वोट कटौती और मतुआ समुदाय को लेकर गरजे तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी
सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा व चुनाव आयोग पर किया करारा प्रहार

*पश्चिम बंगाल में सियासी पारा हाई: टीएमसी ने फूंका चुनावी बिगुल*
*वोट कटौती’ और मतुआ समुदाय पर महासंग्राम*
*श्वेता राय”सोनी”*
*राज्य ब्यूरो-पश्चिम बंगाल*
कोलकाता:पश्चिम बंगाल की राजनीति अगले 150 दिनों के लिए पूरी तरह से गर्मा गई है, जहाँ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतुआ समुदाय के वोट बैंक को लेकर सीधा टकराव शुरू हो गया है। टीएमसी ने जहां संगठन को लामबंद होने का आदेश दिया है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर ‘वोट चोर’ होने का सीधा आरोप लगाया है।
*टीएमसी की दोहरी रणनीति: कैडर लामबंद, बीजेपी पर वार*
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के 24 हजार कैडर कार्यकर्ताओं को अगले 150 दिन के लिए पूरी तरह ‘लामबंद’ होने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यह कदम आगामी लोकसभा चुनाव और चल रही मतदाता सूची की शुद्धिकरण प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतुआ समुदाय के गढ़ में एक बड़ी रैली कर बीजेपी की घेराबंदी की। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि भाजपा मतुआ समुदाय को ₹100 में ‘वोटर कार्ड (वोट देने का अधिकार) पर्ची’ बेचकर उन्हें नागरिकता के नाम पर गुमराह कर रही है। ममता ने दावा किया कि उन्होंने भाजपा की इस ‘वोट चोर’ रणनीति की ‘पोल खोल’ दी है। भाजपा ने फिलहाल इस आरोप पर चुप्पी साध रखी है।
*चुनाव आयोग से सीधी भिड़ंत 28 नवंबर को*
तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल 28 नवंबर को निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मिलने वाला है, जिसकी अनुमति आयोग ने दे दी है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि लगभग 10 लाख वैध वोट काटे जाने की साज़िश चल रही है, जिनमें से करीब 6.5 लाख वोट मृतकों के बताए जा रहे हैं।
*बीजेपी के ‘बाहरी’ पर्यवेक्षक और फेक वीडियो का विवाद*
तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी की रणनीति पर हमले का एक और मौका मिला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के लिए जिन पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, उनमें एक भी बंगाली चेहरा नहीं है, जिसे टीएमसी ‘बाहरी बनाम बंगाली’ का नैरेटिव सेट करने में इस्तेमाल कर सकती है।
इसके अलावा, भाजपा समर्थकों द्वारा फेक न्यूज़ फैलाने की एक कोशिश भी विफल हुई है। जम्मू-कश्मीर के एक पूर्व डीजीपी ने नदिया जिले के सीमावर्ती इलाके का एक वीडियो बांग्लादेशियों में भगदड़ बताकर जारी किया, जिसे तुरंत ऑल्ट न्यूज़ ने फैक्ट-चेक में फेक घोषित कर दिया।
बंगाल, जो फुटबॉल का दीवाना है, अब इस तीखे राजनीतिक संघर्ष को ‘खेला’ के रूप में देख रहा है। टीएमसी का रुख स्पष्ट है: किक ऑफ अभी होना है। आने वाले दिन राज्य की चुनावी दिशा तय करेंगे।
