एलान ए जंग- सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय ने मध्यप्रदेश सरकार को ललकारा
आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर उबले सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय

*भोपाल: आंदोलन की अनुमति न मिलने पर होगी आर-पार जंग-अरविन्द पाण्डेय*
*24 दिसंबर को ‘महायुद्ध’ का एलान संभव*
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी के विरुद्ध मोर्चा खोल रहे सोशल एक्टिविस्ट और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 16 दिसंबर को प्रस्तावित भूख हड़ताल को पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बाद अब सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय ने सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है।
*प्रशासन के आश्वासन पर संशय*
मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल पुलिस प्रशासन ने 16 दिसंबर की भूख हड़ताल को रोकते हुए आगामी 24 दिसंबर को एक दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति देने का मौखिक आश्वासन दिया है। हालांकि, सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय का कहना है कि प्रशासन के इस आश्वासन में कोई ठोस गारंटी नहीं है। उन्हें अंदेशा है कि पिछले अनुभवों की तरह अंतिम समय पर सुरक्षा कारणों का हवाला देकर फिर से अनुमति निरस्त की जा सकती है।
*मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के खिलाफ ‘महायुद्ध’ की चेतावनी*
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 24 दिसंबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इस स्थिति में आंदोलनकारी उसी दिन भोपाल में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष केंद्रों को चुनौती दी जाएगी।
*सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द पाण्डेय के निशाने पर मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं:*
* संतोष वर्मा: जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
* मुख्यमंत्री मोहन यादव: आंदोलनकारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री द्वारा संतोष वर्मा को संरक्षण दिया जा रहा है।
* मुख्य सचिव (MP): प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने और मामले को दबाने के आरोप में मुख्य सचिव के खिलाफ भी मोर्चा खोला जाएगा।
रणनीति: प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगा शंखनाद
अरविन्द पाण्डेय ने चेतावनी दी है कि 24 तारीख को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस महज सूचना साझा करने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि यह “महायुद्ध” का औपचारिक एलान होगा। इसमें संतोष वर्मा को मिल रहे कथित राजनैतिक संरक्षण के साक्ष्य सार्वजनिक किए जा सकते हैं और भविष्य में प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा रखी जाएगी।
प्रशासन लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को दबा रहा है। यदि हमें 24 दिसंबर को बैठने नहीं दिया गया, तो हम प्रेस के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के संरक्षणवादी रवैये को उजागर करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग शुरू करेंगे।” — आंदोलन समिति के प्रवक्ता
*अगली कार्रवाई की प्रतीक्षा*
अब सबकी नजरें 24 दिसंबर पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन अनुमति देकर लोकतांत्रिक गरिमा को बनाए रखता है या फिर भोपाल की सड़कों पर एक बड़ा राजनैतिक और प्रशासनिक संघर्ष देखने को मिलता है।
