तीखे व्यंग्य के महारथी नवलकान्त सिन्हा कौशल साहित्य महोत्सव की शान बनेंगे
राजा टिकैत राय के लेखक व अमर उजाला के इनपुट हेड राजधानी में करेंगे संवाद
*तीखे व्यंग्य के महारथी नवल कांत सिन्हा कौशल साहित्य महोत्सव की शान बनेंगे*
*राजा टिकैत राय’ के लेखक लखनऊ में करेंगे संवाद*
*कृष्णानन्द शर्मा”शिवराम*
लखनऊ ,साहित्य, संस्कृति और गहन चिंतन के महाकुंभ कोशल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के आगामी संस्करण में देश के प्रख्यात पत्रकार और बहुआयामी लेखक नवल कांत सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति दर्ज़ की जाएगी। सामाजिक और राजनीतिक विमर्शों पर अपने मर्मभेदी सुगम्य व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध सिन्हा, 27 से 30 नवंबर 2025 तक राजधानी लखनऊ के यूपी दर्शन पार्क में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे।
*सशक्त हिंदी गद्य और बहुआयामी अनुभव*
पत्रकारिता के तीनों स्वरूपों—प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया—में व्यापक अनुभव रखने वाले नवल कांत सिन्हा ने अपने लिए एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी पहचान केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि एक ऐसे लेखक की है जो सशक्त हिंदी गद्य और बेबाक शैली के साथ जटिल यथार्थ को बेहद सम्मोहक आख्यानों में ढालने की क्षमता रखते हैं।
सिन्हा की प्रसिद्ध पुस्तक, ‘राजा टिकैत राय’, भारतीय इतिहास और समकालीन सामाजिक परिदृश्य पर उनके गहन चिंतन को दर्शाती है। लखनऊ की साहित्यिक विरासत के बीच उनकी यह उपस्थिति पाठकों और इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।
*खुश रहो, हल्का रहो’ की फिलॉसफी से निकलता है व्यंग्य*
एक व्यंग्यकार के रूप में, नवल कांत सिन्हा मात्र कटाक्ष नहीं करते, बल्कि अपने लेखन में गहरी अंतर्दृष्टि और उत्कृष्ट सांस्कृतिक चेतना का समावेश करते हैं। उनका लेखन उस मौलिक दर्शन से प्रेरित है जो उन्हें राह दिखाता है—”खुश रहो, हल्का रहो, क्रोध और चिंताओं को बीत जाने दो।” उनका मानना है कि तीखा व्यंग्य तभी प्रभावी होता है जब वह द्वेषमुक्त और निर्मल मन से किया जाए। इसी कारण, उनकी आवाज़ पाठकों के बीच गहरी ज़मीन से जुड़ी हुई और साथ ही बेहद ताज़गी भरी मानी जाती है।
*कौशल साहित्य महोत्सव के मंच पर सिन्हा का संवाद सत्र*
मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक परिवेश पर आत्ममंथन करने और हास्य के माध्यम से सत्य को समझने का एक अनूठा अवसर होगा। महोत्सव समिति ने कहा, “नवल कांत सिन्हा जैसे वैचारिक स्तंभ की मेजबानी करके केएलएफ खुद को सौभाग्यशाली मानता है। उनकी उपस्थिति से लखनऊ के साहित्यिक क्षितिज को नई ऊँचाई मिलेगी।”
लखनऊ के साहित्य प्रेमियों से अपील है कि वे इस विशिष्ट संवाद का हिस्सा बनने के लिए, 27 से 30 नवंबर 2025 के बीच यूपी दर्शन पार्क अवश्य पधारें और अपने टिकट जल्द बुक करा लें। 

