राजधानी:चिनहट पुलिस का कारनामा, वसूली न कर पाने पर बस को किया सीज, सवालों के घेरे में उच्चाधिकारी भी
कामता पुलिस चौकी इंचार्ज व एस आई विवेक मिश्रा पर गंभीर आरोप, थानाध्यक्ष चिनहट पर भी उठ रहे सवाल,


*लखनऊ के कामता चौराहे पर स्थानीय पुलिस व दलालों का ‘सिंडिकेट*
*थानाध्यक्ष चिनहट व एस आई विवेक मिश्रा की भूमिका पर सवाल*
लखनऊ। राजधानी के चिनहट थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाला कामता चौराहा इन दिनों अवैध बस संचालन का मुख्य गढ़ बन चुका है। सरकारी बस अड्डे के ठीक सामने नियमों को ताक पर रखकर निजी गाड़ियों का बेखौफ संचालन किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में कथित तौर पर ‘कामता पुलिस चौकी’ की संलिप्तता सामने आ रही है, जिसकी नाक के नीचे सुबह से शाम तक वसूली का बाजार सजता है।
*चाय की दुकान बनी ‘कंट्रोल रूम*
हैरानी की बात यह है कि इस अवैध स्टैंड का संचालन किसी दफ्तर से नहीं, बल्कि चौराहे पर स्थित ‘बाबा टी स्टाल’ से किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, यहीं से पूरा सिंडिकेट ऑपरेट होता है। यात्रियों को फांसने से लेकर गाड़ियों की लाइन लगवाने तक का काम इसी दुकान के इर्द-गिर्द केंद्रित है।
*प्रति गाड़ी 500 रुपये की ‘टोकन’ वसूली*
इस अवैध कारोबार का अर्थशास्त्र बेहद व्यवस्थित है। यहाँ से संचालित होने वाली प्रत्येक निजी गाड़ी से ₹500 का टोकन एस आई विवेक मिश्रा द्वारा शुल्क वसूला जाता है। सुबह 5 बजे से ही यह खेल शुरू हो जाता है जो देर शाम 7 बजे तक निर्बाध रूप से चलता है। प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों से होने वाली इस अवैध कमाई का हिस्सा ऊपर तक जाने की चर्चाएं आम हैं।
*सक्रिय सिंडिकेट के प्रमुख नाम*
स्थानीय स्तर पर इस स्टैंड को चलाने वालों में कुछ खास नाम चर्चा में हैं, जो चाय-नाश्ते की दुकानों की आड़ में अपना नेटवर्क चला रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
* राजू बाबा और राहुल यादव
* सरदार और सुनील
* पंकज सिंह और अजीत यादव
ये लोग खुद दुकानों पर बैठकर अपने गुर्गों के जरिए स्टैंड संचालित करवाते हैं। सरेराह होने वाली इस गतिविधि से जहाँ परिवहन निगम को राजस्व की हानि हो रही है, वहीं आम जनता को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है।
*पुलिस की भूमिका संदिग्ध*
सबसे बड़ा सवाल चिनहट पुलिस और कामता चौकी पर उठता है। बस अड्डे के बिल्कुल सामने घंटों गाड़ियां खड़ी रहती हैं, सवारी भरी जाती है और वसूली होती है, लेकिन पुलिस की खामोशी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। क्या उच्च अधिकारियों को इस ‘टोकन सिस्टम’ की भनक नहीं है, या जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध स्टैंड संचालकों और इसमें लिप्त कर्मचारियों तथा एस आई विवेक मिश्रा पर सख्त कार्रवाई करे।
