड़ा’ फाइलों में ही दफन कर दिया जाएगा? “यह न्याय नहीं, पुलिसिया गुंडागर्दी की पराकाष्ठा है। तीन निर्दोष बच्चों की जिंदगी से खेलने वाले अफसरों को बेनकाब करके ही दम लेंगे।- अरविंद कुमार पांडेय (अध्यक्ष- भारतीय हिन्दू मित्र परिषद)
*11 फरवरी: भ्रष्टाचार के खिलाफ महासंग्राम*
बदलापुर के विद्यावती रिसॉर्ट में दोपहर 1 बजे से जुटने वाली भीड़ यह तय करेगी कि जौनपुर में कानून का राज है या ‘वर्दीधारियों की मनमानी’ का। स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और इसे एक बड़े जन-आंदोलन की शुरुआत माना जा रहा है।