केजीएमयू बना दलालों का अड्डा,खून तस्करी चरम पर, गार्ड और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से फल-फूल रहा है धंधा, जांच व कार्यवाही की मांग
मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा गार्ड और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से फल-फूल रहा है धंधा, उबेद और पठान का गैंग द्वारा संचालित है अवैध कारोबार
*केजीएमयू में ‘रक्त और अंग’ तस्करी का काला कारोबार*
*सुरक्षा घेरे में सेंध: उबेद और पठान गैंग को गार्डों और पुलिस की शह; हड़कंप*
*कृष्णानंद शर्मा*
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर गंभीर आपराधिक आरोपों को लेकर चर्चा में है। चिकित्सा शिक्षा के इस प्रतिष्ठित संस्थान में ‘खून की दलाली’ और मानव अंगों की अवैध तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के एक संगठित रैकेट के सक्रिय होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध धंधे को संस्थान के ही सुरक्षा गार्डों और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत से संचालित किया जा रहा है।
*ट्रॉमा सेंटर और ब्लड बैंक निशाने पर*
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे काले कारोबार के केंद्र में ‘उबेद और ‘पठान’ नामक दो व्यक्ति हैं। ये दोनों मुख्य आरोपी KGMU के ट्रॉमा सेंटर और ब्लड बैंक के आसपास अपना नेटवर्क चलाते हैं।
* मजबूरी का फायदा: ये दलाल ग्रामीण क्षेत्रों से आए गरीब और बेबस मरीजों के तीमारदारों को निशाना बनाते हैं। रक्त की तत्काल आवश्यकता बताकर, वे सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए कई गुना अधिक दाम पर खून बेचते हैं, जिससे मरीज के परिजन शोषण का शिकार होते हैं।
* अंग तस्करी की आशंका: खून की दलाली से जुड़ा यह मामला अब मानव अंगों की तस्करी की गंभीर आशंका की ओर इशारा कर रहा है। चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी दलाली किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क के बिना संभव नहीं है, जिसका उद्देश्य कमजोर वर्ग के लोगों को अंग दान के नाम पर धोखा देना या अवैध तरीके से अंग निकालना हो सकता है।
*कमीशन’ पर चलता है सुरक्षा घेरा*
यह तथ्य कि बाहरी व्यक्ति उबेद और पठान इतने संवेदनशील क्षेत्र में बेखौफ सक्रिय हैं, KGMU की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि संस्थान के कुछ सुरक्षा गार्डों को इस धंधे से ‘कमीशन’ मिलता है, जिसके एवज में वे आरोपियों को परिसर में बिना रोक-टोक घुसने और काम करने की अनुमति देते हैं।
इसके अलावा, स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। अस्पताल के भीतर हो रहे इस संगठित अपराध को पुलिस की निष्क्रियता या जानबूझकर अनदेखी के बिना इतनी मजबूती से स्थापित करना असंभव है।
*प्रशासनिक चुप्पी, उच्च-स्तरीय जांच की मांग*
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद भी, KGMU प्रशासन की तरफ से कोई त्वरित और निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विभागीय जाँच की मांग: “यह स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला अपराध है। राज्य सरकार को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित कर पुलिस-गार्ड-दलाल की तिकड़ी का पर्दाफाश करना चाहिए- शिवेंद्र सिंह भाजपा नेता
मरीजों के इलाज के पवित्र स्थल को इस तरह के संगठित अपराध से मुक्त करने के लिए, शीघ्र और कठोर कानूनी कार्रवाई की अपेक्षा है। 
